केंद्र ने सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 को 1.27 लाख करोड़ रुपये से मंजूरी दी
कैबिनेट ने सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 को 1.27 लाख करोड़ रुपये के बजट के साथ मंजूरी दी केंद्र सरकार ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 के दूसरे फेज को मंजूरी दे दी है।
केंद्र सरकार ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 के दूसरे फेज को मंजूरी दे दी है। इसके लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये का बड़ा बजट रखा गया है। ये 6 साल का प्रोजेक्ट है, जिसका मकसद सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग के लिए सप्लाई चेन को मजबूत करना है। इसमें गैस और केमिकल जैसे जरूरी मटीरियल बनाने वाली कंपनियों को सब्सिडी दी जाएगी। ये कदम भारत को ग्लोबल चिप इंडस्ट्री में मजबूत स्थिति में लाने के लिए उठाया गया है।
घरेलू चिप इंडस्ट्री को बढ़ावा देने का लक्ष्य
ISM 2.0 में रिसर्च, डेवलपमेंट और टैलेंट डेवलपमेंट के लिए सब्सिडी देने का प्रावधान है। ये मिशन भारत को ग्लोबल चिप सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बनाने और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में घरेलू योगदान बढ़ाने की दिशा में काम करेगा। 2029 तक भारत का लक्ष्य है कि 70-75% घरेलू जरूरतों के लिए चिप्स डिजाइन और मैन्युफैक्चर किए जाएं। 2035 तक भारत ग्लोबल सेमीकंडक्टर हब बनने की तैयारी कर रहा है।
ISM 1.0 से सीखे गए सबक
2021 में लॉन्च हुए ISM 1.0 ने भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की नींव रखी। इसमें फैब्रिकेशन, पैकेजिंग और डिजाइन पर फोकस किया गया। पहले फेज में 1.64 लाख करोड़ रुपये के निवेश आए और गुजरात, असम, आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में 12 चिप प्लांट्स को मंजूरी मिली। इनमें गुजरात के धोलेरा में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का पहला कमर्शियल-ग्रेड चिप फैब्रिकेशन प्लांट और माइक्रोन टेक्नोलॉजी जैसे असेंबली और टेस्टिंग प्लांट शामिल हैं।
ISM के तहत प्रमुख प्रोजेक्ट्स
- टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स (गुजरात): धोलेरा में 91,000 करोड़ रुपये की लागत से भारत का पहला कमर्शियल चिप फैब बन रहा है। ये प्लांट हर महीने 50,000 वेफर्स बनाने की क्षमता रखेगा।
- माइक्रोन टेक्नोलॉजी (गुजरात): फरवरी से ऑपरेशनल इस असेंबली और टेस्टिंग प्लांट ने ISM 1.0 में मील का पत्थर साबित किया।
- टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स (असम): 27,000 करोड़ रुपये की लागत से जगिरोड में बनने वाला ये प्लांट हर दिन 4.8 करोड़ चिप्स बनाएगा, जो ऑटोमोटिव और टेलीकॉम सेक्टर में इस्तेमाल होंगे।
- एचसीएल-फॉक्सकॉन (उत्तर प्रदेश): नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास 3,700 करोड़ रुपये का OSAT प्लांट 2028 तक शुरू होगा।
सब्सिडी स्ट्रक्चर में बदलाव
ISM 2.0 के तहत सरकार ने सब्सिडी स्ट्रक्चर में बदलाव करने का फैसला किया है। अब असेंबली और टेस्टिंग प्लांट्स के लिए इंसेंटिव कम किए जाएंगे और चिप मैन्युफैक्चरिंग को सपोर्ट करने वाले सेक्टर्स को प्राथमिकता दी जाएगी। ISM 1.0 के दौरान सब्सिडी बढ़ाकर 50% तक कर दी गई थी, जैसे माइक्रोन के गुजरात प्लांट में।
क्यों है ये जरूरी?
सेमीकंडक्टर्स आज की टेक्नोलॉजी का अहम हिस्सा हैं। ये कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर डिफेंस सिस्टम तक हर चीज को पावर देते हैं। ग्लोबल सप्लाई चेन में रुकावटों और जियोपॉलिटिकल टेंशन्स के बीच भारत का सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री को मजबूत करना आर्थिक और रणनीतिक रूप से बेहद जरूरी है। इस मिशन का मकसद आयात पर निर्भरता कम करना, हाई-वैल्यू जॉब्स क्रिएट करना और भारत को ग्लोबल चिप मार्केट में अहम खिलाड़ी बनाना है।
ISM 2.0 के साथ भारत ने सेमीकंडक्टर सेक्टर में अपनी महत्वाकांक्षाओं को और मजबूत कर दिया है। इसका साफ संदेश है कि भारत इस हाई-स्टेक इंडस्ट्री में ग्लोबल लीडर बनने का इरादा रखता है।
स्रोत: Indian Express
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