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शशि थरूर ने वंदे मातरम के सभी छंद गाने की अनिवार्यता पर उठाए सवाल

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के सभी छंद गाने को 'गैर जरूरी' और 'बोझिल' बताया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक रूप से पहले एक या दो छंद ही गाए जाते थे।

शशि थरूर ने वंदे मातरम के सभी छंद गाने की अनिवार्यता पर उठाए सवाल
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कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के सभी छह छंद गाने की अनिवार्यता पर सवाल उठाए हैं। केरल के तिरुवनंतपुरम में सोमवार को उन्होंने कहा कि वंदे मातरम हमारा राष्ट्रगीत है और इसका सम्मान करना जरूरी है, लेकिन हर कार्यक्रम में इसके सभी छंद गाना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर लोगों को केवल पहले या दूसरे छंद ही याद होते हैं।

थरूर ने बताया कि परंपरागत रूप से वंदे मातरम का पहला छंद कार्यक्रम की शुरुआत में गाया जाता था और राष्ट्रगान अंत में बजता था। उन्होंने यह भी साफ किया कि संसद ने ऐसा कोई कानून पारित नहीं किया है जो वंदे मातरम को अनिवार्य बनाता हो। उन्होंने सुझाव दिया कि इस मुद्दे को आपसी सहमति से हल किया जाना चाहिए।

गृह मंत्रालय के नए दिशानिर्देशों के मुताबिक, अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और अन्य औपचारिक आयोजनों में वंदे मातरम के सभी छह छंद गाना अनिवार्य कर दिया गया है। इन छंदों को गाने में कुल 3 मिनट 10 सेकंड का समय लगता है। साथ ही, हर व्यक्ति का खड़े होकर इसे गाना भी जरूरी होगा।

गौरतलब है कि वंदे मातरम को 1875 में बंकिम चंद्र चटर्जी ने लिखा था और यह 1882 में उनके उपन्यास 'आनंदमठ' में प्रकाशित हुआ था। 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में इसे पहली बार सार्वजनिक रूप से गाया गया था। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह गीत राष्ट्रीय गर्व और प्रेरणा का प्रतीक बन गया था।

थरूर के इस बयान के बाद नए दिशानिर्देशों की व्यावहारिकता और उनकी अनिवार्यता को लेकर बहस छिड़ गई है। कई लोग इसे जरूरी कदम मान रहे हैं, तो कुछ इसे लोगों पर अतिरिक्त बोझ डालने जैसा बता रहे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शशि थरूर ने वंदे मातरम के सभी छंद गाने की अनिवार्यता पर क्या सवाल उठाए?

उन्होंने कहा कि हर कार्यक्रम में सभी छंद गाना व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि ज्यादातर लोगों को केवल पहले या दूसरे छंद ही याद होते हैं।

क्या वंदे मातरम गाने का कोई कानून संसद ने पारित किया है?

थरूर ने बताया कि संसद ने ऐसा कोई कानून पारित नहीं किया है जो वंदे मातरम को अनिवार्य बनाता हो।

सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के सभी छंद गाने में कितना समय लगता है?

इन छंदों को गाने में कुल 3 मिनट 10 सेकंड का समय लगता है।

गृह मंत्रालय के नए दिशानिर्देशों के अनुसार वंदे मातरम गाना कब अनिवार्य है?

अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और अन्य औपचारिक आयोजनों में वंदे मातरम के सभी छह छंद गाना अनिवार्य कर दिया गया है।

वंदे मातरम का इतिहास क्या है?

वंदे मातरम को 1875 में बंकिम चंद्र चटर्जी ने लिखा था और यह 1882 में उनके उपन्यास 'आनंदमठ' में प्रकाशित हुआ था।

#Congress#national song#vande mataram#आधिकारिक कार्यक्रम#शशि थरूर

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