उत्तर प्रदेश जल निगम ने IIM और IIT के साथ जल सुधारों के लिए किया समझौता
उत्तर प्रदेश जल निगम ने ग्रामीण जल सुधारों के लिए IIM इंदौर और IIT कानपुर से हाथ मिलाया उत्तर प्रदेश में ग्रामीण जल आपूर्ति और स्वच्छता ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए, उत्तर
उत्तर प्रदेश में ग्रामीण जल आपूर्ति और स्वच्छता ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए, उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) ने इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) इंदौर और इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) कानपुर के साथ साझेदारी की है। IIM इंदौर के साथ तीन साल का समझौता (MoU) हो चुका है, जबकि IIT कानपुर के साथ समझौते को अंतिम रूप दिया जा रहा है। यह ऐलान मंगलवार, 28 जुलाई 2026 को किया गया।
तकनीक और मैनेजमेंट पर फोकस
इस साझेदारी का मकसद जल निगम के कामकाज में एडवांस तकनीक, आधुनिक मैनेजमेंट प्रैक्टिस और मजबूत मॉनिटरिंग सिस्टम को शामिल करना है। इसका उद्देश्य जल जीवन मिशन के तहत हुई प्रगति को बनाए रखना और आगे बढ़ाना है। इस मिशन के तहत उत्तर प्रदेश के 2.51 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण घरों में नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं।
IIT कानपुर का AIRAWAT रिसर्च फाउंडेशन उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के लिए AI आधारित निर्णय लेने और गवर्नेंस फ्रेमवर्क तैयार करने में मदद करेगा। पहले फेज में डेटा मैनेजमेंट, एनालिटिक्स और AI पावर्ड पब्लिक शिकायत निवारण सिस्टम पर काम होगा। आगे के फेज में ग्राउंडवॉटर की स्थिरता, वेस्टवॉटर एनालिटिक्स, पानी की क्वालिटी मॉनिटरिंग और जल वितरण की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखने जैसे मुद्दों पर काम होगा। इसमें ट्रीटेड सीवेज के पुन: उपयोग और वैज्ञानिक तरीके से स्लज मैनेजमेंट जैसे इनोवेटिव उपाय भी शामिल हैं।
संगठन की क्षमता को मजबूत करना
IIM इंदौर के साथ हुए समझौते से जल निगम के नए बने टेक्नोलॉजी और इनोवेशन सेल को मजबूती मिलेगी। इस साझेदारी के तहत क्षमता निर्माण, पानी बचाने के लिए व्यवहार परिवर्तन पर जागरूकता, तकनीकी सलाह और वित्तीय रणनीति जैसे क्षेत्रों पर काम होगा। दोनों संस्थानों के बराबर प्रतिनिधित्व वाली एक जॉइंट स्टीयरिंग कमेटी इस साझेदारी की निगरानी करेगी।
IIM इंदौर द्वारा दो स्टडी पहले ही मंजूर हो चुकी हैं: वित्तीय प्रबंधन और ऑपरेशनल प्रक्रियाओं की व्यापक समीक्षा, और कैडर असेसमेंट व पुनर्गठन अध्ययन। इनका मकसद जल जीवन मिशन के बाद बढ़े काम के बोझ को देखते हुए मानव संसाधन ढांचे में सुधार करना है।
सतत मॉडल की ओर
इन स्टडीज में किफायती मानव संसाधन नीतियां, नए राजस्व उत्पन्न करने के मॉडल और अन्य राज्यों के उच्च प्रदर्शन वाले जल उपयोगिताओं के साथ तुलना जैसे मुद्दों पर भी विचार किया जाएगा। यह कदम जल निगम (ग्रामीण) को तकनीक आधारित, पेशेवर तरीके से प्रबंधित और वित्तीय रूप से टिकाऊ सेवा मॉडल की ओर ले जाने का संकेत देता है।
इन साझेदारियों के जरिए जल निगम का लक्ष्य ग्रामीण उत्तर प्रदेश में सुरक्षित पेयजल और प्रभावी सीवेज ट्रीटमेंट मुहैया कराना है, जो वैश्विक मानकों के अनुरूप हो। उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक राज शेखर ने कहा, “इन साझेदारियों से संगठन के कामकाज के हर पहलू में ठोस सुधार की उम्मीद है।”
स्रोत: The Hindu
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