बेंगलुरु में पहली बार 'फ्रीडम हब्बा' का आयोजन, सांस्कृतिक धरोहर की झलक
यक्षगान, ढोल ताशा, गरबा ने बेंगलुरु के पहले 'फ्रीडम हब्बा' में रंग भरे बेंगलुरु में पहली बार हुआ 'फ्रीडम हब्बा', आजादी का जश्न मनाने का खास मौका भारत के 79वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बेंगलुरु में
यक्षगान, ढोल ताशा, गरबा ने बेंगलुरु के पहले 'फ्रीडम हब्बा' में रंग भरे
बेंगलुरु में पहली बार हुआ 'फ्रीडम हब्बा', आजादी का जश्न मनाने का खास मौका
भारत के 79वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बेंगलुरु में शनिवार को पहली बार 'फ्रीडम हब्बा' का आयोजन हुआ। ये कार्यक्रम कर्नाटक सरकार ने विधान सौधा के सामने आयोजित किया। इस इवेंट में देशभर की अलग-अलग कम्युनिटीज ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को संगीत, नृत्य और लोक कला के जरिए पेश किया।
लोक कला और परंपराओं की झलक
इस फेस्टिवल में 30 से ज्यादा टीमों ने अलग-अलग राज्यों और जिलों की कला पेश की। कर्नाटक के यक्षगान, वीरगासे और हुलीवेषा ने महाराष्ट्र के ढोल ताशा, गुजरात के गरबा, पश्चिम बंगाल के धनुची नाच और सिख मार्शल आर्ट्स जैसे चक्कर बाजी और गतका के साथ मंच साझा किया। कलाकारों ने अपनी परंपराओं को आधे किलोमीटर लंबे रास्ते पर परेड के जरिए दिखाया और फिर विधान सौधा के एंट्रेंस पर पहुंचकर अपने प्रदर्शन का सांस्कृतिक महत्व समझाया।
परफॉर्मर्स में से एक थे अमित जे, जो गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज, बेंगलुरु की टीम 'कलामिलना' को लीड कर रहे थे। उन्होंने कहा, "हमें यक्षगान पेश करने का मौका मिला, ये हमारे लिए गर्व की बात है।" वहीं, मंड्या जिले से आई 'कुंतूर कुमार' टीम ने पूजा कुनिथा पेश किया, जो एक पारंपरिक नृत्य है जिसमें कलाकार सजाए गए ढांचे को सिर पर बैलेंस करते हुए एक्रोबेटिक मूवमेंट दिखाते हैं। ये कला मंड्या, मैसूरु, रामनगर और चन्नपटना के गांवों में देवी-देवताओं की पूजा से जुड़ी है।
आजादी की लड़ाई को करीब से दिखाने वाले प्रदर्शनी
परफॉर्मेंस के अलावा, फ्रीडम हब्बा में 'इंडिया की फ्रीडम ट्रेल' नाम का एक लिविंग म्यूजियम भी था, जिसमें स्वतंत्रता संग्राम के अहम पल जैसे नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन को दिखाया गया। कर्नाटक की स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका को दर्शाने वाले डिस्ट्रिक्ट थीम पवेलियन भी थे, जहां संगोली रायन्ना और रानी चेनम्मा को श्रद्धांजलि दी गई। विजिटर्स ने संविधान स्क्वायर और बच्चों के लिए एक्टिविटी जोन भी एक्सप्लोर किए।
बेंगलुरु की रहने वाली वैश्णवी आर ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा, "मैंने पहले कभी विधान सौधा को इतने करीब से नहीं देखा था। गाइडेड टूर में इसकी आर्किटेक्चरल अहमियत समझाई गई। फ्रीडम हब्बा का हिस्सा बनकर ये स्वतंत्रता दिवस मेरे लिए खास बन गया।"
आने-जाने में परेशानी
इस इवेंट में भीड़ तो खूब जुटी, लेकिन क्यूबन पार्क जाने वालों को दिक्कत हुई क्योंकि पार्क शाम 6 बजे बंद कर दिया गया। पुलिस ने विजिटर्स को दूसरे एग्जिट्स की तरफ भेजा, जिससे वहां भीड़ बढ़ गई। पास के मेट्रो स्टेशन पर सर्विस कुछ देर के लिए रोक दी गई, जिससे लोगों को एमजी रोड और केंपेगौड़ा मेट्रो स्टेशन से सफर करना पड़ा। मेट्रो सर्विस रात 9:30 बजे इवेंट खत्म होने के बाद फिर शुरू हुई।
इस इवेंट का महत्व
फ्रीडम हब्बा बेंगलुरु में स्वतंत्रता दिवस मनाने का एक अनोखा प्रयास है, जिसमें सांस्कृतिक गर्व और ऐतिहासिक शिक्षा को जोड़ा गया। भारत की विविध परंपराओं और आजादी की लड़ाई को सामने लाकर ये इवेंट देश की विरासत से जुड़ने का मौका देता है और कर्नाटक की भूमिका को भी उजागर करता है।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
फ्रीडम हब्बा कब और कहाँ आयोजित हुआ?
फ्रीडम हब्बा बेंगलुरु में 79वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर शनिवार को आयोजित हुआ।
इस इवेंट में कौन-कौन सी सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ हुईं?
इस इवेंट में यक्षगान, ढोल ताशा, गरबा, धनुची नाच और सिख मार्शल आर्ट्स जैसी प्रस्तुतियाँ हुईं।
फ्रीडम हब्बा का मुख्य उद्देश्य क्या है?
फ्रीडम हब्बा का उद्देश्य आजादी का जश्न मनाना और भारत की सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित करना है।
क्या इस इवेंट में कोई प्रदर्शनी भी थी?
हाँ, फ्रीडम हब्बा में 'इंडिया की फ्रीडम ट्रेल' नाम की एक लिविंग म्यूजियम प्रदर्शनी भी थी।
इस इवेंट में आने-जाने में क्या समस्याएँ हुईं?
इवेंट के दौरान क्यूबन पार्क जाने वालों को दिक्कत हुई क्योंकि पार्क शाम 6 बजे बंद हो गया और मेट्रो सर्विस भी कुछ समय के लिए रोक दी गई।
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