तिरुवनंतपुरम में बुज़ुर्गों के लिए 16 अक्टूबर को यंग ऐट हार्ट लॉन्च
तिरुवनंतपुरम में 16 अक्टूबर को यंग ऐट हार्ट का लॉन्च होगा, जो बुज़ुर्गों और 50+ लोगों को जुड़ने और सक्रिय जीवन जीने का मंच देगा।
दिल से जवान रहने की बात: तिरुवनंतपुरम में बुज़ुर्गों के लिए जिंदगी को नए सिरे से खोजने का मंच
दिल से जवान रहने की बात: तिरुवनंतपुरम में बुज़ुर्गों के लिए जिंदगी को नए सिरे से खोजने का मंच
यंग ऐट हार्ट (वाईएच) का औपचारिक लॉन्च राजधानी में अक्टूबर 16 को किया जाएगा। इसमें संगीत और मनोरंजन का कार्यक्रम होगा। इससे इसमें शामिल होने वाले लोगों को एक-दूसरे से मिलने और एक-दूसरे को जानने का मौका मिलेगा। यह पहल वरिष्ठ नागरिकों और 50 की उम्र वाले लोगों को आपस में जुड़ने, अपनी पसंद की चीजें तलाशने और सक्रिय सामाजिक जीवन की खुशियों को फिर से महसूस करने में मदद करने के लिए बनाई गई है।
पूरी तरह व्यस्त जिंदगी से शांत घरों तक
इस विचार की शुरुआत उन परिवारों के अनुभव से हुई, जिन्होंने रिटायरमेंट के बाद अपने माता-पिता की जिंदगी को बदलते देखा था। प्रिया को ऐसा कोई समय याद नहीं है, जब उनकी मां काम, सामाजिक कार्यक्रमों, दोस्तों से मिलने या नई किताबें पढ़ने में व्यस्त न रहती हों।
लेकिन रिटायरमेंट के बाद प्रिया की मां में ऊर्जा और उत्साह कुछ कम होता दिखाई दिया। प्रिया कहती हैं, “ऐसा लगता था कि उनकी चमक कुछ कम हो गई है। वह कभी-कभी थोड़ी अपने अंदर सिमट जाती थीं और उनका मूड भी खराब रहता था। ऐसा लगता था, जैसे कोई जड़ता उन पर हावी हो गई हो।”
उनका बाहर जाना कम हो गया। उन्होंने खरीदारी के लिए जाना भी बंद कर दिया, क्योंकि हर चीज घर पर मंगाई जा सकती थी। प्रिया के पिता को घर पर रहना पसंद था। इससे उनकी मां के लोगों से मिलने-जुलने के मौके और भी कम हो गए।
प्रिया एक सक्रिय व्यक्ति से बिना उत्साह और झिझक से भरी हुई इंसान में आए इस बदलाव को “काफी चौंकाने वाला और दुखद” बताती हैं। जब उन्होंने इस बारे में अपनी दोस्तों से बात की, तो उन्हें पता चला कि उनके माता-पिता को लेकर भी ऐसी ही कहानियां थीं।
इनमें से कई माता-पिता कभी पूरी तरह सक्रिय जिंदगी जीते थे। अब उनकी जिंदगी घर की शांत और सीमित दिनचर्या तक सिमट गई थी। ऐसा नहीं था कि उन्होंने जिंदगी जीने का उत्साह पूरी तरह खो दिया था। लेकिन उम्र का असर उनकी ऊर्जा पर पड़ने लगा था। बाहर जाने और कुछ करने का उत्साह भी पहले जैसा नहीं रहा था।
शहर में कंसल्टेंसी सेवा चलाने वाली डिंपल मोहन कहती हैं, “तभी हमें लगा कि कुछ साल बाद हमारी जिंदगी भी ऐसी हो सकती है। हम अपनी उम्र को अपनी जिंदगी के सारे रंग क्यों चुरा लेने दें?”
