सरकारी जमीन पर नीम कटाई के आरोप में ठेकेदार समेत तीन पर एफआईआर
हाथरस के सासनी क्षेत्र में सरकारी जमीन पर हरे-भरे नीम के पेड़ों की कटाई का मामला सामने आने के बाद वन विभाग में हलचल मच गई है। इस मामले में करीब 15 नीम के पेड़ों को काटे जाने की बात सामने आई है।
हाथरस के सासनी क्षेत्र में सरकारी जमीन पर हरे-भरे नीम के पेड़ों की कटाई का मामला सामने आने के बाद वन विभाग में हलचल मच गई है। इस मामले में करीब 15 नीम के पेड़ों को काटे जाने की बात सामने आई है। पेड़ों की कटाई को लेकर वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित मिलीभगत के भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
वन विभाग ने इस मामले में ठेकेदार समेत तीन लोगों के खिलाफ सासनी कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई है। विभाग की ओर से की गई इस कार्रवाई के बाद अब पेड़ों की कटाई में शामिल लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। हालांकि, पेड़ों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। इसी वजह से मामले की पूरी स्थिति जांच के बाद ही साफ हो सकेगी।
मामले में वन दरोगा तृप्ति अग्रवाल पर 35 हजार रुपये रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया है। संबंधित किसान की ओर से भी रुपये देने का दावा किए जाने की बात सामने आई है। इन आरोपों के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की जा रही है।
जिला वन अधिकारी राकेश चंद्र यादव ने इस मामले में 11 पेड़ काटे जाने की जानकारी दी है। वन विभाग के मुताबिक, सरकारी जमीन पर पेड़ों की कटाई के मामले में ठेकेदार समेत तीन लोगों के खिलाफ सासनी कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई गई है। एफआईआर के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।
पेड़ों की कटाई को लेकर सामने आए दावों में अंतर है। एक ओर करीब 15 नीम के पेड़ काटे जाने की बात सामने आई है, वहीं जिला वन अधिकारी राकेश चंद्र यादव ने 11 पेड़ काटे जाने की जानकारी दी है। वन विभाग की कार्रवाई और जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी जमीन पर कुल कितने पेड़ काटे गए और इस मामले में कौन-कौन लोग जिम्मेदार हैं।
वन दरोगा तृप्ति अग्रवाल ने अपने ऊपर लगाए गए रिश्वत लेने के आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई गई है और नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने रिश्वत लेने के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।
रेंजर अमित मोहन गौड़ ने भी रिश्वत के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि संबंधित किसान से निर्धारित सीमा से अधिक पेड़ काटे जाने के मामले में जुर्माना मांगा गया था। अमित मोहन गौड़ के अनुसार, इसी कार्रवाई को लेकर रिश्वत लेने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
सरकारी जमीन पर हरे-भरे नीम के पेड़ों की कटाई और रिश्वतखोरी के आरोपों के बाद मामला तूल पकड़ चुका है। अब वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठ रही है। इस जांच के जरिए पेड़ों की कटाई, जिम्मेदार लोगों और रिश्वत के आरोपों से जुड़े तथ्यों को सामने लाने की मांग की जा रही है।
फिलहाल, वन दरोगा तृप्ति अग्रवाल पर रिश्वत लेने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वन विभाग की ओर से एफआईआर दर्ज कराई गई है, जबकि वन दरोगा तृप्ति अग्रवाल और रेंजर अमित मोहन गौड़ ने आरोपों को खारिज किया है। मामले में जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और पेड़ों की कटाई से जुड़ी पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मामला कहां का है?
मामला हाथरस के सासनी क्षेत्र में सरकारी जमीन पर नीम के पेड़ काटे जाने का है।
इस मामले में कितने लोगों पर एफआईआर दर्ज हुई है?
वन विभाग ने ठेकेदार समेत तीन लोगों के खिलाफ सासनी कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई है।
कितने नीम के पेड़ काटे जाने की बात सामने आई है?
करीब 15 पेड़ काटे जाने की बात सामने आई है, जबकि जिला वन अधिकारी राकेश चंद्र यादव ने 11 पेड़ काटे जाने की जानकारी दी है। जांच के बाद सही संख्या साफ होगी।
रिश्वत के आरोपों पर वन अधिकारियों ने क्या कहा?
वन दरोगा तृप्ति अग्रवाल और रेंजर अमित मोहन गौड़ ने रिश्वत लेने के आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
सबसे ज़्यादा पढ़ी गई
- 1
हाथरस में किन्नर गुरु मनीषा ने आरोपों को बताया बेबुनियाद, जांच की मांग
- 2
मार्विन अची का आरोप, शिवानी कुमारी ने मुंह पर कालिख लगाई
- 3
सीएम योगी ने श्रावस्ती के डॉक्टर एनएन पांडेय को भेजा प्रशंसा पत्र
- 4
शामली में पिकअप-ट्रैक्टर-ट्रॉली की भिड़ंत, एक युवक की मौत; चार घायल
- 5
श्रावस्ती में सुहागिनों ने रखा करवा चौथ व्रत, चांद का इंतजार
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहली टिप्पणी करें।