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व्रजेश हिरजी ने थिएटर और कॉमेडी पर साझा की अपनी चुनौतियां

व्रजेश हिरजी ने थिएटर, कॉमेडी और एक्टर्स के डर पर की बात: ‘मेरा फोन क्यों नहीं बज रहा?’ एक्टर व्रजेश हिरजी के लिए एंटरटेनमेंट की दुनिया का सफर काफी संतोषजनक रहा है, लेकिन इसमें चुनौतियां भी कम नहीं

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एक्टर व्रजेश हिरजी के लिए एंटरटेनमेंट की दुनिया का सफर काफी संतोषजनक रहा है, लेकिन इसमें चुनौतियां भी कम नहीं रहीं। इंडस्ट्री के मानसिक दबाव पर खुलकर बात करते हुए हिरजी ने माना कि करियर में ठहराव के दौरान उन्होंने खुद पर शक किया। उन्होंने कहा, "ऐसे वक्त आ सकते हैं जब आप काम से बाहर हों और खुद से पूछें, ‘क्या मैं अच्छा नहीं हूं? क्या मुझसे अब नहीं होगा? मेरा फोन क्यों नहीं बज रहा?’" हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि ये डर हमेशा के लिए नहीं रहता।

थिएटर: सीखने और बढ़ने की जगह

फिल्म, टीवी और ऑडियो में काम करने के बावजूद हिरजी का थिएटर से प्यार कभी कम नहीं हुआ। वो थिएटर को रियाज़ कहते हैं—जहां वो लगातार सीखते और भूलते रहते हैं। उन्होंने कहा, "थिएटर वो जगह है जहां मैं भूलता और दोबारा सीखता हूं।" उन्होंने आद्यम थिएटर को इंडस्ट्री और अपने हुनर को समृद्ध बनाने का श्रेय दिया।

हिरजी इन दिनों आद्यम थिएटर के दिल का हाल सुने दिलवाला में परफॉर्म कर रहे हैं। इस प्ले का निर्देशन मोहित टाकलकर ने किया है, जिसमें हिरजी कई किरदार निभा रहे हैं। दो अलग-अलग और विपरीत किरदार निभाने की चुनौती, जिनमें से एक कॉमिक नहीं है, उनके लिए काफी संतोषजनक रहा। उन्होंने कहा, "मोहित ने दोनों किरदारों की सच्चाई को पकड़ने पर जोर दिया है, यहां तक कि उनके सबसे मजेदार पलों में भी।"

कॉमेडी: सबसे मुश्किल परीक्षा

कॉमेडी में अपनी महारत के लिए पहचाने जाने वाले हिरजी का मानना है कि कॉमेडी एक्टिंग का सबसे मुश्किल जॉनर है। उन्होंने कहा, "ईमानदारी के बिना कॉमेडी हो ही नहीं सकती। मेरे हिसाब से इसे ‘परफॉर्म’ करना बेहतर नहीं है क्योंकि कॉमेडी बस होती है।" उन्होंने ये भी बताया कि लाइव परफॉर्मेंस के दौरान ऑडियंस की प्रतिक्रिया, जैसे दिल का हाल सुने दिलवाला में, भले ही नर्वस कर दे, लेकिन जब वो कनेक्ट करती है तो बेहद संतोष देती है।

स्टीरियोटाइप्स से आगे बढ़ना

हिरजी को भले ही उनके कॉमिक रोल्स के लिए जाना जाता है, लेकिन वो खुद को एक ही दायरे में बांधने से इनकार करते हैं। उन्होंने कहा, "करियर के एक वक्त पर ये मुझे परेशान करता था, लेकिन अब नहीं करता।" उन्होंने अपने विविध कामों का जिक्र किया, जिसमें दिल का हाल सुने दिलवाला जैसे नॉन-कॉमिक रोल्स भी शामिल हैं।

उतार-चढ़ाव को अपनाना

इंडस्ट्री की अनिश्चितता पर बात करते हुए हिरजी ने इसके शारीरिक और मानसिक प्रभाव को स्वीकार किया, लेकिन लचीलापन बनाए रखने की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "जरूरी है कि आप इस डर को अपनाएं और उसके साथ बहें।" उनके लिए ये विश्वास कि टैलेंट को आखिरकार पहचाना जाएगा, एक गाइडिंग प्रिंसिपल की तरह है।

55 साल की उम्र में भी हिरजी प्रोफेशनल कमिटमेंट्स और पर्सनल फिटनेस के बीच बैलेंस बनाए हुए हैं। चाहे बेटे के साथ पहाड़ों पर चढ़ाई करना हो या रिंग ऑफ फायर में स्कूबा डाइविंग की तैयारी, वो अपने आउटडोर लाइफस्टाइल को खुद को फिट और ग्राउंडेड रखने का श्रेय देते हैं।

हिरजी के लिए ये सफर एक ही चीज पर टिका है: एक्टिंग का प्यार। चाहे मीडियम कोई भी हो या चुनौतियां कितनी भी हों। उन्होंने कहा, "मैंने हमेशा सिर्फ एक्टिंग करना चाहा है।" यही भावना उनके करियर को परिभाषित करती है।

स्रोत: Indian Express

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

व्रजेश हिरजी ने थिएटर के बारे में क्या कहा?

व्रजेश हिरजी ने थिएटर को सीखने और बढ़ने की जगह बताया, जहां वो लगातार भूलते और दोबारा सीखते हैं।

कॉमेडी को लेकर व्रजेश हिरजी का क्या मानना है?

व्रजेश हिरजी का मानना है कि कॉमेडी एक्टिंग का सबसे मुश्किल जॉनर है, और इसमें ईमानदारी जरूरी है।

हिरजी ने अपने करियर में किस तरह की चुनौतियों का सामना किया?

हिरजी ने करियर में ठहराव के दौरान खुद पर शक करने की बात की और कहा कि ये डर हमेशा के लिए नहीं रहता।

व्रजेश हिरजी का एक्टिंग के प्रति क्या नजरिया है?

व्रजेश हिरजी का कहना है कि उन्होंने हमेशा सिर्फ एक्टिंग करना चाहा है, चाहे चुनौतियां कितनी भी हों।

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