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श्रावस्ती में 6 करोड़ के टेंडर में बड़ा घोटाला, जिलाधिकारी ने रद्द किया

उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में 6 करोड़ रुपये के टेंडर में बड़ा घोटाला सामने आया है।

श्रावस्ती में 6 करोड़ के टेंडर में बड़ा घोटाला, जिलाधिकारी ने रद्द किया
Image credit: News Darpan Team

उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में 6 करोड़ रुपये के टेंडर में बड़ा घोटाला सामने आया है। डूडा विभाग द्वारा 'मुख्यमंत्री मलिन बस्ती विकास योजना' के तहत स्वीकृत बजट में नगर पालिका की अधिशासी अधिकारी (ईओ) ने नियमों की अनदेखी करते हुए अपने चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की। शिकायत के बाद जांच में मामला उजागर हुआ, जिसके बाद जिलाधिकारी अन्नपूर्णा गर्ग ने पूरे टेंडर को रद्द कर दिया।

डूडा विभाग ने भिनगा नगर पालिका को 6 करोड़ का बजट दिया था, लेकिन ईओ ने निष्पक्षता को दरकिनार करते हुए करीब 17.87% कम रेट डालने वाली 'आर.पी. सिंह कंस्ट्रक्शन' को बाहर कर दिया। इसके बजाय, शून्य प्रतिशत और मामूली बिलो रेट डालने वाले संतोष पाल, जीएस कोटिंग्स और राज कंस्ट्रक्शन को टेंडर पास कर दिया। जांच में पता चला कि इनमें से दो फर्मों ने 6 महीने के अनिवार्य ESIC चालान की जगह 5 महीने का चालान लगाया था, और एक फर्म का चालान अपठनीय था। संतोष पाल की फर्म का चालान तो पूरी तरह फर्जी पाया गया।

भ्रष्टाचार की शिकायत भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष हरिओम तिवारी ने मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचाई। जिलाधिकारी के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) ने जांच की, जिसमें ईओ द्वारा नियमों का उल्लंघन और गंभीर खामियां पाई गईं। अपर जिलाधिकारी ने पुष्टि की कि जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने 6 करोड़ के इस टेंडर को रद्द कर दिया है।

जिलाधिकारी की सख्त कार्रवाई ने भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने की कोशिशों को नाकाम कर दिया है। हालांकि, अब सवाल यह है कि क्या नगर पालिका ईओ और अन्य दोषियों पर विभागीय और कानूनी कार्रवाई होगी। इस मामले ने सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रावस्ती में 6 करोड़ के टेंडर में क्या घोटाला हुआ?

श्रावस्ती में 6 करोड़ रुपये के टेंडर में डूडा विभाग की अधिशासी अधिकारी ने नियमों की अनदेखी करते हुए अपने चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की।

जिलाधिकारी ने टेंडर क्यों रद्द किया?

जिलाधिकारी अन्नपूर्णा गर्ग ने जांच के बाद टेंडर को रद्द किया क्योंकि ईओ ने नियमों का उल्लंघन किया था।

भ्रष्टाचार की शिकायत किसने की थी?

भ्रष्टाचार की शिकायत भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष हरिओम तिवारी ने मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचाई थी।

जांच में क्या खामियां पाई गईं?

जांच में पाया गया कि कुछ फर्मों ने 6 महीने के अनिवार्य ESIC चालान की जगह 5 महीने का चालान लगाया और एक फर्म का चालान अपठनीय था।

क्या नगर पालिका के ईओ पर कार्रवाई होगी?

अब सवाल यह है कि क्या नगर पालिका के ईओ और अन्य दोषियों पर विभागीय और कानूनी कार्रवाई होगी।

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