दिल्ली हाईकोर्ट ने AIIMS के दो डेली वेजर्स को 3 लाख रुपये मुआवजा दिया
30 साल बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने AIIMS के दो डेली वेजर्स को 3-3 लाख रुपये मुआवजा दिया दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 1995 में हटाए गए AIIMS के दो डेली वेजर्स को 3-3 लाख रुपये मुआवजा मिलेगा।
दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 1995 में हटाए गए AIIMS के दो डेली वेजर्स को 3-3 लाख रुपये मुआवजा मिलेगा। कोर्ट ने उनके हटाए जाने को गैरकानूनी करार दिया, लेकिन 30 साल से ज्यादा वक्त बीत जाने की वजह से नौकरी पर वापस लेने से इनकार कर दिया। जस्टिस शैल जैन ने 29 जुलाई को ये फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि गैरकानूनी तरीके से नौकरी से हटाने का मतलब ये नहीं कि कर्मचारी को वापस नौकरी या पूरी सैलरी दी जाए।
नौकरी की बजाय मुआवजा
कोर्ट ने कहा कि AIIMS बार-बार नोटिस भेजने के बावजूद नौकरी से जुड़े रिकॉर्ड पेश नहीं कर पाया। इस वजह से संस्थान के खिलाफ फैसला लिया गया। जस्टिस जैन ने कहा कि रिकॉर्ड न देने की वजह से कर्मचारियों को मुआवजा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "तमाम हालात को देखते हुए, ये कोर्ट उचित समझता है कि दोनों याचिकाकर्ताओं को 3-3 लाख रुपये का एकमुश्त मुआवजा दिया जाए। ये उनके गैरकानूनी हटाए जाने से जुड़े सभी दावों का निपटारा करेगा।"
मामले का लंबा कानूनी सफर
अमरजीत सिंह और वेद प्रकाश ने 1993 और 1992 में AIIMS जॉइन किया था। लेकिन 1995 में उन्हें बिना नोटिस और बिना मुआवजे के नौकरी से हटा दिया गया। जब सुलह की कोशिशें नाकाम रहीं, तो मामला लेबर कोर्ट पहुंचा। 2004 में लेबर कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी, क्योंकि वे 240 दिनों की लगातार सेवा का सबूत नहीं दे पाए थे। इसके बाद दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया।
जस्टिस जैन ने लेबर कोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए कहा कि नौकरी से हटाया जाना गैरकानूनी था। लेकिन 30 साल से ज्यादा वक्त बीत जाने के कारण उन्होंने नौकरी पर वापस लेने से इनकार कर दिया और AIIMS को 8 हफ्तों के अंदर मुआवजा देने का आदेश दिया।
दोनों पक्षों की दलीलें
याचिकाकर्ताओं के वकील अशोक गुरनानी और मुकुल गुप्ता ने कहा कि लेबर कोर्ट ने गलत फैसला दिया और AIIMS ने अहम रिकॉर्ड पेश नहीं किए। उन्होंने यह भी बताया कि जूनियर डेली वेजर्स को बाद में रेगुलर कर दिया गया था, जिससे अमरजीत और वेद प्रकाश को भी यही राहत मिलनी चाहिए।
AIIMS के वकील वी एस आर कृष्णा और वी शशांक कुमार ने दलील दी कि दोनों कर्मचारी कैजुअल, डेली वेज बेसिस पर काम कर रहे थे और किसी परमानेंट पोस्ट पर नहीं थे। उन्होंने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता अपनी बर्खास्तगी के बाद बेरोजगार होने का सबूत नहीं दे सके, इसलिए उन्हें नौकरी पर वापस लेने या बकाया सैलरी देने का हक नहीं है।
फैसले का महत्व
ये फैसला रोजगार के मामलों में प्रक्रियात्मक पारदर्शिता की अहमियत को दिखाता है और बताता है कि नौकरी से जुड़े रिकॉर्ड छिपाने के क्या कानूनी नतीजे हो सकते हैं। कोर्ट ने हटाए जाने को गैरकानूनी माना, लेकिन समय और कर्मचारियों की स्थिति को देखते हुए मुआवजे को ही सही राहत माना। ये मामला दिखाता है कि लंबे समय से लंबित विवादों में मुआवजा, नौकरी पर वापस लेने से बेहतर समाधान हो सकता है।
स्रोत: Indian Express
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दिल्ली हाईकोर्ट ने AIIMS के डेली वेजर्स को कितना मुआवजा दिया?
कोर्ट ने दोनों डेली वेजर्स को 3-3 लाख रुपये का एकमुश्त मुआवजा देने का आदेश दिया। ये फैसला 29 जुलाई को जस्टिस शैल जैन ने सुनाया।
ये मामला कितने समय से लंबित था?
1995 में दोनों कर्मचारियों को नौकरी से हटाया गया था। 2024 में हाईकोर्ट का फैसला आया, तो कुल 30 साल से ज्यादा का समय बीत चुका था।
कोर्ट ने उन्हें नौकरी पर वापस लेने से क्यों इनकार किया?
जस्टिस जैन ने कहा कि 30 साल से ज्यादा वक्त बीत जाने के कारण उन्हें नौकरी पर वापस लेना संभव नहीं था। इसलिए मुआवजा ही सही राहत माना गया।
हटाए जाने को गैरकानूनी क्यों माना गया?
AIIMS बार-बार नोटिस भेजने के बावजूद नौकरी से जुड़े रिकॉर्ड पेश नहीं कर पाया। इसी वजह से कोर्ट ने उनके हटाए जाने को गैरकानूनी करार दिया और रिकॉर्ड न देने के लिए AIIMS को दंडित किया।
लेबर कोर्ट ने पहले क्यों उनकी याचिका खारिज कर दी थी?
2004 में लेबर कोर्ट ने कहा था कि याचिकाकर्ता 240 दिनों की लगातार सेवा का सबूत नहीं दे पाए थे। लेकिन हाईकोर्ट ने इस फैसले को खारिज कर दिया।
सबसे ज़्यादा पढ़ी गई
- 1
श्रावस्ती में सपा बैठक में हंगामा, नेता का माइक छीनने का आरोप
- 2
शामली में 50 से ज्यादा दुकानों के नाम कथित फर्जी बिल, लाखों भुगतान
- 3
शामली महिला का रिश्तेदारों पर 15 लाख के जेवर ले जाने का आरोप
- 4
हाथरस में आयुष्मान संविदा कर्मियों ने सौंपा ज्ञापन, 22 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार की …
- 5
गन्ने की फसल नुकसान और मारपीट के आरोप, डीएम से जांच की मांग
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहली टिप्पणी करें।