नाग पंचमी पर वाराणसी के अखाड़ों में कुश्ती का उत्सव शुरू
नाग पंचमी के मौके पर वाराणसी और आसपास के इलाकों में अखाड़ों की रौनक चरम पर है। शहर से लेकर गांवों तक कुश्ती के मुकाबलों को लेकर युवाओं और खेल प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है।
नाग पंचमी के मौके पर वाराणसी और आसपास के इलाकों में अखाड़ों की रौनक चरम पर है। शहर से लेकर गांवों तक कुश्ती के मुकाबलों को लेकर युवाओं और खेल प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। परंपरागत अखाड़ों में पहलवान अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे रहे हैं और जल्द ही दांव-पेंच का प्रदर्शन शुरू होगा।
स्वामीनाथ अखाड़ा समेत कई प्रमुख अखाड़ों में इस बार भारतीय पहलवानों के साथ विदेशी खिलाड़ी भी हिस्सा ले रहे हैं। पहलवान जोड़ी, गदा, नाल जैसे पारंपरिक व्यायामों के जरिए अपनी ताकत और हुनर दिखाने को तैयार हैं। अखाड़ों की मिट्टी को खास तरीके से तैयार किया गया है, और सुबह से ही दर्शकों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई है।
अखाड़ों के वरिष्ठ उस्तादों का कहना है कि नाग पंचमी पर कुश्ती केवल एक खेल नहीं है, बल्कि यह काशी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है। दशकों से चली आ रही इस परंपरा में पहलवान अपने शिष्यों को कुश्ती के गुर सिखाते हैं और इसे आगे बढ़ाने का काम करते हैं। इस साल महिलाओं की भागीदारी भी खास तौर पर देखी जा रही है। कई महिला पहलवान अखाड़ों में अभ्यास कर रही हैं और मुकाबलों में हिस्सा लेने को उत्साहित हैं।
आयोजकों के मुताबिक, अखाड़ों में जल्द ही मुकाबले शुरू होंगे और बड़ी संख्या में दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद है। नाग पंचमी पर अखाड़ों की यह परंपरा काशी की पहचान बन चुकी है, जहां खेल, संस्कृति और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नाग पंचमी पर वाराणसी में क्या हो रहा है?
नाग पंचमी पर वाराणसी में अखाड़ों में कुश्ती का उत्सव शुरू हो रहा है।
इस बार कुश्ती में कौन-कौन हिस्सा ले रहा है?
इस बार भारतीय पहलवानों के साथ विदेशी खिलाड़ी भी कुश्ती में हिस्सा ले रहे हैं।
अखाड़ों में कुश्ती का क्या महत्व है?
अखाड़ों में कुश्ती काशी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है।
क्या इस साल महिलाओं की भागीदारी भी हो रही है?
हाँ, इस साल महिलाओं की भागीदारी खास तौर पर देखी जा रही है।
कब से दर्शकों की भीड़ जुटनी शुरू हुई है?
सुबह से ही दर्शकों की भीड़ अखाड़ों में जुटनी शुरू हो गई है।
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