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भारत ने QS वर्ल्ड रैंकिंग 2026 में 52 यूनिवर्सिटीज़ के साथ 5वां स्थान पाया

भारत QS वर्ल्ड रैंकिंग 2026 में 52 यूनिवर्सिटीज़ के साथ 5वें नंबर पर भारत ने QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 में 52 संस्थानों के साथ 5वां स्थान हासिल किया है।

India claims 5th spot globally with 52 universities in QS World Rankings 2026

भारत QS वर्ल्ड रैंकिंग 2026 में 52 यूनिवर्सिटीज़ के साथ 5वें नंबर पर

भारत ने QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 में 52 संस्थानों के साथ 5वां स्थान हासिल किया है। ये देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जो पिछले दशक में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में तेज़ी से आगे बढ़ा है।

ये रैंकिंग 106 देशों की 1,500 से ज़्यादा यूनिवर्सिटीज़ का आकलन करती है। इस बार भी सूची में पहले स्थान पर मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) है। इसके बाद स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और इम्पीरियल कॉलेज लंदन संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर हैं। हालांकि अमेरिका और यूके की यूनिवर्सिटीज़ का दबदबा बरकरार है, लेकिन भारतीय और एशियाई संस्थानों ने भी बड़ी प्रगति दिखाई है।

भारतीय संस्थानों में, IIT दिल्ली ने देश की टॉप रैंकिंग यूनिवर्सिटी के तौर पर अपनी जगह बरकरार रखी है। ये ग्लोबल रैंकिंग में 118वें स्थान पर पहुंच गया है, जो किसी भी भारतीय यूनिवर्सिटी की अब तक की सबसे अच्छी रैंकिंग के बराबर है। अन्य टॉप भारतीय संस्थानों में IIT बॉम्बे, IIT मद्रास, IIT खड़गपुर और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) शामिल हैं। ये दिखाता है कि IITs और प्रमुख सरकारी संस्थान रैंकिंग में हावी हैं।

भारत की इस सफलता की कहानी सिर्फ IITs तक सीमित नहीं है। 2017 में जहां सिर्फ 14 भारतीय संस्थान इस सूची में थे, वहीं 2026 में ये संख्या बढ़कर 52 हो गई है। ये 271% की बढ़ोतरी है, जो G20 देशों में सबसे तेज़ है। खास बात ये है कि इस साल रैंकिंग में शामिल 52% भारतीय यूनिवर्सिटीज़ ने अपनी पोजिशन बेहतर की है और 18 ने अपनी अब तक की सबसे अच्छी रैंकिंग हासिल की है।

रैंकिंग में भारत की रिसर्च और रोजगार के क्षेत्र में बढ़ती ताकत को भी दिखाया गया है। 11 भारतीय यूनिवर्सिटीज़ "साइटेशन्स पर फैकल्टी" के मामले में दुनिया के टॉप 100 में हैं। वहीं, 6 संस्थान "एम्प्लॉयर रेप्युटेशन" में टॉप 100 में शामिल हैं। भारत अब दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा रिसर्च आउटपुट बेस बन गया है, जो उच्च शिक्षा में बढ़ती भागीदारी और युवा आबादी की वजह से संभव हुआ है।

दूसरी ओर, जहां अमेरिका और जर्मनी जैसे कई विकसित देशों की यूनिवर्सिटीज़ की रैंकिंग गिरी है, वहीं भारत ने सुधार की दर में बढ़त दिखाई है। इस साल 26 भारतीय यूनिवर्सिटीज़ की रैंकिंग में सुधार हुआ, 9 ने अपनी पोजिशन बरकरार रखी, 15 की रैंकिंग गिरी और 2 पहली बार इस सूची में शामिल हुईं।

QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में भारत की बढ़ती मौजूदगी पिछले दशक में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हुए बड़े बदलावों को दर्शाती है। ये देश को शिक्षा और रिसर्च में एक उभरती हुई वैश्विक ताकत के रूप में स्थापित कर रहा है।

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