कानपुर देहात में सरकारी टेंडर के लिए चार कंपनियों ने जमा की फर्जी बैंक गारंटी
कानपुर देहात में बेसिक शिक्षा विभाग में मैनपावर आउटसोर्सिंग भर्ती के दौरान फर्जी बैंक गारंटी जमा करने का एक बड़ा मामला सामने आया है।
कानपुर देहात में बेसिक शिक्षा विभाग में मैनपावर आउटसोर्सिंग भर्ती के दौरान फर्जी बैंक गारंटी जमा करने का एक बड़ा मामला सामने आया है। जिलाधिकारी कपिल सिंह की सख्ती के बाद चार कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और उन्हें गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस यानी GeM पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। इन फर्मों ने फर्जी बैंक EMD और FDR जमा करके सरकारी टेंडर में हिस्सा लेने की कोशिश की थी।
मामला तब खुला जब बेसिक शिक्षा विभाग ने मैनपावर सेवाओं की मंजूरी के लिए फाइलें जिलाधिकारी के पास भेजीं। फाइलों की जांच के दौरान डीएम कपिल सिंह को बैंक EMD और FDR के कागजात में कुछ गड़बड़ी नजर आई। इसके बाद उन्होंने तुरंत जिला अग्रणी प्रबंधक और उपायुक्त राज्य कर को इन दस्तावेजों की असली जांच कराने के आदेश दिए। जब बैंकों से सत्यापन कराया गया तो पता चला कि चारों फर्मों की बैंक गारंटी पूरी तरह से फर्जी और जाली थीं।
जिन चार कंपनियों पर कार्रवाई की गई है उनमें वीवरसॉफ्ट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड लखनऊ, एसबीएनके एंटरप्राइजेज संजय गांधी पुरम लखनऊ, एएस इंफ्राटेक गोमती नगर विस्तार उत्तर प्रदेश और गंगोत्री मैनपावर एंड सिक्योरिटी एजेंसी करनाल शामिल हैं। इन सभी फर्मों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
जिलाधिकारी के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने फौरन सख्त कदम उठाए। इन चारों कंपनियों को GeM पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है ताकि वे आगे किसी भी सरकारी टेंडर में हिस्सा न ले सकें। जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सरकारी कामों और टेंडर में किसी भी तरह की धोखाधड़ी या फर्जी कागजात पेश करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कानपुर देहात में क्या घोटाला पकड़ा गया?
कानपुर देहात में बेसिक शिक्षा विभाग की मैनपावर आउटसोर्सिंग भर्ती में चार कंपनियों ने फर्जी बैंक गारंटी जमा की थीं। इन कंपनियों ने नकली EMD और FDR कागजात के साथ सरकारी टेंडर में बिड लगाने की कोशिश की थी।
कौन सी चार कंपनियों पर कार्रवाई की गई?
वीवरसॉफ्ट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड लखनऊ, एसबीएनके एंटरप्राइजेज लखनऊ, एएस इंफ्राटेक उत्तर प्रदेश और गंगोत्री मैनपावर एंड सिक्योरिटी एजेंसी करनाल पर कार्रवाई की गई है।
इन कंपनियों को क्या सजा दी गई?
इन चारों कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और उन्हें GeM पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। इसका मतलब है कि ये भविष्य में किसी भी सरकारी टेंडर में हिस्सा नहीं ले सकेंगी।
यह घोटाला कैसे खुला?
जब बेसिक शिक्षा विभाग ने मैनपावर सेवाओं की मंजूरी के लिए फाइलें जिलाधिकारी कपिल सिंह को भेजीं, तो उन्हें बैंक कागजातों में कुछ गड़बड़ी नजर आई। बाद में बैंकों से सत्यापन कराया गया तो सभी गारंटियां पूरी तरह फर्जी निकलीं।
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