विवेक ओबेरॉय ने कॉलेज में जूता फेंके जाने की घटना साझा की
विवेक ओबेरॉय ने बताया, स्टेज पर उनके ऊपर फेंका गया था जूता: 'एक छोटा काम भी नहीं कर सकते?' विवेक ओबेरॉय ने शेयर किया वो पल जिसने उनकी एक्टिंग का नजरिया बदल दिया एक्टर विवेक ओबेरॉय ने हाल ही में अपने
विवेक ओबेरॉय ने बताया, स्टेज पर उनके ऊपर फेंका गया था जूता: 'एक छोटा काम भी नहीं कर सकते?'
विवेक ओबेरॉय ने शेयर किया वो पल जिसने उनकी एक्टिंग का नजरिया बदल दिया
एक्टर विवेक ओबेरॉय ने हाल ही में अपने कॉलेज के दिनों का एक ऐसा वाकया बताया जिसने उनकी एक्टिंग के प्रति सोच को पूरी तरह बदल दिया। CNN-News18 से बात करते हुए विवेक ने मुंबई के मिठीबाई कॉलेज में थिएटर कॉम्पिटिशन के दौरान स्टेज पर हुई एक घटना को याद किया। उस वक्त वो एक छोटे से रोल में थे, जब उनके ऊपर जूता फेंका गया। इस घटना और एक दर्शक की सख्त टिप्पणी ने उनकी सोच और काम के प्रति प्रतिबद्धता को पूरी तरह बदल दिया।
स्टेज पर मिला सबक
कॉन्फिडेंस और कई अवॉर्ड्स के बावजूद, विवेक को कॉलेज प्ले में एक बैकग्राउंड रोल दिया गया था। ये फैसला उन्हें परेशान कर गया। उन्होंने बताया, "मुझे एक बेकार सा रोल दिया गया था जिसमें कोई डायलॉग नहीं था। मुझे बस गार्ड की तरह खड़े रहना था, हाथ में भाला पकड़कर।" इस दौरान मुख्य किरदार निभाने वाला एक्टर बार-बार अपनी लाइन भूल रहा था, जबकि विवेक को वो लाइनें याद थीं।
स्टेज पर खड़े-खड़े, भाले पर झुके हुए, विवेक झुंझलाहट में थे। तभी अचानक किसी ने उनके ऊपर जूता फेंक दिया। जूता उनके चेहरे पर नहीं लगा, लेकिन कंधे पर आकर लगा। ये पल उनके लिए काफी परेशान करने वाला था। इसके बाद एक दर्शक ने उन्हें फटकार लगाई, "तुम इतने बड़े एक्टर हो और एक छोटा काम भी ठीक से नहीं कर सकते? सीधे खड़े भी नहीं रह सकते? अगर ये नहीं कर सकते तो बड़े रोल कैसे निभाओगे?" इस बात ने विवेक को झकझोर दिया। उन्होंने बताया, "उस दिन मैंने ठान लिया कि मैं हर रोल को पूरी शिद्दत से निभाऊंगा। और उसी साल के अंत तक मैं सारे लीड रोल कर रहा था।"
ग्लैमर के बजाय कला को चुना
बॉलीवुड में विवेक का सफर उनके सोच-समझकर लिए गए फैसलों से भरा रहा। स्टार किड्स के ग्लैमरस रोल्स के पीछे भागने के बजाय उन्होंने राम गोपाल वर्मा जैसे सम्मानित फिल्ममेकर्स को चुना। 2002 में वर्मा की क्रिटिकली अक्लेम्ड गैंगस्टर ड्रामा कंपनी से उनका डेब्यू हुआ, जिसने उन्हें खूब पहचान दिलाई और उनके करियर की दिशा तय की। शुरुआती सालों में उन्होंने सिनेमाई मास्टर्स के साथ काम को प्राथमिकता दी। हालांकि, बाद में वो उस लेवल को बनाए रखने में कामयाब नहीं रहे।
प्रिविलेज और मेहनत का संतुलन
अपने पिता, एक्टर-राजनेता सुरेश ओबेरॉय के बेटे होने पर बात करते हुए विवेक ने माना कि वो प्रिविलेज्ड थे, लेकिन अपनी पहचान खुद बनाना जरूरी था। उन्होंने कहा, "प्रिविलेज आपको एक शुरुआत दिला सकता है, लेकिन पहचान नहीं।" उन्होंने बताया कि उनके पिता, जो एक अमीर परिवार से थे, मुंबई में करियर शुरू करने के लिए 400 रुपये उधार लेने पड़े थे। ये कहानी विवेक को बहुत प्रेरित करती है। खुद को साबित करने के लिए विवेक ने अपना सरनेम तक छोड़ दिया और खुद को विवेक आनंद के नाम से इंट्रोड्यूस किया।
विवेक ओबेरॉय की ये कहानी दिखाती है कि एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में प्रिविलेज, विनम्रता और मेहनत के बीच कैसे बैलेंस बनाना पड़ता है। उनका सफर याद दिलाता है कि छोटे रोल भी बड़े सबक सिखा सकते हैं और आगे बढ़ने के रास्ते खोल सकते हैं।
स्रोत: Indian Express
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विवेक ओबेरॉय ने कॉलेज में कौन सी घटना का जिक्र किया?
विवेक ओबेरॉय ने बताया कि कॉलेज के थिएटर कॉम्पिटिशन के दौरान उनके ऊपर जूता फेंका गया।
इस घटना ने विवेक ओबेरॉय की एक्टिंग के प्रति सोच को कैसे प्रभावित किया?
इस घटना ने विवेक को यह सिखाया कि हर रोल को पूरी शिद्दत से निभाना चाहिए।
विवेक ओबेरॉय ने अपने करियर की शुरुआत कैसे की?
उन्होंने 2002 में राम गोपाल वर्मा की फिल्म 'कंपनी' से अपने करियर की शुरुआत की।
विवेक ओबेरॉय ने प्रिविलेज के बारे में क्या कहा?
विवेक ने कहा कि प्रिविलेज आपको शुरुआत दिला सकता है, लेकिन पहचान खुद बनानी पड़ती है।
विवेक ओबेरॉय ने अपने सरनेम को क्यों छोड़ा?
उन्होंने खुद को साबित करने के लिए अपना सरनेम छोड़कर विवेक आनंद के नाम से इंट्रोड्यूस किया।
सबसे ज़्यादा पढ़ी गई
- 1
श्रावस्ती में आधार कार्ड सेंटरों पर अवैध वसूली का मामला सामने आया
- 2
गाजियाबाद में स्वतंत्रता दिवस पर भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन
- 3
राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में नवाचार कार्यशाला का आयोजन
- 4
राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में ‘फ्री थिंकर्स क्लब’ की शुरुआत
- 5
शिक्षक पर शराब पीकर स्कूल आने का आरोप, ग्रामीणों का हंगामा
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहली टिप्पणी करें।