सूरत के उधना स्टेशन पर बना भारत का पहला स्टील पैदल यात्री सबवे
सुर्खी: पटरी के नीचे सबवे: सूरत के उधना स्टेशन पर बना भारत का पहला स्टील पैदल यात्री अंडरपास सूरत के उधना रेलवे स्टेशन पर भारत का पहला स्टील पैदल यात्री सबवे यात्रियों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम
सूरत के उधना रेलवे स्टेशन पर भारत का पहला स्टील पैदल यात्री सबवे
यात्रियों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए, सूरत के उधना रेलवे स्टेशन पर भारत का पहला स्टील पैदल यात्री सबवे बनाया गया है। यह अनोखा प्रोजेक्ट शुक्रवार को सिर्फ आठ घंटे में पूरा किया गया। इसका मकसद व्यस्त स्टेशन पर पटरियां पार करने के दौरान होने वाले हादसों को रोकना है। यहां हर दिन करीब 10,000 लोग आते-जाते हैं। यह सबवे 'ट्रैक कट-एंड-कवर' तकनीक से बना है, जिससे ट्रेन संचालन में ज्यादा रुकावट नहीं आई।
सुरक्षा की गंभीर समस्या का समाधान
यह नया सबवे रेलवे की एक पायलट प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसका मकसद पटरियों पर होने वाले हादसों को रोकना है। खासकर उन जगहों पर जहां ट्रैक घुमावदार हैं और दूर तक देख पाना मुश्किल होता है। उधना स्टेशन सूरत के कपड़ा उद्योग में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों के लिए एक अहम ट्रांजिट पॉइंट है। छुट्टियों के दौरान और हाल ही में एलपीजी की कमी जैसी समस्याओं के समय यहां यात्रियों की संख्या तीन गुना तक बढ़ गई थी। कई यात्री प्लेटफॉर्म बदलने के लिए पटरियां पार करते हैं, जिससे हादसे होते हैं।
नए तरीके से निर्माण
12 मीटर लंबा, 4.8 मीटर चौड़ा और 2.7 मीटर ऊंचा यह स्टील सबवे लार्सन एंड टूब्रो ने वेस्टर्न रेलवे के अधिकारियों की देखरेख में बनाया। इसके लिए पटरियों को काटकर गड्ढा खोदा गया, जिसमें पहले से तैयार स्टील आर्च स्ट्रक्चर डाला गया। इसके बाद पटरियों को दोबारा लगाया गया और गड्ढे को मिट्टी से भर दिया गया। इस तकनीक से पारंपरिक आरसीसी (रिइनफोर्स्ड सीमेंट कंक्रीट) टनल की तुलना में कम समय लगा और ट्रेन संचालन में भी ज्यादा रुकावट नहीं आई।
भविष्य की संभावनाएं
वेस्टर्न रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि इस तकनीक को देश के अन्य व्यस्त रेलवे स्टेशनों और हाई-ट्रैफिक रेल सेक्शनों पर भी अपनाया जा सकता है। खतरनाक पटरियों पर क्रॉसिंग खत्म कर यह स्टील सबवे यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाएगा और भीड़भाड़ वाले स्टेशनों पर यातायात को सुगम बनाएगा। उधना स्टेशन पर इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में एक अहम मील का पत्थर है।
यह नई तकनीक न केवल एक पुरानी सुरक्षा समस्या का समाधान करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि आधुनिक इंजीनियरिंग समाधान भारत के सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को कैसे बदल सकते हैं।
स्रोत: Indian Express
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सूरत के उधना स्टेशन पर बने इस सबवे को बनाने में कितना समय लगा?
यह भारत का पहला स्टील पैदल यात्री सबवे सिर्फ आठ घंटे में पूरा किया गया था। इसे ट्रैक कट-एंड-कवर तकनीक से बनाया गया, जिससे ट्रेन संचालन में ज्यादा रुकावट नहीं आई।
यह सबवे बनाने के पीछे का मुख्य कारण क्या था?
उधना स्टेशन पर हर दिन करीब 10,000 लोग आते-जाते हैं। यात्रियों की सुरक्षा के लिए यह सबवे बनाया गया है ताकि पटरियां पार करते समय होने वाले हादसों को रोका जा सके।
इस स्टील सबवे के माप क्या हैं?
यह सबवे 12 मीटर लंबा, 4.8 मीटर चौड़ा और 2.7 मीटर ऊंचा है। इसे Larsen and Toubro ने Western Railway के अधिकारियों की देखरेख में बनाया है।
क्या यह तकनीक दूसरे रेलवे स्टेशनों पर भी अपनाई जा सकती है?
जी हां, Western Railway के अधिकारियों का कहना है कि इस स्टील सबवे तकनीक को देश के अन्य व्यस्त रेलवे स्टेशनों और हाई-ट्रैफिक रेल सेक्शनों पर भी अपनाया जा सकता है।
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