भाजयुमो नियुक्तियों पर 48 घंटे में विवाद, बालाघाट में भाभी थाने पहुंचीं
मध्यप्रदेश में भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) की नई नियुक्तियों के बाद पार्टी के भीतर घमासान शुरू हो गया है। 29 अक्टूबर को 19 जिलों के जिलाध्यक्षों और महामंत्रियों के नामों का ऐलान किया गया था।
मध्यप्रदेश में भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) की नई नियुक्तियों के बाद पार्टी के भीतर घमासान शुरू हो गया है। 29 अक्टूबर को 19 जिलों के जिलाध्यक्षों और महामंत्रियों के नामों का ऐलान किया गया था। लेकिन सूची जारी होने के साथ ही नियुक्तियों पर सवाल उठने लगे। ऐलान के 48 घंटे के भीतर ही विरोध सामने आने लगा।
विवाद अलग-अलग वजहों से सामने आया है। बालाघाट में देवर को युवा मोर्चा का जिलाध्यक्ष बनाए जाने के बाद उनकी भाभी के थाने पहुंचने का मामला चर्चा में है। नियुक्ति के बाद सामने आए इस घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।
बालाघाट का मामला अब सिर्फ संगठन में की गई नियुक्ति तक सीमित नहीं रहा। देवर को जिलाध्यक्ष बनाए जाने के बाद भाभी के थाने पहुंचने से पारिवारिक विवाद भी सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है। इस घटनाक्रम को लेकर भाजयुमो की नियुक्तियों पर चल रही बहस और तेज हो गई है।
वहीं, नर्मदापुरम में भी युवा मोर्चा की नियुक्ति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यहां पार्टी से निष्कासित रह चुके नेता को जिलाध्यक्ष की कमान सौंपे जाने पर संगठन के भीतर चर्चा तेज हो गई है। इस फैसले को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच नाराजगी सामने आई है।
नर्मदापुरम की नियुक्ति ने चयन प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। पार्टी से निष्कासित रह चुके नेता को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा है। इसी वजह से यह नियुक्ति भी विवादों में घिर गई है।
29 अक्टूबर को जारी सूची के बाद एक-दो दिन के भीतर ही कई नवनियुक्त पदाधिकारी विवादों में घिर गए। 19 जिलों में जिलाध्यक्षों और महामंत्रियों की नियुक्तियां युवा संगठन को नई मजबूती देने के उद्देश्य से की गई थीं। हालांकि, शुरुआती विवादों ने इन संगठनात्मक फैसलों पर बहस शुरू कर दी है।
नियुक्तियों के साथ उठे सवालों के बीच चयन प्रक्रिया की समीक्षा की मांग जैसी चर्चा सामने आ रही है। बालाघाट में पारिवारिक विवाद का मामला थाने तक पहुंचा, जबकि नर्मदापुरम में निष्कासित रह चुके नेता को जिम्मेदारी दिए जाने पर संगठन के भीतर नाराजगी की बात कही जा रही है।
इन घटनाक्रमों के बाद अब निगाहें पार्टी नेतृत्व के रुख पर हैं। देखना होगा कि नेतृत्व इन विवादों पर क्या फैसला लेता है और क्या किसी नियुक्ति में बदलाव किया जाएगा। फिलहाल, 19 जिलों में की गई भाजयुमो की नियुक्तियां पार्टी के लिए नई मुश्किलें खड़ी करती नजर आ रही हैं.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भाजयुमो की नई नियुक्तियों का ऐलान कब हुआ था?
29 अक्टूबर को 19 जिलों के जिलाध्यक्षों और महामंत्रियों के नामों का ऐलान हुआ था।
नियुक्तियों पर विवाद कब शुरू हुआ?
सूची जारी होने के 48 घंटे के भीतर ही नियुक्तियों का विरोध सामने आने लगा।
बालाघाट में विवाद की वजह क्या है?
बालाघाट में देवर को युवा मोर्चा का जिलाध्यक्ष बनाए जाने के बाद उनकी भाभी थाने पहुंचीं।
नर्मदापुरम में नियुक्ति पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
नर्मदापुरम में पार्टी से निष्कासित रह चुके नेता को जिलाध्यक्ष बनाए जाने पर कार्यकर्ताओं में नाराजगी है।
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