शहडोल संभाग में पहली बार वाल्मीकि जयंती का भव्य आयोजन
शहडोल संभाग में पहली बार महर्षि वाल्मीकि जयंती का इतना बड़ा और भव्य आयोजन किया गया।
शहडोल संभाग में पहली बार महर्षि वाल्मीकि जयंती का इतना बड़ा और भव्य आयोजन किया गया। 31 अक्टूबर 2026 को अनूपपुर जिले के रामनगर, डोला स्थित प्रसिद्ध तुर्रा धाम में महर्षि वाल्मीकि युवा सेवा समिति, अनूपपुर के तत्वावधान में धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित हुआ। आयोजन में सुंदरकांड पाठ के साथ विशाल भंडारा और महाप्रसाद वितरण किया गया।
शहडोल संभाग के इतिहास में अपनी तरह के इस पहले बड़े आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं, युवाओं और गणमान्य नागरिकों में खासा उत्साह देखा गया। पूरे क्षेत्र से लोग तुर्रा धाम पहुंचे। सुंदरकांड पाठ और भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत आदि कवि भगवान महर्षि वाल्मीकि जी के पूजन-अर्चन और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद भव्य सुंदरकांड पाठ कराया गया। पाठ के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ संगीतमय भजनों पर आहुति दी। धार्मिक कार्यक्रम के बाद विशाल भंडारे और महाप्रसाद वितरण का आयोजन हुआ।
भंडारे में पूरे क्षेत्र से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन के जरिए महर्षि वाल्मीकि जयंती को संभाग स्तर पर बड़े जन-उत्सव के रूप में मनाया गया। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि शहडोल संभाग में पहली बार वाल्मीकि जयंती का इतने व्यापक पैमाने पर आयोजन हुआ है।
इस मौके पर महर्षि वाल्मीकि युवा सेवा समिति के जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र नाहर, भारतीय जनता पार्टी पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिला अध्यक्ष प्रेम चंद्र यादव, तुर्रा धाम समिति के अध्यक्ष विनोद तिवारी और रामनगर थाना प्रभारी सुमित कौशिक मौजूद रहे। इनके अलावा क्षेत्र के कई वरिष्ठ समाजसेवी और गणमान्य नागरिक भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
विशिष्ट अतिथियों ने संभाग स्तर पर इस तरह के ऐतिहासिक आयोजन की शुरुआत के लिए आयोजकों की सराहना की। कार्यक्रम के दौरान महर्षि वाल्मीकि जी के जीवन दर्शन, रामायण कालीन आदर्शों और सामाजिक समरसता के संदेशों पर भी चर्चा की गई।
वक्ताओं ने सामाजिक समरसता, आपसी भाईचारे और एकजुटता के महत्व पर प्रकाश डाला। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज में शिक्षा, आपसी भाईचारा, समरसता और एकजुटता को बढ़ावा देना है।
इस आयोजन को सफल बनाने में वाल्मीकि समाज के युवाओं ने अहम भूमिका निभाई। युवाओं ने आयोजन की व्यवस्थाओं की कमान संभाली और कार्यक्रम को पूरा कराने में योगदान दिया। अनुज नाहर, अनिल खरारे, सागर, सूरज सनकत, बृजेश, सूरज, राहुल, विक्रम, राजेश कलसा और विष्णु खरारे सहित समाज के युवा कार्यकर्ताओं ने दिन-रात एक कर सराहनीय योगदान दिया।
कार्यक्रम का समापन महाप्रसाद वितरण के साथ हुआ। इसके साथ ही संभाग भर में सामाजिक एकता और सद्भाव बनाए रखने का संकल्प लिया गया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
महर्षि वाल्मीकि जयंती का आयोजन कब और कहां हुआ?
महर्षि वाल्मीकि जयंती का आयोजन 31 अक्टूबर 2026 को अनूपपुर जिले के रामनगर, डोला स्थित तुर्रा धाम में हुआ।
कार्यक्रम में कौन-कौन से आयोजन किए गए?
कार्यक्रम में पूजन-अर्चन, दीप प्रज्वलन, सुंदरकांड पाठ, विशाल भंडारा और महाप्रसाद वितरण किया गया।
कार्यक्रम में कितने लोग शामिल हुए?
पूरे क्षेत्र से हजारों श्रद्धालु तुर्रा धाम पहुंचे और उन्होंने सुंदरकांड पाठ, भंडारे और महाप्रसाद वितरण में हिस्सा लिया।
आयोजन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज में शिक्षा, आपसी भाईचारा, सामाजिक समरसता और एकजुटता को बढ़ावा देना था।
सबसे ज़्यादा पढ़ी गई
- 1
हाथरस में किन्नर गुरु मनीषा ने आरोपों को बताया बेबुनियाद, जांच की मांग
- 2
मार्विन अची का आरोप, शिवानी कुमारी ने मुंह पर कालिख लगाई
- 3
सीएम योगी ने श्रावस्ती के डॉक्टर एनएन पांडेय को भेजा प्रशंसा पत्र
- 4
शामली में पिकअप-ट्रैक्टर-ट्रॉली की भिड़ंत, एक युवक की मौत; चार घायल
- 5
श्रावस्ती में सुहागिनों ने रखा करवा चौथ व्रत, चांद का इंतजार
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहली टिप्पणी करें।