17 साल बाद दहेज प्रताड़ना का फैसला, तीन को जेल की सजा
कानपुर देहात की एक अदालत ने दहेज प्रताड़ना से तंग आकर विवाहिता द्वारा आत्महत्या करने के 17 साल पुराने मामले में तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है।
कानपुर देहात की एक अदालत ने दहेज प्रताड़ना से तंग आकर विवाहिता द्वारा आत्महत्या करने के 17 साल पुराने मामले में तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है। एडीजे-03/डकैती कोर्ट, कानपुर देहात ने मुख्य आरोपी धीरेन्द्र सिंह को 7 साल की कड़ी सजा और 27,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। साथ ही दो अन्य महिला आरोपियों को 3-3 साल की जेल और 7,000-7,000 रुपये जुर्माने की सजा दी गई है।
यह मामला 25 नवंबर 2009 को थाना गजनेर इलाके में दर्ज हुआ था। पीड़िता लगातार दहेज की मांग और प्रताड़ना से परेशान थी और अंततः उसने आत्महत्या कर ली थी। मामला धारा 498ए और 306 आईपीसी के तहत दर्ज किया गया था, जो दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़ी धाराएं हैं। 28 मार्च 2011 को आरोप पत्र दाखिल किया गया था।
उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत थाना गजनेर पुलिस, कोर्ट पैरोकार, अभियोजन पक्ष और मॉनिटरिंग सेल ने अदालत में मजबूत पैरवी की। ठोस सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर 20 अगस्त 2026 को यह फैसला सुनाया गया।
यह फैसला दहेज प्रताड़ना के खिलाफ एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। विवेक त्रिवेदी की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला इस बात का उदाहरण है कि देर से ही सही, लेकिन न्याय जरूर मिलता है। ऑपरेशन कन्विक्शन जैसी मुहिम से पुराने मामलों में भी अपराधियों को सजा दिलाने में मदद मिल रही है। यह फैसला दहेज जैसी सामाजिक बुराई के खिलाफ लड़ाई में एक अहम कदम माना जा रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यह मामला कितने साल पुराना था और इसमें क्या आरोप थे?
यह मामला 17 साल पुराना था जो नवंबर 2009 में दर्ज हुआ था। इसमें दहेज की मांग और प्रताड़ना से तंग आकर एक महिला ने आत्महत्या कर ली थी। मामला धारा 498ए और 306 आईपीसी के तहत दर्ज किया गया था।
अदालत ने तीनों आरोपियों को क्या सजा दी?
मुख्य आरोपी धीरेन्द्र सिंह को 7 साल की कड़ी सजा और 27,000 रुपये जुर्माना दिया गया। दो अन्य महिला आरोपियों को 3-3 साल की जेल और 7,000-7,000 रुपये का जुर्माना दिया गया।
इस फैसले में ऑपरेशन कन्विक्शन की क्या भूमिका थी?
उत्तर प्रदेश पुलिस का ऑपरेशन कन्विक्शन पुराने मामलों में अपराधियों को दोषी साबित करने के लिए काम कर रहा है। इस मामले में थाना गजनेर पुलिस, कोर्ट और अभियोजन पक्ष ने मजबूत पैरवी की जिससे यह फैसला आया।
आरोप पत्र कब दाखिल किया गया था और फैसला कब आया?
आरोप पत्र 28 मार्च 2011 को दाखिल किया गया था। 17 साल बाद 20 अगस्त 2026 को ठोस सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर यह फैसला सुनाया गया।
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