बिलासपुर के किसान ने दो बीघा में काली हल्दी की खेती शुरू की
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के राजपुरा निवासी किसान राम दयाल ने काली हल्दी की खेती शुरू की है। वह बैजनाथ से काली हल्दी के बीज और प्रकंद खरीदकर अपनी दो बीघा जमीन पर इसकी फसल तैयार कर रहे हैं।
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के राजपुरा निवासी किसान राम दयाल ने काली हल्दी की खेती शुरू की है। वह बैजनाथ से काली हल्दी के बीज और प्रकंद खरीदकर अपनी दो बीघा जमीन पर इसकी फसल तैयार कर रहे हैं। काली हल्दी की खेती को वह अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में एक नई पहल के तौर पर देख रहे हैं।
रामदयाल के खेत में तैयार हो रही काली हल्दी की फसल का जायजा लेने के लिए जनकल्याण सभा का एक प्रतिनिधिमंडल राजपुरा पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने खेत का निरीक्षण किया। इस दौरान किसान से काली हल्दी की खेती, उत्पादन और इससे जुड़ी संभावनाओं के बारे में जानकारी ली गई।
किसान रामदयाल ने बताया कि उन्होंने काली हल्दी के प्रकंद बैजनाथ से खरीदे थे। उनके मुताबिक, एक बीघा जमीन में करीब एक क्विंटल प्रकंद लगाए जा सकते हैं। इससे लगभग 10 क्विंटल तक काली हल्दी की पैदावार होने की संभावना है।
उन्होंने बताया कि बाजार में काली हल्दी की कीमत लगभग 300 रुपये प्रति किलो तक बताई जा रही है। इस हिसाब से 10 क्विंटल फसल की कीमत करीब तीन लाख रुपये बनती है। इसी संभावना को देखते हुए उन्होंने दो बीघा जमीन पर काली हल्दी की खेती शुरू की है।
रामदयाल के अनुसार, काली हल्दी की फसल तैयार होने में करीब एक साल का समय लगता है। उन्होंने कहा कि स्थानीय मौसम काली हल्दी की खेती के अनुकूल है। उनके मुताबिक, इस फसल को आवारा पशुओं, जंगली जानवरों और बंदरों से नुकसान का खतरा भी कम है।
काली हल्दी को औषधीय पौधे के रूप में जाना जाता है। स्रोत में इसे एंटी केंसर मेडिशन प्लांट के रूप में भी अहम बताया गया है। इसी वजह से बाजार में काली हल्दी की मांग होने की बात कही जाती है। किसान का कहना है कि औषधीय फसल होने के कारण इसकी खेती में आम फसलों से अलग संभावनाएं दिखाई देती हैं।
जनकल्याण सभा के अध्यक्ष चुन्नी लाल ने बताया कि सभा पूरे हिमाचल प्रदेश में किसानों को काली हल्दी के उत्पादन के प्रति जागरूक कर रही है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य किसानों को औषधीय फसलों की खेती की जानकारी देना और उन्हें आय के नए विकल्पों से जोड़ना है।
चुन्नी लाल ने बताया कि जनकल्याण सभा के पास जटामांसी और जंगली गेंदे के बीज भी निःशुल्क उपलब्ध हैं। इन फसलों की खेती करने के इच्छुक किसान सभा से संपर्क कर सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि एक बीघा जमीन पर करीब 60 हजार रुपये के काली हल्दी के प्रकंद लगाए जा सकते हैं। उनके अनुसार, किसान एक साल में तीन लाख रुपये तक की फसल तैयार कर सकता है। चुन्नी लाल ने कहा कि औषधीय फसलों की खेती किसानों की आमदनी बढ़ाने और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने में सहायक हो सकती है। बिलासपुर जिले के राजपुरा में राम दयाल द्वारा शुरू की गई काली हल्दी की खेती इसी दिशा में एक उदाहरण के रूप में सामने आई है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बिलासपुर में काली हल्दी की खेती किसने शुरू की है?
राजपुरा निवासी किसान राम दयाल ने काली हल्दी की खेती शुरू की है।
राम दयाल ने काली हल्दी की खेती कितनी जमीन पर शुरू की है?
उन्होंने दो बीघा जमीन पर काली हल्दी की खेती शुरू की है।
एक बीघा जमीन में काली हल्दी की कितनी पैदावार हो सकती है?
एक बीघा जमीन में करीब एक क्विंटल प्रकंद लगाए जा सकते हैं, जिससे लगभग 10 क्विंटल काली हल्दी की पैदावार होने की संभावना है।
काली हल्दी की फसल तैयार होने में कितना समय लगता है?
काली हल्दी की फसल तैयार होने में करीब एक साल का समय लगता है।
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