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आंध्र प्रदेश की 108 एंबुलेंस में एंटी-स्नेक वेनम की सुविधा शुरू

सांप के काटने पर तुरंत इलाज के लिए एंटी-स्नेक वेनम अब आंध्र प्रदेश की 108 एंबुलेंस में उपलब्ध होगा आंध्र प्रदेश सरकार ने इमरजेंसी मेडिकल केयर को बेहतर बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है।

आंध्र प्रदेश की 108 एंबुलेंस में एंटी-स्नेक वेनम की सुविधा शुरू
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आंध्र प्रदेश सरकार ने इमरजेंसी मेडिकल केयर को बेहतर बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य की सभी 108 एंबुलेंस में एंटी-स्नेक वेनम (ASV) रखा जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव ने शनिवार को बताया कि यह फैसला जून 2025 से अब तक सांप के काटने के 3,104 मामलों को देखते हुए लिया गया है।

जिंदगी बचाने के लिए फौरन कदम

सांप के काटने पर मरीज को तुरंत इलाज की जरूरत होती है, क्योंकि देरी से हालत गंभीर हो सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए एंबुलेंस में मौजूद इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियंस (EMTs) को डॉक्टर से सलाह लेकर ASV देने की ट्रेनिंग दी गई है। अगर मरीज में जहर फैलने के लक्षण दिखते हैं, तो EMTs एंबुलेंस में लगे डोम कैमरा के जरिए मंगलागिरी के इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेंटर के डॉक्टरों से संपर्क करेंगे। इस सिस्टम से डॉक्टर मरीज की हालत को रियल टाइम में देख सकते हैं और EMTs को सही इलाज के लिए गाइड कर सकते हैं।

गंभीर मामलों में डॉक्टर की सलाह के बाद तुरंत ASV दिया जाएगा। हालांकि, बिना डॉक्टर की अनुमति के EMTs को एंटी-स्नेक वेनम देने की सख्त मनाही है। सेकेंडरी हेल्थ के डायरेक्टर के.वी.एन. चक्रधर बाबू ने बताया कि EMTs को जहर के लक्षण पहचानने और डॉक्टरों से सही तरीके से संवाद करने की ट्रेनिंग दी गई है ताकि समय पर इलाज हो सके।

गोल्डन आवर पर फोकस

इस पहल का मकसद "गोल्डन आवर" यानी मेडिकल इमरजेंसी के तुरंत बाद का वह अहम समय है जिसमें सही इलाज से मरीज की जान बचाई जा सकती है। एंबुलेंस में ASV रखने और रास्ते में इलाज शुरू करने से सरकार इस महत्वपूर्ण समय का पूरा फायदा उठाने की कोशिश कर रही है।

यह कदम राज्य में सांप के काटने के मामलों को लेकर एक सक्रिय पहल है, जो ग्रामीण और शहरी इलाकों में पीड़ितों को तेजी और प्रभावी तरीके से मदद पहुंचाने की दिशा में बड़ा बदलाव लाएगा।

स्रोत: The Hindu

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आंध्र प्रदेश ने 108 एंबुलेंस में एंटी-स्नेक वेनम क्यों रखने का फैसला किया?

जून 2025 से अब तक सांप के काटने के 3,104 मामलों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। सांप के काटने पर तुरंत इलाज की जरूरत होती है, इसलिए एंबुलेंस में ASV रखने से मरीज को जल्दी मदद मिल सकेगी।

एंबुलेंस में मौजूद EMTs सांप के जहर के मामलों में क्या करेंगे?

EMTs को ट्रेनिंग दी गई है कि डॉक्टर से सलाह लेकर ASV दे सकें। वे एंबुलेंस में लगे डोम कैमरा के जरिए मंगलागिरी के इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेंटर के डॉक्टरों से संपर्क करेंगे। बिना डॉक्टर की अनुमति के कोई दवा देना मना है।

गोल्डन आवर क्या है और इससे इस पहल का क्या संबंध है?

गोल्डन आवर मेडिकल इमरजेंसी के तुरंत बाद का अहम समय है जिसमें सही इलाज से मरीज की जान बचाई जा सकती है। एंबुलेंस में ASV रखने और रास्ते में ही इलाज शुरू करने से सरकार इसी महत्वपूर्ण समय का पूरा फायदा उठाना चाहती है।

क्या EMTs के लिए यह ट्रेनिंग काफी है?

हां, EMTs को जहर के लक्षण पहचानने और डॉक्टरों से सही तरीके से संवाद करने की ट्रेनिंग दी गई है ताकि समय पर इलाज हो सके।

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