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बॉम्बे हाईकोर्ट ने कोली महिलाओं पर टिप्पणी करने वाले ड्राइवर की बर्खास्तगी सही ठहराई

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कोली महिलाओं पर टिप्पणी करने वाले ड्राइवर की नौकरी से बर्खास्तगी को सही ठहराया बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक कोऑपरेटिव सोसाइटी के ड्राइवर की बर्खास्तगी को सही ठहराया है।

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बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक कोऑपरेटिव सोसाइटी के ड्राइवर की बर्खास्तगी को सही ठहराया है। ड्राइवर पर कोली समुदाय की महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप था। कोर्ट ने कहा कि ऐसा व्यवहार उस व्यक्ति की मानसिकता को दिखाता है, जिसे उन्हीं लोगों की सेवा के लिए रखा गया था। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे व्यक्ति को मुआवजे का हकदार नहीं ठहराया जा सकता।

यह मामला नितिन जयवंत म्हात्रे से जुड़ा है, जो जनवरी 2001 से उत्तन मछीमार और वहातुक सहकारी सोसाइटी लिमिटेड में ड्राइवर के तौर पर काम कर रहे थे। म्हात्रे को जनवरी 2007 में नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था। आरोप था कि उन्होंने अक्टूबर 2006 में सोसाइटी के वाइस चेयरमैन के खिलाफ गाली-गलौज की और मछुआरन महिलाओं के खिलाफ अश्लील और अपमानजनक टिप्पणी की।

जस्टिस संदीप वी मार्ने की अगुवाई वाली सिंगल-जज बेंच ने सोसाइटी की उस याचिका के पक्ष में फैसला दिया, जिसमें जनवरी 2021 में ठाणे इंडस्ट्रियल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। इंडस्ट्रियल कोर्ट ने अगस्त 2015 में लेबर कोर्ट के फैसले को पलटते हुए म्हात्रे की बर्खास्तगी को अवैध करार दिया था। साथ ही, उन्हें नौकरी पर वापस रखने, बकाया वेतन और 5 लाख रुपये मुआवजे का आदेश दिया था। लेकिन हाईकोर्ट ने पाया कि इंडस्ट्रियल कोर्ट ने सबूतों का सही तरीके से मूल्यांकन नहीं किया और म्हात्रे के "अक्षम्य व्यवहार" के लिए उन्हें गलत तरीके से इनाम दिया।

जस्टिस मार्ने ने कहा कि म्हात्रे की आपत्तिजनक टिप्पणियां कई मछुआरन महिलाओं के सामने की गईं और यह केवल उनके रोजगार से जुड़ा मामला नहीं था। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि 14 अक्टूबर 2006 को की गई उनकी टिप्पणियां उस समुदाय के प्रति उनकी पूर्वाग्रही मानसिकता को दिखाती हैं, जिसकी सेवा के लिए उन्हें रखा गया था।

सोसाइटी की याचिका को स्वीकार करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने लेबर कोर्ट के फैसले को बहाल कर दिया और कहा कि ऐसे व्यवहार को न तो बर्दाश्त किया जा सकता है और न ही इसके लिए मुआवजा दिया जा सकता है।

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