गाजियाबाद के किसानों ने मुआवजे की जगह जमीन वापसी की मांग की
गाजियाबाद के ग्राम मोहिउद्दीनपुर कनावनी के किसानों ने अपने 24वें दिन जारी धरने के दौरान ऐलान किया है कि अब वे मुआवजा नहीं, बल्कि अपनी जमीन वापस चाहते हैं।
गाजियाबाद के ग्राम मोहिउद्दीनपुर कनावनी के किसानों ने अपने 24वें दिन जारी धरने के दौरान ऐलान किया है कि अब वे मुआवजा नहीं, बल्कि अपनी जमीन वापस चाहते हैं। धरना स्थल पर आयोजित पंचायत में किसानों ने एक राय होकर निर्णायक फैसला लिया कि अब किसी भी कीमत पर प्राधिकरण को अपनी जमीन नहीं देंगे।
किसानों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में प्राधिकरण को छह माह के अंदर गांव की भूमि के संबंध में वैध अवार्ड घोषित करने का समय दिया गया था। छह माह की निर्धारित समय-सीमा बीत जाने के बावजूद प्राधिकरण गांव के लिए अवार्ड घोषित नहीं कर सका।
किसानों ने पंचायत में स्पष्ट कहा कि प्राधिकरण ने जिन जमीनों के राजस्व अभिलेखों में किसानों के नाम काटकर अपने नाम दर्ज कर लिए हैं, उन जमीनों पर किसानों के नाम दोबारा बहाल किए जाएं और जमीन किसानों को वापस की जाए।
किसान कैलाश नागर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई छह माह की समय-सीमा भी पूरी हो चुकी है और प्राधिकरण निर्धारित अवधि में गांव की भूमि के लिए अवार्ड नहीं बना सका। ऐसे में किसानों ने एक राय होकर फैसला लिया है कि अब किसी भी कीमत पर अपनी जमीन प्राधिकरण को नहीं देंगे। किसानों के नाम राजस्व अभिलेखों से काटकर प्राधिकरण के नाम दर्ज की गई जमीन किसानों को वापस करनी होगी।
धरना स्थल पर हुई पंचायत में किसानों ने एकजुट होकर कहा कि अब मुआवजा नहीं, जमीन वापस चाहिए और अब किसी भी कीमत पर जमीन नहीं देंगे। किसानों ने कहा कि वे सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन कराने और अपनी भूमि पर अपना अधिकार बहाल कराने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे।
इस दौरान धरना स्थल पर सुखबीर सिंह नागर, जयपाल नागर, कबूल सिंह नागर, चतर सिंह नागर, लखीराम शर्मा, पृथ्वी कसाना, भगवत सिंह नागर, सतीश नागर, परवीन नागर, अशोक कसाना सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गाजियाबाद के किसान अब क्या मांग रहे हैं?
गाजियाबाद के ग्राम मोहिउद्दीनपुर कनावनी के किसान अब मुआवजे की जगह अपनी जमीन वापस लेना चाहते हैं। वे कह रहे हैं कि किसी भी कीमत पर अपनी जमीन प्राधिकरण को नहीं देंगे।
किसानों का धरना कितने दिन से चल रहा है?
किसानों का धरना 24वें दिन से चल रहा है। धरना स्थल पर एक पंचायत आयोजित की गई जहां किसानों ने एक राय होकर फैसला लिया।
सुप्रीम कोर्ट ने प्राधिकरण को क्या समय सीमा दी थी?
सुप्रीम कोर्ट ने प्राधिकरण को छह माह के अंदर गांव की भूमि के संबंध में वैध अवार्ड घोषित करने का आदेश दिया था। लेकिन निर्धारित समय-सीमा बीत जाने के बाद भी प्राधिकरण अवार्ड घोषित नहीं कर सका।
किसानों की मुख्य शिकायत क्या है?
किसानों की शिकायत है कि प्राधिकरण ने उनकी जमीनों के राजस्व अभिलेखों में उनके नाम काटकर अपने नाम दर्ज कर लिए हैं। किसान चाहते हैं कि उन जमीनों पर उनके नाम दोबारा बहाल किए जाएं।
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