उत्तर प्रदेश ने ज़ूनोटिक बीमारियों की पहचान के लिए नई गाइडबुक जारी की
उत्तर प्रदेश में जानवरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों पर नजर, 'वन हेल्थ' मॉडल को बढ़ावा उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग ने जानवरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों (ज़ूनोटिक डिज़ीज़) की जल्दी
उत्तर प्रदेश में जानवरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों पर नजर, 'वन हेल्थ' मॉडल को बढ़ावा
उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग ने जानवरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों (ज़ूनोटिक डिज़ीज़) की जल्दी पहचान और रिपोर्टिंग के लिए अपनी क्षमता बढ़ाने का ऐलान किया है। रविवार को विभाग ने निगरानी, लैब की क्षमता और बीमारी से निपटने की तैयारी को मजबूत करने के लिए कई कदमों की घोषणा की। इनमें पशु चिकित्सकों के लिए एक नई गाइडबुक तैयार करना और प्राथमिकता वाली ज़ूनोटिक बीमारियों के लिए उन्नत डायग्नोस्टिक तकनीक, जैसे ELISA टेस्टिंग, अपनाना शामिल है।
जल्दी पहचान और जानकारी पर जोर
पशु चिकित्सकों के लिए तैयार की गई नई गाइडबुक ज़ूनोटिक और प्राथमिकता वाली पशु बीमारियों पर कम्पेंडियम का मकसद फील्ड में काम करने वाले डॉक्टरों की विशेषज्ञता बढ़ाना है। इसमें केस की पहचान, निगरानी प्रोटोकॉल और समय पर बीमारी की रिपोर्टिंग के लिए गाइडलाइन्स दी गई हैं। यह पहल राज्य के ज़ूनोटिक और अन्य गंभीर पशु बीमारियों के डायग्नोस्टिक और रिस्पॉन्स सिस्टम को मजबूत करने की व्यापक योजना का हिस्सा है।
पशुपालन, डेयरी विकास और मत्स्य पालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने द हिंदू से कहा, "हम बीमारी की रोकथाम के लिए बहु-क्षेत्रीय रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।"
वेटलैंड्स पर निगरानी और फार्म-स्तरीय बायोसेक्योरिटी
RISE ग्लोबल हेल्थ सिक्योरिटी (RISE GHS) प्रोजेक्ट के तहत, विभाग ने राज्य के 19 रामसर साइट्स और अन्य प्रमुख वेटलैंड्स पर प्रवासी पक्षियों में एवियन इन्फ्लूएंजा की सक्रिय निगरानी की है। पिछले प्रवासी सीजन में 1,100 से ज्यादा सैंपल्स इकट्ठा कर बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) में टेस्ट किए गए। इस सफलता के बाद, आने वाले प्रवासी पक्षी सीजन के लिए भी इसी तरह की निगरानी की योजना बनाई गई है।
इसके अलावा, पीलीभीत और गोरखपुर जिलों में फार्म-स्तरीय बायोसेक्योरिटी को मजबूत करने की कोशिशें जारी हैं। इन प्रयासों का फोकस बीमारी की रोकथाम और संक्रमण नियंत्रण पर है, जो ज़ूनोटिक बीमारी के फैलने के खतरे को कम करने में अहम हैं।
ट्रेनिंग और विभागीय तालमेल
'वन हेल्थ' मॉडल को और मजबूत करने के लिए राज्य सरकार सरकारी पशु चिकित्सकों के लिए एक राज्य-स्तरीय ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (ToT) प्रोग्राम आयोजित करेगी। इस पहल का मकसद विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाना, डेटा साझा करना और बीमारी के प्रकोप का मिलकर जवाब देना है। वन हेल्थ फ्रेमवर्क इंसान, जानवर और पर्यावरण की स्वास्थ्य प्रणालियों के बीच सहयोग पर जोर देता है ताकि ज़ूनोटिक और अन्य स्वास्थ्य खतरों से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके।
क्यों है यह अहम?
ज़ूनोटिक बीमारियां, जो जानवरों से इंसानों में फैल सकती हैं, आज के समय में एक बढ़ता हुआ खतरा हैं। इसके पीछे कारण हैं - जंगलों का कटाव, जलवायु परिवर्तन और इंसानों और जानवरों के बीच बढ़ते संपर्क। उत्तर प्रदेश की ये सक्रिय पहल, जिसमें उन्नत डायग्नोस्टिक्स, निगरानी और विभागीय समन्वय शामिल हैं, इन खतरों को रोकने और प्रबंधित करने की रणनीतिक सोच को दर्शाती है।
जल्दी पहचान और बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण को प्राथमिकता देकर, राज्य सार्वजनिक और पशु स्वास्थ्य दोनों की सुरक्षा का लक्ष्य रख रहा है और भारत में एकीकृत स्वास्थ्य प्रबंधन प्रणाली का उदाहरण पेश कर रहा है।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उत्तर प्रदेश ने ज़ूनोटिक बीमारियों के लिए क्या नई गाइडबुक तैयार की है?
उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग ने पशु चिकित्सकों के लिए 'ज़ूनोटिक और प्राथमिकता वाली पशु बीमारियों पर कम्पेंडियम' नाम की एक नई गाइडबुक तैयार की है। इसमें केस की पहचान, निगरानी प्रोटोकॉल और समय पर बीमारी की रिपोर्टिंग के लिए गाइडलाइन्स दी गई हैं।
RISE GHS प्रोजेक्ट के तहत उत्तर प्रदेश में एवियन इन्फ्लूएंजा की निगरानी कहाँ की जा रही है?
RISE ग्लोबल हेल्थ सिक्योरिटी प्रोजेक्ट के तहत राज्य के 19 रामसर साइट्स और अन्य प्रमुख वेटलैंड्स पर प्रवासी पक्षियों में एवियन इन्फ्लूएंजा की सक्रिय निगरानी की जा रही है।
ज़ूनोटिक बीमारियां इंसानों में क्यों बढ़ रही हैं?
ज़ूनोटिक बीमारियां जंगलों के कटाव, जलवायु परिवर्तन और इंसानों व जानवरों के बीच बढ़ते संपर्क की वजह से तेजी से फैल रही हैं।
'वन हेल्थ' मॉडल क्या है और इसके लिए राज्य क्या कर रहा है?
'वन हेल्थ' मॉडल इंसान, जानवर और पर्यावरण की स्वास्थ्य प्रणालियों के बीच सहयोग पर जोर देता है। उत्तर प्रदेश सरकार सरकारी पशु चिकित्सकों के लिए एक राज्य-स्तरीय ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स प्रोग्राम आयोजित करेगी ताकि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और डेटा साझाकरण बढ़े।
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