पांच महिलाओं ने इस पहल को आकार दिया
इसी चिंता से यंग ऐट हार्ट की शुरुआत हुई। तिरुवनंतपुरम की पांच महिला उद्यमी और कामकाजी पेशेवर एक साथ आईं। उन्होंने इस बात पर विचार किया कि वे अपने माता-पिता को जिंदगी की खुशी फिर से महसूस करने और उम्र बढ़ने के दौर का उत्साह के साथ सामना करने में कैसे मदद कर सकती हैं।
वाईएच को वरिष्ठ नागरिकों और 50 की उम्र वाले लोगों के लिए एक मंच के रूप में तैयार किया गया है। इसका मकसद लोगों को नई दोस्ती, सीखने के नए अनुभवों, बाहर जाकर शाम बिताने और मौज-मस्ती व मनोरंजन के मौकों के जरिए एक-दूसरे से जोड़ना है।
इस पहल को शुरू करने वाली महिलाओं का मानना है कि उम्र बढ़ने का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि लोग भावनात्मक खुशी या मानसिक सेहत से समझौता करें। वाईएच की संस्थापकों में शामिल सुश्री मोहन कहती हैं, “हम सभी का करियर सफल रहा है, हमारी सामाजिक जिंदगी सक्रिय है और दोस्तों का दायरा भी बड़ा है।”
वह कहती हैं कि अपने माता-पिता के साथ रहने से संस्थापकों को यह देखने का मौका मिला कि उम्र बढ़ने के साथ उनके व्यक्तित्व और जिंदगी को देखने का नजरिया कैसे बदलता गया। ऐसा उस समय भी हुआ, जब वे आर्थिक रूप से सुरक्षित थे और उन्हें कोई बड़ी परेशानी नहीं थी।
इस अनुभव ने संस्थापकों को सोचने पर मजबूर किया कि लोगों को उम्र की परवाह किए बिना अच्छे दोस्तों के साथ खुलकर जिंदगी जीने और उसका पूरा आनंद लेने का मौका मिलना चाहिए। उन्हें जिंदगी को पूरे उत्साह के साथ अपनाने में सक्षम होना चाहिए।
वाईएच का मकसद वरिष्ठ नागरिकों और 50 की उम्र वाले लोगों को आपस में जुड़ने, दोस्ती बनाने, अपनी पसंद साझा करने और ऐसा समुदाय बनाने में मदद करना है, जो उन्हें ज्यादा संतोष भरी जिंदगी जीने में सहारा दे। सुश्री मोहन कहती हैं कि बहुत से लोगों के पास गतिविधियों में हिस्सा लेने के लिए पैसा और समय दोनों होते हैं, लेकिन वे अकेले बाहर निकलने से हिचकिचाते हैं।
पसंद के हिसाब से होंगी गतिविधियां
इस पहल के तहत नियमित रूप से मनोरंजन और फुर्सत से जुड़ी गतिविधियां आयोजित करने की योजना है। साथ ही, समान पसंद रखने वाले लोगों के लिए अपनी प्रतिभा को खोजने, उसे दूसरों के साथ साझा करने और उसे आगे बढ़ाने के मौके बनाने की भी कोशिश की जाएगी।
वाईएच में रजिस्ट्रेशन कराने वाले लोगों की पसंद, शौक और खाली समय में की जाने वाली गतिविधियों के हिसाब से कार्यक्रम तैयार किए जाएंगे। इसका मकसद यह है कि गतिविधियां किसी पहले से तय कार्यक्रम तक सीमित न रहें। इसमें शामिल लोग खुद भी यह तय करने में भूमिका निभा सकें कि कौन-सी गतिविधियां हों।
इस समूह ने खान-पान और पोषण, शारीरिक फिटनेस, डिजिटल साक्षरता और वित्तीय योजना को स्वस्थ और सक्रिय उम्र बढ़ने के अहम हिस्सों के रूप में पहचाना है। जिंदगी के इस दौर से जुड़ी अलग-अलग पसंद और जरूरतों पर ध्यान देने की पहल में इन क्षेत्रों को भी शामिल किया जाएगा।
