एंथ्रोपिक के नए AI मॉडल फेबल 5 पर अमेरिका का बैन SK टेलीकॉम के चीन कनेक्शन से जुड़ा
कोरियन टेलीकॉम कंपनी ने व्हाइट हाउस को मजबूर किया कि वह एंथ्रोपिक पर अपने नए AI मॉडल्स की सुरक्षा को लेकर भरोसा न करे बॉडी: एंथ्रोपिक के नए AI मॉडल फेबल 5 पर अमेरिका का बैन SK टेलीकॉम के चीन कनेक्शन
कोरियन टेलीकॉम कंपनी ने व्हाइट हाउस को मजबूर किया कि वह एंथ्रोपिक पर अपने नए AI मॉडल्स की सुरक्षा को लेकर भरोसा न करे
ट्रंप्रशासन ने एंथ्रोपिके लेटेस्ट AI मॉडल फेबल 5 पर सख्त एक्सपोर्ट कंट्रोल लगाने का फैसला किया है। इसकी वजह साउथ कोरियन टेलीकॉम कंपनी SK टेलीकॉम के साथ एंथ्रोपिकी साझेदारी को बताया जा रहा है। वायर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, यह बैन तब लगाया गया जब SK टेलीकॉम को एंथ्रोपिके एडवांस्ड क्लॉड मिथॉस मॉडल तक पहुंच देने को लेकर विवाद हुआ। इससे अमेरिकी सरकार में चिंता बढ़ गई।
अमेरिकी अधिकारियों को SK टेलीकॉम और चीन के कथित संबंधों पर शक हुआ। यह चिंता तब और बढ़ गई जब अमेज़न के CEO एंडी जैसी ने फेबल 5 में संभावित सुरक्षा खामियों की ओर इशारा किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेज़न के रिसर्चर्स ने मॉडल को "जेलब्रेक" कर उसकी सेफ्टी गार्डरेल्स को बायपास कर लिया। इससे नेशनल सिक्योरिटी को लेकर डर पैदा हो गया।
वॉशिंगटन पोस्ट की एक पुरानी रिपोर्ट में भी एक अनाम साउथ कोरियन टेलीकॉम कंपनी को लेकर चिंता जताई गई थी। जवाब में SK टेलीकॉम ने चीन से किसी भी तरह के संबंध होने से इनकार किया और इन आरोपों को बेबुनियाद बताया।
हालांकि एंथ्रोपिक ने SK टेलीकॉम की क्लॉड मिथॉस तक पहुंच और अमेज़न की सुरक्षा चिंताओं को अलग-अलग मुद्दे बताया, लेकिन व्हाइट हाउस ने आखिरकार यह निष्कर्ष निकाला कि कंपनी पर अपने एडवांस AI टेक्नोलॉजी की सुरक्षा का भरोसा नहीं किया जा सकता। सरकार ने मॉडल्स तक पहुंच को सिर्फ अमेरिकी नागरिकों तक सीमित कर दिया। हालांकि, आदेश में चीन या SK टेलीकॉम का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया, लेकिन घटनाओं की कड़ी ने इन पर शक को बढ़ा दिया।
नतीजतन, ट्रंप्रशासन ने एंथ्रोपिको आदेश दिया कि वह मिथॉस और फेबल 5 मॉडल्स तक विदेशी नागरिकों की पहुंच को खत्म करे, चाहे वे अमेरिका में ही क्यों न हों। इस आदेश के चलते एंथ्रोपिको मॉडल्स को पूरी तरह से ऑफलाइन करना पड़ा। इसके बाद कंपनी और व्हाइट हाउस के बीच बातचीत में गतिरोध आ गया।
एंथ्रोपिके प्रोजेक्ट ग्लासविंग में SK टेलीकॉम की भागीदारी विवाद का बड़ा कारण बनी। इस प्रोजेक्ट के तहत क्लॉड मिथॉस तक पहुंच सिर्फ भरोसेमंद संस्थानों को दी गई थी। SK टेलीकॉम को इसमें सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और कोरिया इंटरनेट एंड सिक्योरिटी एजेंसी जैसे बड़े कोरियन संस्थानों के साथ शामिल किया गया था। SK टेलीकॉम ने 2023 में एंथ्रोपिक में $100 मिलियन का निवेश किया था, जिसका मकसद टेलीकॉम-विशेष AI मॉडल्स विकसित करना था।
हालांकि SK टेलीकॉम का चीन में बहुत कम ऑपरेशन है। 2024 में कंपनी ने वहां सिर्फ $1.9 मिलियन का रेवेन्यू कमाया और सिर्फ सात लोग वहां काम करते हैं। लेकिन इसकी पैरेंट कंपनी SK ग्रुप का चीन की एनर्जी और सेमीकंडक्टर सेक्टर में बड़ा निवेश है।
SK टेलीकॉम का चीन से पुराना कनेक्शन भी है। 2004 में इसने चीन की सरकारी कंपनी चाइना यूनिकॉम के साथ UNISK नामक जॉइंट वेंचर शुरू किया था। 2006 में कंपनी ने $1 बिलियन का बॉन्ड इन्वेस्टमेंट भी किया। हालांकि 2009 में SK टेलीकॉम ने UNISK में अपनी ज्यादातर हिस्सेदारी बेच दी, लेकिन 2025 की SEC फाइलिंग के मुताबिक, कंपनी के पास अभी भी इस वेंचर में $17 मिलियन का फाइनेंशियल इंटरेस्ट है।
यह मामला इसलिए और संवेदनशील हो जाता है क्योंकि ट्रंप्रशासन पहले ही चाइना यूनिकॉमें अमेरिकी निवेश पर बैन लगा चुका है। इसकी वजह कंपनी के कथित मिलिट्री कनेक्शन बताए गए थे। इसके अलावा, FCC ने भी अमेरिकी टेलीकॉम कंपनियों को चाइना यूनिकॉम के साथ इंटरकनेक्ट करने पर बैन लगाने का प्रस्ताव दिया है।
यह पूरी स्थिति दिखाती है कि AI सेक्टर में टेक्नोलॉजी, जियोपॉलिटिक्स और नेशनल सिक्योरिटी कैसे आपस में उलझे हुए हैं। एंथ्रोपिका फेबल 5 इन बढ़ते तनावों के केंद्र में है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अमेरिका ने एंथ्रोपिक के किस AI मॉडल पर बैन लगाया है?
अमेरिका ने एंथ्रोपिक के AI मॉडल फेबल 5 पर बैन लगाया है।
SK टेलीकॉम पर अमेरिका को शक क्यों हुआ?
SK टेलीकॉम के चीन कनेक्शन के कारण अमेरिका को शक हुआ।
एंथ्रोपिक ने SK टेलीकॉम के साथ किस प्रोजेक्ट में भागीदारी की है?
एंथ्रोपिक ने प्रोजेक्ट ग्लासविंग में SK टेलीकॉम के साथ भागीदारी की है।
SK टेलीकॉम का चीन में कितना ऑपरेशन है?
SK टेलीकॉम का चीन में बहुत कम ऑपरेशन है, 2024 में वहां सिर्फ $1.9 मिलियन का रेवेन्यू कमाया।
अमेरिकी सरकार ने एंथ्रोपिक को क्या आदेश दिया?
अमेरिकी सरकार ने एंथ्रोपिक को आदेश दिया कि वह मिथॉस और फेबल 5 मॉडल्स तक विदेशी नागरिकों की पहुंच को खत्म करे।
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