गाजियाबाद में जिलाधिकारी ने जनसुनवाई में सुनी नागरिकों की शिकायतें
गाजियाबाद में जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़ ने कलेक्ट्रेट स्थित अपने कार्यालय कक्ष में जनसुनवाई की और आम लोगों की समस्याओं और शिकायतों को गंभीरता से सुना।
गाजियाबाद में जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़ ने कलेक्ट्रेट स्थित अपने कार्यालय कक्ष में जनसुनवाई की और आम लोगों की समस्याओं और शिकायतों को गंभीरता से सुना।
जनसुनवाई में जिले के अलग-अलग इलाकों से आए नागरिकों ने भूमि कब्जा, राजस्व विवाद, अवैध अतिक्रमण, सार्वजनिक सुविधाओं, पेंशन, राशन कार्ड, पानी की सप्लाई समेत दूसरी जनसमस्याओं से जुड़े प्रार्थना पत्र जिलाधिकारी के सामने पेश किए।
जिलाधिकारी ने हर शिकायत को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को तय समय में शिकायतों का बढ़िया, असरदार और तेज निस्तारण पक्का करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के मुताबिक हर शिकायतकर्ता की शिकायत का बढ़िया निस्तारण पक्का किया जाए। उन्होंने कहा कि जनसुनवाई में मिली शिकायतों का सिर्फ औपचारिक निस्तारण न किया जाए, बल्कि शिकायतकर्ता की समस्या का असली और संतोषजनक समाधान किया जाए और निस्तारण के बाद शिकायतकर्ता से फीडबैक भी लिया जाए।
इसी क्रम में रामपुर निवासी दिनेश कुमार जैन और उनकी पत्नी विनीता जैन ने 01 सितम्बर 2026 को जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़ को जनसुनवाई के दौरान एक शिकायती प्रार्थना पत्र सौंपते हुए बताया कि उनकी बेटी ने अटोर, गाजियाबाद में एक प्लाट लिया है, जिस पर कुछ साल पहले कुछ लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया है।
उन्होंने बताया कि कब्जा मुक्त कराने के लिए वे लगातार कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कोई सफलता नहीं मिल रही, जिससे वे बहुत परेशान हैं।
जिलाधिकारी ने इस पर तुरंत कार्रवाई करते हुए एसडीएम, एसएचओ और तहसीलदार की टीम बनाते हुए नियम के मुताबिक तेज कार्रवाई के निर्देश दिए।
दिनेश कुमार जैन और उनकी पत्नी विनीता जैन ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि जिलाधिकारी के आदेश के बाद संबंधित अधिकारियों ने रात 08 बजे तक उनकी शिकायत का बढ़िया निस्तारण करवा दिया।
उन्होंने कहा कि प्लाट तो नहीं मिला लेकिन प्लाट के बदले उसकी मौजूदा कीमत का चेक उन्हें मिल गया।
दोनों ने कहा कि सिर्फ 08 घंटे में ही बिना कोई पैसे खर्च किए हुए, उनकी समस्या का समाधान हो गया, मानों कोई चमत्कार ही हो गया हो। उन्होंने कहा कि ऐसा उनके जीवन में कभी नहीं हुआ और ना ही उन्होंने कभी ऐसा कुछ सुना कि ऐसे मामलों में इतनी जल्दी समाधान भी हो जाता है।
दोनों ने कहा कि वे जिलाधिकारी महोदय द्वारा दिलाए गए न्याय से बहुत खुश हैं। उनके जैसा अधिकारी हर जनपद, हर विभाग में हो, वे ऐसी कामना करते हैं।
दोनों ने कहा कि वैसे वे जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़ की कार्यशैली से पहले से ही प्रभावित थे और उनके बारे में बहुत कुछ अच्छा सुना भी, लेकिन जितना सुना उतना कम था। उन्होंने कहा कि वे उससे भी ज्यादा प्रभावशाली, संवेदनशील, न्यायप्रिय, कर्तव्यनिष्ठ, मानवीय संवेदनाओं को समझने वाले और लोगों के दुखों को हरने वाले हैं। दोनों ने कहा कि वे हमेशा उनके ऋणी रहेंगे।
जनसुनवाई के दौरान मुख्य रूप से एडीएम एल/ए, एडीएम सिटी, एडीएम ई, सिटी मजिस्ट्रेट समेत दूसरे अधिकारीगण मौजूद रहे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गाजियाबाद में जिलाधिकारी की जनसुनवाई में कौन-कौन सी शिकायतें सुनी गईं?
जनसुनवाई में नागरिकों ने भूमि कब्जा, राजस्व विवाद, अवैध अतिक्रमण, सार्वजनिक सुविधाएं, पेंशन, राशन कार्ड और पानी की सप्लाई जैसी समस्याओं की शिकायतें पेश कीं।
दिनेश कुमार जैन को अपनी शिकायत का समाधान कितने समय में मिल गया?
दिनेश कुमार जैन को जिलाधिकारी के आदेश के बाद रात 8 बजे तक अपनी शिकायत का समाधान मिल गया, यानी महज 8 घंटे में।
अटोर, गाजियाबाद में दिनेश कुमार जैन की शिकायत क्या थी?
उन्होंने बताया कि उनकी बेटी ने अटोर में एक प्लाट लिया है, जिस पर कुछ साल पहले कुछ लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया था और कब्जा मुक्त कराने की कोशिश विफल रही थी।
दिनेश कुमार जैन को अपनी शिकायत के समाधान में क्या मिला?
उन्हें प्लाट तो नहीं मिला, लेकिन प्लाट के बदले उसकी मौजूदा कीमत का चेक मिल गया और यह सब बिना कोई पैसे खर्च किए हुए हुआ।
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