आंध्र प्रदेश में 28 साल बाद पूला सुब्बैया वेलिगोंडा सिंचाई प्रोजेक्ट चालू होगा
मुख्यमंत्री नायडू 31 अगस्त को वेलिगोंडा प्रोजेक्ट में पानी छोड़ेंगे। 1.19 लाख एकड़ में सिंचाई और 4 लाख लोगों को पीने का पानी।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू 31 अगस्त को पूला सुब्बैया वेलिगोंडा सिंचाई प्रोजेक्ट में पानी छोड़ेंगे, जिसकी नींव उन्होंने ठीक 28 साल पहले मार्च 1996 में रखी थी। मार्कापुरम जिले के डोरनाला मंडल के गंतावणिपल्ली में होने वाले इस कार्यक्रम से राज्य की सबसे बड़ी पानी योजनाओं में से एक का दशकों से रुका काम पूरा हो जाएगा।
पहले फेज से 1.19 लाख एकड़ को होगा फायदा
फेज-I में कृष्णा नदी से 10.70 टीएमसी फीट पानी नल्लामला सागर में डाला जाएगा, जिससे करीब 1.19 लाख एकड़ में सिंचाई होगी और मार्कापुरम, प्रकाशम, नेल्लोर और कडपा जिलों के सूखाग्रस्त इलाकों में 4 लाख लोगों को पीने का पानी मिलेगा। यह इलाका लंबे समय से कम बारिश, भूजल की कमी और फ्लोराइड की समस्या से जूझ रहा है।
यह प्रोजेक्ट कृष्णा नदी पर बने श्रीशैलम बांध से गुरुत्वाकर्षण के जरिए पानी लाता है, उसे नल्लामला सागर में स्टोर करता है और फिर मुख्य नहरों के जरिए सिंचाई और घरेलू इस्तेमाल के लिए बांटता है। पूरी क्षमता पर वेलिगोंडा से 4.47 लाख एकड़ में सिंचाई होगी और 30 मंडलों में फ्लोराइड प्रभावित इलाकों समेत 23 लाख लोगों को पीने का पानी मिलेगा।
मुआवजे से खुला आखिरी काम का रास्ता
2024 में सत्ता में आने के बाद गठबंधन सरकार ने इसे पूरा करने पर जोर दिया और 48 दिनों में विस्थापित परिवारों को 768 करोड़ रुपये मुआवजा दिया। गजट या लाभार्थी लिस्ट से छूटे लोगों के लिए 169 करोड़ रुपये अलग से दिए गए हैं, साथ ही 2019 के बाद 18 साल के हुए लोगों को 2 लाख रुपये दिए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि पुनर्वास की इस कवायद से टनल निर्माण, फीडर नहरों, हेड रेगुलेटरों और दूसरे ढांचों का काम आगे बढ़ा, जो 1996 से रुका था।
खेती और पलायन पर होगा असर
अधिकारियों के मुताबिक, पक्की सिंचाई से किसानों की अनिश्चितता कम होगी, फसलों में विविधता आएगी और भूजल पर निर्भरता घटेगी, जिससे बागवानी, कृषि प्रसंस्करण और खाद्य प्रसंस्करण में मौके बनेंगे। इससे गांवों में रोजगार बढ़ेगा और इलाके से पलायन रुक सकता है।
राज्य सरकार ने सोमवार के कार्यक्रम को "वेलुगोंडा जला सिरुलु, अभिवृद्धिकी रेक्कालु" (वेलिगोंडा का पानी, विकास के पंख) नाम दिया है और बड़े पैमाने पर उद्घाटन की योजना बनाई है। नायडू पूजा करेंगे, उद्घाटन स्तंभ का अनावरण करेंगे, प्रोजेक्ट के गेट खोलेंगे और औपचारिक रूप से पानी छोड़ने के बाद जनसभा को संबोधित करेंगे।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पूला सुब्बैया वेलिगोंडा सिंचाई प्रोजेक्ट क्या है और इसे कब चालू किया जाएगा?
यह आंध्र प्रदेश की सबसे बड़ी पानी योजनाओं में से एक है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू 31 अगस्त को इसमें पानी छोड़ेंगे। इसकी नींव उन्होंने 28 साल पहले मार्च 1996 में रखी थी।
पहले फेज से कितने इलाके को फायदा होगा?
फेज-I से करीब 1.19 लाख एकड़ में सिंचाई होगी। इसके अलावा मार्कापुरम, प्रकाशम, नेल्लोर और कडपा जिलों के सूखाग्रस्त इलाकों में 4 लाख लोगों को पीने का पानी मिलेगा।
इस प्रोजेक्ट में पानी कहां से आता है और कैसे बांटा जाता है?
प्रोजेक्ट कृष्णा नदी पर बने श्रीशैलम बांध से गुरुत्वाकर्षण के जरिए पानी लाता है, उसे नल्लामला सागर में स्टोर करता है और फिर मुख्य नहरों के जरिए सिंचाई और घरेलू इस्तेमाल के लिए बांटता है।
इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में इतना समय क्यों लगा?
भूमि अधिग्रहण और विस्थापित परिवारों के पुनर्वास की वजह से प्रोजेक्ट रुका हुआ था। 2024 में सरकार ने 48 दिनों में 768 करोड़ रुपये मुआवजा देकर इस समस्या को हल किया और काम आगे बढ़ाया।
इस प्रोजेक्ट से किसानों और गांवों को क्या फायदा होगा?
पक्की सिंचाई से किसानों की अनिश्चितता कम होगी, भूजल पर निर्भरता घटेगी और बागवानी, कृषि प्रसंस्करण में मौके बनेंगे। इससे गांवों में रोजगार बढ़ेगा और पलायन रुक सकता है।
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