रियल एस्टेट के उभरते बाजारों में भोपाल-इंदौर, ग्वालियर बाहर
CII और नाइट फ्रैंक इंडिया की सितंबर 2026 की ‘India’s Next Real Estate Markets’ रिपोर्ट ने मध्यप्रदेश के रियल एस्टेट बाजार को लेकर एक साफ तस्वीर सामने रखी है।
CII और नाइट फ्रैंक इंडिया की सितंबर 2026 की ‘India’s Next Real Estate Markets’ रिपोर्ट ने मध्यप्रदेश के रियल एस्टेट बाजार को लेकर एक साफ तस्वीर सामने रखी है। रिपोर्ट में देश के 11 उभरते रियल एस्टेट मार्केट की सूची में मध्यप्रदेश से भोपाल और इंदौर को जगह मिली है, लेकिन ग्वालियर इस सूची में शामिल नहीं है। ग्वालियर के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि शहर लंबे समय से कनेक्टिविटी, औद्योगिक निवेश और क्षेत्रीय कारोबार की संभावनाओं के बीच अपनी मजबूत भूमिका तलाश रहा है।
ग्वालियर/भोपाल से सामने आई इस रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 से 2026 के बीच इन 11 उभरते बाजारों में आवासीय संपत्तियों की कीमतों में औसतन 63% की बढ़ोतरी हुई। इसी अवधि में देश के टॉप-8 महानगरों में यह बढ़ोतरी 42% रही। यानी हाल के वर्षों में छोटे और उभरते शहरों के रियल एस्टेट बाजार ने बड़े महानगरों की तुलना में ज्यादा तेज रफ्तार दिखाई है।
रिपोर्ट में शामिल 11 बाजार हैं: भोपाल, भुवनेश्वर, चंडीगढ़ ट्राइसिटी, गोवा, इंदौर, जयपुर, कोच्चि, लखनऊ, नागपुर, विशाखापत्तनम और कोयंबटूर। मध्यप्रदेश से सिर्फ भोपाल और इंदौर इस सूची में शामिल किए गए हैं। ग्वालियर का नाम इस सूची में नहीं है।
इस रिपोर्ट का मतलब सिर्फ इतना नहीं है कि किन शहरों में मकान या जमीन के दाम बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट जिन फैक्टर्स की तरफ इशारा करती है, उनमें रोजगार, कारोबार, कनेक्टिविटी, उपभोग, आबादी और शहरी क्षमता जैसे पहलू शामिल हैं। यानी किसी शहर में एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, सड़क या बड़े प्रोजेक्ट होना जरूरी है, लेकिन सिर्फ इतना काफी नहीं है। उनके साथ नौकरियां आएं, कंपनियां आएं, लोगों की आय बढ़े और शहर में खर्च करने की क्षमता बढ़े, तभी उसका असर लंबे समय तक प्रॉपर्टी बाजार पर दिखाई देता है।
ग्वालियर के लिए यही बात सबसे अहम हो जाती है। रिपोर्ट ने ग्वालियर को सूची से बाहर रखने के कारणों की कोई अलग शहर-वार व्याख्या प्रकाशित नहीं की है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि नाइट फ्रैंक ने ग्वालियर को सीधे तौर पर ‘पिछड़ा’ घोषित किया है। लेकिन रिपोर्ट जिन व्यापक मानकों को उभरते रियल एस्टेट बाजार की मजबूती से जोड़ती है, वे ग्वालियर के लिए बहस का विषय जरूर बनते हैं।
रिपोर्ट के आधार पर सवाल यह बनता है कि ग्वालियर आखिर किस जगह पीछे रह गया। क्या शहर में रोजगार की रफ्तार उतनी नहीं है? क्या नई कंपनियों की एंट्री उतनी मजबूत नहीं है? क्या औद्योगिक गतिविधि अभी उस स्तर तक नहीं पहुंची है, जो रियल एस्टेट बाजार को लंबी गति दे सके? रिपोर्ट इन सवालों का ग्वालियर के संदर्भ में अलग से जवाब नहीं देती, लेकिन इसके मानक इन मुद्दों को चर्चा के केंद्र में जरूर लाते हैं।
इंदौर की तस्वीर रिपोर्ट में अलग रूप में सामने आती है। इंदौर का नाम केवल आवासीय बाजार के कारण नहीं आता, बल्कि उभरते वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स गतिविधि वाले शहरों में भी आता है। रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में छह प्रमुख टियर-2 बाजारों, लखनऊ, जयपुर, नागपुर, इंदौर, कोयंबटूर और भुवनेश्वर, ने मिलकर 5.3 मिलियन वर्गफुट वेयरहाउसिंग लीजिंग का हिस्सा बनाया।
इससे साफ होता है कि रियल एस्टेट की कहानी अब सिर्फ कॉलोनी और फ्लैट तक सीमित नहीं है। किसी शहर का प्रॉपर्टी बाजार अब उद्योग, लॉजिस्टिक्स, ऑफिस, रिटेल, रोजगार और उपभोक्ता बाजार से भी जुड़ गया है। जहां आर्थिक गतिविधि बढ़ती है, वहां घरों की मांग भी बढ़ती है। जहां वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स जैसी गतिविधियां आती हैं, वहां कमर्शियल स्पेस और रोजगार से जुड़े अवसर भी रियल एस्टेट को गति दे सकते हैं।
