बड़वानी आरटीओ में ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया पर आवेदकों ने उठाए सवाल
बड़वानी RTO में ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया पर सवाल बड़वानी के जिला परिवहन कार्यालय (RTO) में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की व्यवस्था सवालों के घेरे में है।
बड़वानी के जिला परिवहन कार्यालय (RTO) में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की व्यवस्था सवालों के घेरे में है। लाइसेंस शाखा के प्रभारी संतोष कनेश की कार्यप्रणाली को लेकर आवेदकों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। आवेदकों का कहना है कि ड्राइविंग ट्रायल की प्रक्रिया साफ नहीं है और जानकारी मांगने पर जिम्मेदार लोग स्पष्ट जवाब देने से बचते हैं।
इस स्थिति ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि लाइसेंस बनाने की व्यवस्था आम लोगों के लिए कितनी आसान और पारदर्शी है। साथ ही यह भी पूछा जा रहा है कि क्या कार्यालय की प्रक्रिया दलालों के भरोसे चल रही है।
ट्रायल की तारीख और नियमों को लेकर उलझन
सूत्रों और आवेदकों की शिकायतों के मुताबिक, लाइसेंस के लिए होने वाले ड्राइविंग ट्रायल की तारीख, प्रक्रिया और नियमों की जानकारी मांगने पर आवेदकों को साफ जवाब नहीं मिलता। कभी उन्हें इंतजार करने के लिए कहा जाता है, तो कभी दूसरे माध्यमों से संपर्क करने की बात कही जाती है।
आवेदकों का आरोप है कि ट्रायल से जुड़ी जरूरी जानकारी एक जगह और स्पष्ट तरीके से उपलब्ध नहीं कराई जा रही। इससे उन्हें अपनी प्रक्रिया को लेकर असमंजस का सामना करना पड़ता है। कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि जब लाइसेंस के लिए ट्रायल जरूरी है, तो उसकी तारीख, नियम और प्रक्रिया सार्वजनिक और पारदर्शी क्यों नहीं है।
ट्रायल को लेकर जानकारी मांगने वाले लोगों को जिम्मेदारों की ओर से स्पष्ट उत्तर नहीं मिलने की शिकायत है। इससे यह सवाल और गंभीर हो गया है कि आवेदकों को प्रक्रिया समझने और उसका पालन करने में दिक्कत क्यों आ रही है।
बिना ट्रायल लाइसेंस बनने की चर्चाएं
कार्यालय के बाहर यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि कथित तौर पर बिना निर्धारित ट्रायल या ट्रायल में असफल होने के बावजूद कुछ लोगों के लाइसेंस बन रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। इसलिए इन चर्चाओं को फिलहाल आरोप और शिकायतों के तौर पर ही देखा जा रहा है।
दूसरी ओर, नियमानुसार प्रक्रिया पूरी करने वाले आवेदकों को बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने की शिकायत है। ऐसे आवेदकों का कहना है कि उन्हें अपनी आवेदन प्रक्रिया और लाइसेंस की स्थिति जानने के लिए लगातार कार्यालय जाना पड़ता है।
यदि बिना निर्धारित ट्रायल या ट्रायल में असफल होने के बाद भी लाइसेंस जारी किए जाने की बात सही पाई जाती है, तो यह व्यवस्था की गंभीर खामी होगी। इसी वजह से ट्रायल रिकॉर्ड और लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया की जांच को जरूरी बताया जा रहा है।
दलालों के जरिए काम कराने के आरोप
RTO परिसर के आसपास सक्रिय दलालों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप हैं कि इनके माध्यम से आने वाले आवेदकों के काम अपेक्षाकृत जल्दी हो जाते हैं। वहीं, सीधे आवेदन करने वाले लोगों को इंतजार और परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
इस स्थिति को लेकर आम आवेदकों के बीच नाराजगी है। सवाल यह है कि सरकारी कार्यालय में लोगों को सीधे और आसान तरीके से सुविधा क्यों नहीं मिल रही। अगर किसी आवेदक को अपना काम कराने के लिए बिचौलियों का सहारा लेना पड़ता है, तो यह कार्यालय की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
लाइसेंस प्रक्रिया में दलालों की भूमिका को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की भी जांच की जरूरत है। यह पता लगाया जाना जरूरी है कि आवेदनों की प्रक्रिया किस आधार पर आगे बढ़ती है और क्या अलग-अलग आवेदकों के साथ अलग तरह का व्यवहार किया जा रहा है।
प्रभारी के साथ वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही
मामला केवल लाइसेंस शाखा के प्रभारी संतोष कनेश तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यदि लाइसेंस प्रक्रिया में अनियमितताएं हो रही हैं, तो जिम्मेदारी तय करने के लिए वरिष्ठ परिवहन अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था की भी जांच जरूरी है।
जांच के दौरान ट्रायल रिकॉर्ड, आवेदन की स्थिति, पास-फेल का विवरण और लाइसेंस जारी करने के दस्तावेजों का मिलान किया जा सकता है। इन रिकॉर्ड को आपस में मिलाने से यह पता चल सकता है कि आवेदक ने प्रक्रिया पूरी की थी या नहीं, उसका परिणाम क्या था और उसके बाद लाइसेंस किस आधार पर जारी किया गया।
दो निजी स्कूल और एक बस पर भी सवाल
इस पूरे मामले में दो निजी स्कूलों और एक बस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इनके संबंध में पूरी स्थिति साफ नहीं है, लेकिन यह जानना जरूरी बताया जा रहा है कि इनका लाइसेंस प्रक्रिया से क्या संबंध है।
यह भी पूछा जा रहा है कि क्या इनके माध्यम से कोई विशेष व्यवस्था संचालित हो रही है या फिर मामला कुछ और है। इन बिंदुओं की भी निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि लाइसेंस प्रक्रिया से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी सामने आ सके।
रिकॉर्ड की जांच से साफ होगी तस्वीर
शहर क्राइम की विशेष पड़ताल में कार्यालय से जुड़े लोगों ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर कई शिकायतें सामने रखीं। इन शिकायतों के बाद परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले का संज्ञान लेने और निष्पक्ष जांच कराने की जरूरत बताई जा रही है।
जांच में ट्रायल की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, उपस्थिति रजिस्टर, आवेदकों के आवेदन, परीक्षा परिणाम और लाइसेंस जारी होने के रिकॉर्ड की जांच की जानी चाहिए। इन दस्तावेजों से ट्रायल में शामिल आवेदकों, उनकी उपस्थिति, परीक्षा परिणाम और लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया के बारे में स्थिति साफ हो सकती है।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या बड़वानी RTO में लाइसेंस की प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के मुताबिक चल रही है या फिर पर्दे के पीछे कोई अलग व्यवस्था काम कर रही है। बिना ट्रायल लाइसेंस जारी होने की चर्चाओं, दलालों के जरिए काम कराने के आरोपों और आवेदकों को हो रही परेशानी की वास्तविकता जांच के बाद ही सामने आएगी।
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