शुरुआती रजिस्ट्रेशन से लोगों की कई अलग-अलग निजी इच्छाओं का पता चला है। इस पहल की अगुवाई देवी मोहन, शंकरी उन्नीथन और माया मेन के साथ कर रहीं अभिनेत्री मंजू पिल्लई कहती हैं, “हमारे साथ कई महिलाओं ने रजिस्ट्रेशन कराया और हमने उनसे पूछा कि उनकी बकेट लिस्ट में अब तक क्या-क्या रहा है।”
एक महिला धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलना सीखना चाहती है, ताकि वह विदेश में रहने वाले अपने पोते-पोतियों से बातचीत कर सके। एक अन्य महिला हमेशा से कपड़े डिजाइन करना चाहती थीं। वहीं, कोई और महिला यात्रा करना चाहती हैं, लेकिन नौकरी करने के दौरान वह ऐसा नहीं कर पाईं।
सुश्री पिल्लई कहती हैं, “हमें उम्मीद है कि हम इनमें से कुछ सपनों को पूरा करने में मदद कर पाएंगे।” इन उदाहरणों से पता चलता है कि इस पहल में मनोरंजन का मतलब सिर्फ सामाजिक मेल-जोल नहीं है। इसमें सीखना, रचनात्मक काम, बातचीत और यात्रा भी शामिल हैं।
पीढ़ियों के बीच साथ
वाईएच आगे चलकर युवा वॉलंटियर्स को भी इसमें जोड़ना चाहता है और अलग-अलग पीढ़ियों के बीच पुल बनाना चाहता है। ये वॉलंटियर्स वरिष्ठ नागरिकों को समुद्र किनारे या फिल्म देखने ले जा सकते हैं। या फिर उनके साथ दोपहर का समय शतरंज खेलते हुए बिता सकते हैं।
प्रस्तावित गतिविधियों से इस पहल का साथ और संगत पर आधारित बड़ा मकसद साफ होता है। इनमें बाहर जाने के कार्यक्रम भी हैं और साथ बैठकर सामान्य समय बिताने के मौके भी। इससे बुज़ुर्गों को घर पर अकेले रहने के बजाय दूसरे लोगों के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा।
उम्र से जुड़ी कमजोरियां बढ़ने के साथ कई बुज़ुर्ग अपने आसपास की दुनिया से धीरे-धीरे कटने लगते हैं। इस तरह का अकेलापन उनकी भावनात्मक सेहत पर असर डाल सकता है और उन्हें डिप्रेशन का शिकार होने के खतरे में डाल सकता है।
यंग ऐट हार्ट सबसे पहले सामाजिक मेल-जोल और साथ की उस जरूरत पर ध्यान देना चाहता है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इसका बड़ा मकसद वरिष्ठ नागरिकों और 50 की उम्र वाले लोगों को लोगों से जुड़े रहने का एहसास बनाए रखने में मदद करना है। साथ ही, यह उन्हें उन रुचियों को फिर से अपनाने का मौका देना चाहता है, जिन्हें उन्होंने शायद पीछे छोड़ दिया है, और पूरी खुशी के साथ जिंदगी को अपनाने में मदद करना चाहता है।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यंग ऐट हार्ट का लॉन्च कब और कहां होगा?
यंग ऐट हार्ट का औपचारिक लॉन्च 16 अक्टूबर को तिरुवनंतपुरम में होगा।
यंग ऐट हार्ट किसके लिए बनाया गया है?
यह मंच वरिष्ठ नागरिकों और 50 की उम्र वाले लोगों के लिए बनाया गया है।
यंग ऐट हार्ट का मकसद क्या है?
इसका मकसद लोगों को नई दोस्ती, सीखने, बाहर जाकर समय बिताने और मनोरंजन के मौकों से जोड़ना है।
यंग ऐट हार्ट की शुरुआत किसने की?
इस पहल को तिरुवनंतपुरम की पांच महिला उद्यमियों और कामकाजी पेशेवरों ने शुरू किया है।
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