ताजपुर रसूलपुर में सोमवार को 110वां देवता मेला, 108 साल की परंपरा
ब्लॉक लोधा क्षेत्र के गांव ताजपुर रसूलपुर में सोमवार शाम को 110वें भव्य देवता मेले का आयोजन जोरशोर से मनाया जाएगा। यह मेला गांव का मुख्य त्योहार रक्षाबंधन के रूप में मनाया जाता है।
ब्लॉक लोधा क्षेत्र के गांव ताजपुर रसूलपुर में सोमवार शाम को 110वें भव्य देवता मेले का आयोजन जोरशोर से मनाया जाएगा। यह मेला गांव का मुख्य त्योहार रक्षाबंधन के रूप में मनाया जाता है।
ग्राम प्रधान सत्यपाल सिंह ने बताया कि सन 1916 से लगातार इस मेले का आयोजन होता रहा है। इस मेले में कुश्ती दंगल, देवी जागरण, रसिया, सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होगा और मेले में झूले और दुकानें लगेंगी।
गांव के बुजुर्ग प्रेमपाल सिंह मेला संयोजक ने बताया कि सदियों वर्ष पहले यह गांव कभी टीले पर बसा हुआ था। तब गांव में महामारी की बीमारी फैली थी। तब किसी संत ने कहा कि देवता नाराज हैं, गांव में देवता पूजा करो और गांव को दूसरी जगह बसाओ। तभी से गांव को ताजपुर रसूलपुर गांव बसाया गया और देवता मेला शुरू किया गया। इसके साथ ही दंगल कुश्ती, जागरण, रसिया और राखी का त्योहार भी मनाया जाता है। इसी मेले वाले दिन देवता मेले को रक्षाबंधन के रूप में मनाया जाता है और प्रत्येक बहन, बेटी व अन्य रिश्तेदार जरूर आते हैं।
मेला कमेटी अध्यक्ष बनवारी लाल ने बताया कि मेले में मुख्य अतिथि के तौर पर पूर्व सांसद एटा राजवीर सिंह उर्फ राजू भइया, शिक्षा मंत्री संदीप सिंह, विधायक राजकुमार सहयोगी, ब्लॉक प्रमुख हरेंद्र सिंह, जिला पंचायत सदस्य पति जंगजीत सिंह, जिला पंचायत सदस्य हीरालाल, बृज क्षेत्र प्रवीन राज आदि लोग मौजूद रहेंगे।
मेले के मुख्य कार्यकर्ता चंद्रप्रकाश, श्योराज सिंह, शुभम कुमार, किशोर कुमार, भागेंद्र सिंह आदि समस्त ग्राम वासी रहेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ताजपुर रसूलपुर में देवता मेला कब लगता है?
ताजपुर रसूलपुर में देवता मेला सोमवार को लगता है। यह मेला रक्षाबंधन के त्योहार के रूप में मनाया जाता है।
यह मेला कितने साल से चल रहा है?
यह मेला 1916 से लगातार चल रहा है। इस बार 110वां देवता मेला मनाया जा रहा है, जो 108 साल की परंपरा है।
देवता मेले में क्या-क्या होता है?
मेले में कुश्ती दंगल, देवी जागरण, रसिया और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। साथ ही झूले और दुकानें भी लगती हैं।
देवता मेला शुरू करने की वजह क्या थी?
सदियों साल पहले जब गांव टीले पर बसा था तो वहां महामारी फैली। एक संत ने कहा कि देवता नाराज हैं। तब से गांव को दूसरी जगह बसाया गया और देवता मेला शुरू किया गया।
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