रिपोर्ट में 5 साल की बढ़ोतरी का आंकड़ा भी अहम है। 2021-2026 के दौरान 11 उभरते बाजारों में आवासीय कीमतों में 63% की बढ़ोतरी हुई, जबकि इसी दौरान टॉप-8 शहरों में यह बढ़ोतरी 42% रही। इससे यह संकेत मिलता है कि रियल एस्टेट का अगला बड़ा विस्तार केवल मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु जैसे महानगरों तक सीमित नहीं है। छोटे शहरों में भी आर्थिक गतिविधि और शहरीकरण बढ़ने के साथ नए प्रॉपर्टी हब तैयार हो रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक 2016-2026 के दौरान 11 उभरते बाजारों में आवासीय कीमतों का औसत CAGR करीब 8% रहा। इसके मुकाबले देश के टॉप-8 शहरों में यह करीब 4% था। यानी लंबे समय के हिसाब से भी उभरते बाजारों की रफ्तार टॉप-8 शहरों से ज्यादा रही। 2021-2026 में यह अंतर और साफ दिखा, जब उभरते 11 बाजारों में 63% बढ़ोतरी हुई और टॉप-8 में 42% बढ़ोतरी दर्ज की गई।
भोपाल और इंदौर का इस सूची में शामिल होना मध्यप्रदेश के लिए अहम है। इससे यह संकेत मिलता है कि राज्य के ये दो शहर देश के उन शहरी बाजारों में गिने जा रहे हैं, जहां रियल एस्टेट को आगे बढ़ाने वाले कई फैक्टर मौजूद हैं। वहीं ग्वालियर का बाहर रहना यह सवाल खड़ा करता है कि शहर को अपनी आर्थिक और शहरी क्षमता को रियल एस्टेट ग्रोथ से जोड़ने के लिए क्या करना होगा।
ग्वालियर के लिए यह रिपोर्ट इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि शहर लंबे समय से दिल्ली-आगरा-ग्वालियर-झांसी क्षेत्र की कनेक्टिविटी, औद्योगिक निवेश और क्षेत्रीय व्यापार की संभावनाओं के बीच अपनी भूमिका तलाश रहा है। ऐसे में अब चर्चा सिर्फ जमीन और मकान के दाम तक सीमित नहीं रह सकती। असली सवाल यह है कि शहर में कितने नए रोजगार आए, कितनी नई कंपनियां आईं, कितनी औद्योगिक गतिविधि बढ़ी, लोगों की आय और खरीद क्षमता कितनी बढ़ी और रियल एस्टेट के साथ कितना मजबूत कमर्शियल इकोसिस्टम तैयार हुआ।
रियल एस्टेट में सिर्फ जमीन महंगी होना विकास का प्रमाण नहीं होता। जमीन को महंगा बनाने वाली अर्थव्यवस्था भी मजबूत होनी चाहिए। अगर किसी शहर में रोजगार, कारोबार, उपभोग और औद्योगिक गतिविधि साथ-साथ बढ़ते हैं, तभी प्रॉपर्टी बाजार की तेजी टिकाऊ मानी जाती है।
इस रिपोर्ट का आंकड़ा साफ है। रिपोर्ट का नाम ‘India’s Next Real Estate Markets 2026’ है। इसे CII और Knight Frank India ने जारी किया है। इसमें 11 उभरते बाजारों को शामिल किया गया है। 2021-26 में इन बाजारों में कीमत वृद्धि 63% रही। टॉप-8 शहरों की वृद्धि 42% रही। 2016-26 CAGR उभरते बाजारों में 8% रहा, जबकि टॉप-8 का CAGR 4% रहा। मध्यप्रदेश से भोपाल और इंदौर शामिल हैं। ग्वालियर 11 शहरों की सूची में शामिल नहीं है।
फिलहाल ग्वालियर के लिए इस रिपोर्ट का सबसे बड़ा संदेश यही है कि कनेक्टिविटी की चर्चा से आगे बढ़कर शहर को रोजगार, उद्योग, कारोबार और कंजम्प्शन की ऐसी अर्थव्यवस्था बनानी होगी, जो रियल एस्टेट को सिर्फ जमीन की कीमतों से नहीं, बल्कि वास्तविक आर्थिक गतिविधि से गति दे। भोपाल और इंदौर ने इस सूची में जगह बना ली है। अब ग्वालियर के सामने चुनौती यह है कि वह अपने रियल एस्टेट बाजार को मजबूत आर्थिक आधार से कैसे जोड़े।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
CII और Knight Frank India की रिपोर्ट में मध्यप्रदेश के कौन से शहर शामिल हैं?
रिपोर्ट में मध्यप्रदेश से भोपाल और इंदौर को देश के 11 उभरते रियल एस्टेट बाजारों में जगह मिली है। ग्वालियर इस सूची में शामिल नहीं है।
ग्वालियर को लेकर रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
रिपोर्ट ने ग्वालियर को सूची में शामिल नहीं किया है, लेकिन इसके लिए अलग से शहर-वार वजह नहीं बताई गई है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि Knight Frank ने ग्वालियर को सीधे ‘पिछड़ा’ बताया है।
2021 से 2026 के बीच उभरते बाजारों में घरों की कीमतें कितनी बढ़ीं?
रिपोर्ट के मुताबिक 11 उभरते बाजारों में आवासीय संपत्तियों की कीमतें औसतन 63% बढ़ीं, जबकि देश के टॉप-8 महानगरों में यह बढ़ोतरी 42% रही।
रियल एस्टेट बाजार को मजबूत बनाने में किन बातों को अहम माना गया है?
रिपोर्ट के अनुसार रोजगार, कारोबार, कनेक्टिविटी, उपभोग, आबादी और शहरी क्षमता जैसे फैक्टर अहम हैं। सिर्फ सड़क, एयरपोर्ट या बड़े प्रोजेक्ट काफी नहीं, उनके साथ नौकरियां और कंपनियां भी आनी चाहिए।
इंदौर की रिपोर्ट में खास बात क्या है?
इंदौर को सिर्फ आवासीय बाजार के लिए नहीं, बल्कि वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों वाले उभरते शहरों में भी गिना गया है।
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