बहराइच में स्कूल बसों के चालकों की स्वास्थ्य और आंखों की जांच शुरू
बहराइच में स्कूल बसों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है।
बहराइच में स्कूल बसों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। मिशन सेफ फ्यूचर 2.0 के तहत शनिवार को गुरु कृपा डिवाइन ग्रेस पब्लिक स्कूल में स्कूल वाहन चालकों और परिचालकों के लिए खास स्वास्थ्य और आंखों की जांच का कैंप लगाया गया। इस कैंप में कुल 63 चालकों और परिचालकों की सेहत और नजर की पूरी जांच हुई। इस पहल का मकसद यह पक्का करना है कि बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने वाले ड्राइवर पूरी तरह फिट हों और गाड़ी चलाने के लायक हों।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और विभाग के कर्मचारियों ने चालकों की सामान्य सेहत के साथ उनकी आंखों की भी अच्छी तरह जांच की। इस मौके पर एआरटीओ सुशील कुमार ने सभी चालकों को ट्रैफिक नियमों को लेकर जागरूक किया और कहा कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने चालकों को गाड़ी चलाते वक्त मोबाइल फोन इस्तेमाल न करने, नशे में गाड़ी न चलाने, सीट बेल्ट लगाने और तय स्पीड लिमिट में ही गाड़ी चलाने के सख्त निर्देश दिए।
एआरटीओ ने साफ कहा कि स्कूल वाहनों में बच्चों की सुरक्षा के मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। चालक सिर्फ अपनी नहीं बल्कि वाहन में बैठे मासूम बच्चों की जान के भी जिम्मेदार हैं। इसलिए गाड़ी की फिटनेस, चालक की सेहत, नजर की जांच और ट्रैफिक नियमों का पालन बेहद जरूरी है।
अधिकारियों ने चालकों को सड़क सुरक्षा के अलग-अलग पहलुओं की जानकारी दी और दुर्घटनाओं से बचने के लिए जरूरी सावधानियां बताईं। एआरटीओ सुशील कुमार ने बताया कि मिशन सेफ फ्यूचर 2.0 के जरिए स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा रही है ताकि सड़क हादसों पर लगाम लगे और बच्चों को सुरक्षित आवाजाही मिल सके। कार्यक्रम में क्षेत्राधिकारी यातायात राज सिंह, स्वास्थ्य विभाग के एओ मकबूल हैदर जाफरी, अरुण यादव, अब्दुर्रहीम समेत परिवहन और स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बहराइच में स्कूल बसों के चालकों की जांच का कैंप कहां लगाया गया?
शनिवार को गुरु कृपा डिवाइन ग्रेस पब्लिक स्कूल में स्कूल वाहन चालकों और परिचालकों के लिए स्वास्थ्य और आंखों की जांच का कैंप लगाया गया। इस कैंप में कुल 63 चालकों और परिचालकों की जांच हुई।
मिशन सेफ फ्यूचर 2.0 का मकसद क्या है?
इस मिशन का मकसद यह पक्का करना है कि स्कूल बसें चलाने वाले ड्राइवर पूरी तरह फिट हों और गाड़ी चलाने के लायक हों। इसके जरिए स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा रही है ताकि सड़क हादसों पर लगाम लगे।
एआरटीओ ने चालकों को क्या-क्या निर्देश दिए?
एआरटीओ ने चालकों को गाड़ी चलाते वक्त मोबाइल फोन इस्तेमाल न करने, नशे में गाड़ी न चलाने, सीट बेल्ट लगाने और तय स्पीड लिमिट में ही गाड़ी चलाने के सख्त निर्देश दिए।
स्कूल बस के चालक किसकी जिम्मेदारी लेते हैं?
चालक सिर्फ अपनी नहीं बल्कि वाहन में बैठे मासूम बच्चों की जान के भी जिम्मेदार हैं। इसलिए गाड़ी की फिटनेस, चालक की सेहत, नजर की जांच और ट्रैफिक नियमों का पालन बेहद जरूरी है।
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