गवर्नर गहलोत ने आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर ले जाने की अपील की
गवर्नर ने परंपरा और तकनीक के तालमेल पर जोर दिया गडग: गवर्नर थावरचंद गहलोत ने भारत की प्राचीन विरासत और आधुनिक तकनीक को मिलाकर आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर ले जाने की जरूरत पर जोर दिया है।
गवर्नर ने परंपरा और तकनीक के तालमेल पर जोर दिया
गडग: गवर्नर थावरचंद गहलोत ने भारत की प्राचीन विरासत और आधुनिक तकनीक को मिलाकर आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर ले जाने की जरूरत पर जोर दिया है। गुरुवार को गडग जिले के गजेंद्रगढ़ में भगवान महावीर जैन आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के दीक्षांत समारोह में बोलते हुए गवर्नर ने कहा कि आयुर्वेद सिर्फ एक चिकित्सा प्रणाली नहीं है, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली के लिए एक वैज्ञानिक मार्गदर्शक है।
कर्नाटक का आयुर्वेद में योगदान
गवर्नर गहलोत ने आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा में कर्नाटक के अहम योगदान की तारीफ की। उन्होंने राज्य के मेडिकल एजुकेशन संस्थानों और यूनिवर्सिटीज के मजबूत नेटवर्क की सराहना की। गवर्नर ने कहा कि ये संस्थान युवा डॉक्टरों के लिए एक उज्ज्वल भविष्य तैयार कर रहे हैं। उन्होंने ग्रेजुएट हो रहे छात्रों से भगवान महावीर की शिक्षाओं से प्रेरणा लेने और समाज की सेवा में खुद को समर्पित करने की अपील की।
आधुनिक चुनौतियों का समाधान है आयुर्वेद
गवर्नर ने आयुर्वेद को पीढ़ियों के शोध और अनुभव का नतीजा बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य दोहरा है - स्वस्थ लोगों की सेहत बनाए रखना और बीमारों का इलाज करना। उन्होंने कहा कि आज की तनावपूर्ण जीवनशैली से होने वाली बीमारियों का समाधान आयुर्वेद में मौजूद है। आयुर्वेद आधुनिक स्वास्थ्य समस्याओं का प्रभावी समाधान देता है।
भारत की प्राचीन धरोहर पर गर्व
गवर्नर गहलोत ने आयुर्वेद और योग के जरिए भारत के वैश्विक योगदान को रेखांकित करते हुए नागरिकों से देश की प्राचीन ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इन परंपराओं को संरक्षित और बढ़ावा देने के साथ-साथ आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने की जरूरत है।
दीक्षांत समारोह की झलकियां
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के चेयरमैन अशोककुमार बगमार ने की। सचिव अजीतकुमार बगमार ने शिक्षा को मूल्य आधारित बनाने के संस्थान के प्रयासों पर प्रकाश डाला। प्रिंसिपल डॉ. नारायणराव ने उद्घाटन भाषण दिया। समारोह में कई गणमान्य लोग मौजूद थे, जिनमें डायरेक्टर्स सदीप जिनवासरा, ताराबाई बगमार और वर्धमान बगमार, डिप्टी कमिश्नर सी.एन. श्रीधर और एसपी रोहन जगदीश शामिल थे।
परंपरा और तकनीक के तालमेल की यह अपील ऐसे समय में आई है जब आयुर्वेद एक समग्र स्वास्थ्य और वेलनेस दृष्टिकोण के रूप में अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल कर रहा है। गवर्नर गहलोत की बातें भारत की प्राचीन प्रथाओं की आधुनिक स्वास्थ्य समस्याओं को हल करने और वैश्विक कल्याण में योगदान देने की क्षमता की याद दिलाती हैं।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गवर्नर गहलोत ने आयुर्वेद को लेकर क्या कहा?
गवर्नर गहलोत ने कहा कि आयुर्वेद सिर्फ एक चिकित्सा प्रणाली नहीं है, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली के लिए एक वैज्ञानिक मार्गदर्शक है। उन्होंने भारत की प्राचीन विरासत और आधुनिक तकनीक को मिलाकर आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर ले जाने की जरूरत पर जोर दिया।
आयुर्वेद का असली उद्देश्य क्या है?
गवर्नर के अनुसार आयुर्वेद का उद्देश्य दोहरा है - स्वस्थ लोगों की सेहत बनाए रखना और बीमारों का इलाज करना। यह पीढ़ियों के शोध और अनुभव का नतीजा है।
आजकल की बीमारियों का समाधान आयुर्वेद में कैसे है?
गवर्नर ने कहा कि आज की तनावपूर्ण जीवनशैली से होने वाली बीमारियों का समाधान आयुर्वेद में मौजूद है। आयुर्वेद आधुनिक स्वास्थ्य समस्याओं का प्रभावी समाधान देता है।
कर्नाटक का आयुर्वेद में क्या योगदान है?
गवर्नर ने आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा में कर्नाटक के अहम योगदान की तारीफ की। राज्य के मेडिकल एजुकेशन संस्थानों और यूनिवर्सिटीज का एक मजबूत नेटवर्क है जो युवा डॉक्टरों के लिए एक उज्ज्वल भविष्य तैयार कर रहा है।
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