राजा महेंद्र प्रताप सिंह यूनिवर्सिटी में सरदार पटेल जयंती पर श्रद्धांजलि और विमर्श
राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, अलीगढ़ में लौह पुरुष सरदार वल्लभाई पटेल की जयंती के अवसर पर श्रद्धांजलि और वैचारिक विमर्श से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए।
राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, अलीगढ़ में लौह पुरुष सरदार वल्लभाई पटेल की जयंती के अवसर पर श्रद्धांजलि और वैचारिक विमर्श से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों के जरिए राष्ट्रनिर्माण में सरदार पटेल के योगदान, राष्ट्रीय एकता और अखंडता को लेकर उनके दृष्टिकोण तथा समकालीन भारत में उनके विचारों की प्रासंगिकता को सामने रखा गया।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर नरेंद्र बहादुर सिंह, कुलसचिव प्रबुद्ध सिंह और कार्यकारी परिषद के सभी सदस्यों ने सरदार वल्लभाई पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। सभी ने सरदार पटेल को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस मौके पर कुलपति प्रोफेसर नरेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि सरदार पटेल का जीवन राष्ट्रीय एकता, दृढ़ इच्छाशक्ति, प्रशासनिक दक्षता और राष्ट्र के प्रति समर्पण का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद देशी रियासतों के एकीकरण के जरिए सरदार पटेल ने आधुनिक भारत की राजनीतिक और भौगोलिक एकता को मजबूत आधार दिया।
कुलपति ने कहा कि सरदार वल्लभाई पटेल के विचार आज भी देश की एकता, अखंडता और सामाजिक समरसता को बनाए रखने की प्रेरणा देते हैं। उनके अनुसार, सरदार पटेल के जीवन और उनके काम से राष्ट्रीय एकता के महत्व को समझा जा सकता है।
कुलपति प्रो. नरेंद्र बहादुर सिंह ने कहा, “सरदार वल्लभाई पटेल केवल एक महान स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि आधुनिक भारत के शिल्पकारों में अग्रणी थे। उन्होंने अपनी दूरदर्शिता, अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प से विविधताओं से परिपूर्ण भारत को एक सूत्र में पिरोने का ऐतिहासिक कार्य किया। वर्तमान समय में उनके विचारों की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है। हमें उनकी विरासत से प्रेरणा लेते हुए आपसी विश्वास, सहयोग, समावेशिता और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करना चाहिए। विश्वविद्यालयों का दायित्व है कि वे विद्यार्थियों में संवैधानिक मूल्यों, लोकतांत्रिक चेतना और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करें।”
उन्होंने अपने संबोधन में सरदार पटेल की विरासत से प्रेरणा लेने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही आपसी विश्वास, सहयोग, समावेशिता और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने की बात कही। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे विद्यार्थियों में संवैधानिक मूल्यों, लोकतांत्रिक चेतना और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करें।
कार्यक्रम में प्रो. के.डी. वर्मा, प्रो. पंकज वार्ष्णेय, मीडिया प्रभारी गगन प्रताप सिंह और निजी सचिव कुलपति रूप कुमार सिंह आदि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में राजनीति विज्ञान विभाग के फ्री थिंकर्स क्लब के तत्वावधान में सरदार वल्लभाई पटेल के व्यक्तित्व, कृतित्व और वैचारिक योगदान पर व्यापक संवाद और बहुआयामी परिचर्चा आयोजित की गई। इस सत्र में सरदार पटेल के विचारों को अलग-अलग पहलुओं से समझने और उन पर चर्चा करने का प्रयास किया गया।
परिचर्चा में अनेकता में एकता, विविधताओं का सम्मान, पारस्परिक सहयोग और विश्वास का विकास, अपनत्व की भावना, पूर्वाग्रहों का त्याग तथा राष्ट्रीय एकता और अखंडता की अनिवार्यता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। प्रतिभागियों ने भारतीय संदर्भ में एकता और अखंडता के व्यापक अर्थ पर भी अपने विचार रखे।
इसके साथ ही समकालीन सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों में सरदार पटेल के विचारों की प्रासंगिकता पर भी चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने बताया कि सरदार पटेल के विचारों को वर्तमान संदर्भ में समझने के लिए एकता और अखंडता के व्यापक अर्थ पर विचार करना जरूरी है।
चर्चा के दौरान इस बात को विशेष रूप से रेखांकित किया गया कि राष्ट्रीय एकता का अर्थ केवल भौगोलिक या राजनीतिक एकीकरण नहीं है। इसके साथ विविध सामाजिक, सांस्कृतिक और भाषायी पहचानों के प्रति सम्मान भी जुड़ा है। आपसी विश्वास और साझा राष्ट्रीय चेतना का विकास भी राष्ट्रीय एकता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
परिचर्चा में फ्री थिंकर्स क्लब के सदस्यों गरिमा सिंह, प्रशांत, अभिनेश दिवाकर, इमरान खान, विशाखा, प्रीति, मेघश्याम, अभिषेक गौतम और राशि वर्मा ने सक्रिय सहभागिता की। सभी ने सरदार वल्लभाई पटेल के व्यक्तित्व, कृतित्व और वैचारिक योगदान से जुड़े विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सरदार वल्लभाई पटेल की जयंती पर कार्यक्रम कहां आयोजित हुए?
कार्यक्रम राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, अलीगढ़ में आयोजित हुए।
पहले सत्र में क्या कार्यक्रम हुआ?
कुलपति प्रोफेसर नरेंद्र बहादुर सिंह, कुलसचिव प्रबुद्ध सिंह और कार्यकारी परिषद के सदस्यों ने सरदार पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
सरदार पटेल ने देश के लिए क्या योगदान दिया?
उन्होंने देशी रियासतों के एकीकरण के जरिए आधुनिक भारत की राजनीतिक और भौगोलिक एकता को मजबूत किया।
दूसरे सत्र में किन विषयों पर चर्चा हुई?
दूसरे सत्र में सरदार पटेल के व्यक्तित्व, काम और विचारों पर चर्चा हुई। अनेकता में एकता, विविधताओं का सम्मान, सहयोग, विश्वास और राष्ट्रीय एकता जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
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