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ओशो अनुयायियों ने जबलपुर का नाम ‘ओशोपुरम’ करने की मांग उठाई

जबलपुर को ‘ओशोपुरम’ नाम देकर उसकी पहचान विकसित करने की मांग जोर पकड़ रही है। देश-विदेश में मौजूद ओशो के अनुयायियों, आध्यात्मिक जगत से जुड़े लोगों और शहर के कुछ प्रबुद्ध नागरिकों ने यह मांग उठाई है।

ओशो अनुयायियों ने जबलपुर का नाम ‘ओशोपुरम’ करने की मांग उठाई
Image credit: News Darpan Team

जबलपुर को ‘ओशोपुरम’ नाम देकर उसकी पहचान विकसित करने की मांग जोर पकड़ रही है। देश-विदेश में मौजूद ओशो के अनुयायियों, आध्यात्मिक जगत से जुड़े लोगों और शहर के कुछ प्रबुद्ध नागरिकों ने यह मांग उठाई है। उनका कहना है कि आचार्य रजनीश, जिन्हें ओशो के नाम से जाना जाता है, का जीवन, उनका दर्शन और जबलपुर से उनका गहरा जुड़ाव शहर को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला सकता है।

इस पहल का उद्देश्य जबलपुर को अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक पर्यटन के मानचित्र पर स्थापित करना है। समर्थकों का मानना है कि शहर को ‘ओशोपुरम’ नाम मिलने से उसकी आध्यात्मिक पहचान और मजबूत हो सकती है। उनका कहना है कि जबलपुर में ओशो से जुड़ी स्मृतियों और स्थानों को विकसित करके इसे दुनिया के प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन केंद्रों में शामिल किया जा सकता है।

ओशो ने अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय जबलपुर में बिताया था। शहर के कई स्थान आज भी उनकी स्मृतियों से जुड़े हुए हैं। देवताल, भंवरताल और महाकौशल कॉलेज को ओशो के जीवन से संबंधित महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। ओशो के अनुयायियों का कहना है कि इन ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थलों को व्यवस्थित तरीके से विकसित किया जाना चाहिए, ताकि देश और दुनिया से आने वाले लोग इनसे जुड़ सकें।

इस अभियान में ओशो होम आश्रम के स्वामी श्रीला प्रेम पारस प्रमुख रूप से अपनी आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने कहा, “ओशो जैसा वैश्विक ब्रांड अगले 100 वर्षों में मिलना मुश्किल” है। स्वामी श्रीला प्रेम पारस का कहना है कि ओशो की वजह से जबलपुर को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पहचान मिल सकती है।

उनके अनुसार, ओशो के अनुयायी केवल भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया के अनेक देशों में फैले हुए हैं। ओशो की पुस्तकों, उनके विचारों और ध्यान पद्धतियों से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भारत आते हैं। स्वामी श्रीला प्रेम पारस का मानना है कि ओशो से जुड़े स्थलों को पहचान मिलने पर इन पर्यटकों का रुख जबलपुर की ओर भी बढ़ सकता है।

स्वामी श्रीला प्रेम पारस ने ओशो के साहित्य और विचारों के विश्वव्यापी प्रभाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि ओशो ने हिंदी और अंग्रेजी में लगभग 650 पुस्तकें लिखीं और 1000 पेंटिंग बनाईं। उनके अनुसार, ओशो की स्मृतियों से जुड़े स्थानों को देखने के लिए देश-विदेश से लोग जबलपुर पहुंचते हैं।

ओशो के निकट रहे स्वामी अगह भारती भी जबलपुर का नाम बदलकर ‘ओशोपुरम’ करने के विचार के समर्थक हैं। उल्लेख के मुताबिक, ओशो द्वारा संन्यास देना प्रारंभ करने से चार वर्ष पहले से ही स्वामी अगह भारती उनके शिष्य रहे हैं। इस मांग को बॉलीवुड के प्रसिद्ध निर्देशक सुभाष घई और कुछ फिल्म कलाकारों का भी समर्थन मिलने का उल्लेख किया गया है।

समर्थकों का कहना है कि जबलपुर को काशी, वृंदावन और अयोध्या की तर्ज पर विकसित किया जा सकता है। उनके मुताबिक, ‘ओशोपुरम’ नाम मिलने से शहर की एक अलग और विशिष्ट आध्यात्मिक पहचान बन सकती है। इससे देश-विदेश के ओशो अनुयायियों का आकर्षण जबलपुर की ओर बढ़ेगा और आध्यात्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा।

इस मांग को उठाने वालों का यह भी मानना है कि पर्यटन बढ़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। हालांकि, यह पहल केवल शहर का नाम बदलने की मांग तक सीमित नहीं है। इसके पीछे जबलपुर की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की एक व्यापक परिकल्पना रखी जा रही है।

अब इस विचार को शहर के नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और शासन के स्तर पर कितना समर्थन मिलता है, यह देखना होगा। समर्थक चाहते हैं कि संस्कारधानी जबलपुर को भविष्य में ‘ओशोपुरम’ के नाम से एक अलग पहचान मिले और वह विश्व के आध्यात्मिक मानचित्र पर अपनी जगह बना सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जबलपुर का नाम बदलकर क्या रखने की मांग की जा रही है?

जबलपुर का नाम बदलकर ‘ओशोपुरम’ रखने की मांग की जा रही है।

जबलपुर को ‘ओशोपुरम’ नाम देने का उद्देश्य क्या है?

इसका उद्देश्य जबलपुर को अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक पर्यटन के नक्शे पर स्थापित करना है।

जबलपुर में ओशो से जुड़े कौन-कौन से स्थान हैं?

देवताल, भंवरताल और महाकौशल कॉलेज ओशो के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण स्थान माने जाते हैं।

‘ओशोपुरम’ नाम मिलने से जबलपुर को क्या फायदा हो सकता है?

समर्थकों के मुताबिक, इससे ओशो अनुयायियों और विदेशी पर्यटकों का आकर्षण बढ़ेगा, साथ ही रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर बन सकते हैं।

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