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Education General उत्तर प्रदेश

शिक्षक दिवस के बाद प्रदेश के शिक्षकों में निराशा, सरकार की उदासीनता पर बरसे डॉ कुलदीप मलिक

शिक्षक नेता डॉ कुलदीप मलिक का कहना है कि गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भाषण में पुरानी पेंशन बहाली और वित्तविहीन शिक्षकों के समान वेतन पर कोई घोषणा नहीं हुई, और इसका खामियाजा आगामी चुनावों में भुगतना पड़ सकता है।

शिक्षक नेता और शिक्षा पर चर्चा कार्यक्रम के संस्थापक डॉ कुलदीप मलिक की उपलब्ध कराई गई स्टूडियो तस्वीर
डॉ कुलदीप मलिक की उपलब्ध कराई गई स्टूडियो तस्वीर; यह शिक्षक दिवस कार्यक्रम या किसी प्रदर्शन की फोटो नहीं है। · Photo: supplied with the reporter submission

शिक्षक दिवस के अगले दिन प्रदेश भर के शिक्षकों में निराशा और गहरे असंतोष का माहौल है। यह कहना है शिक्षक नेता और 'शिक्षा पर चर्चा' कार्यक्रम के संस्थापक डॉक्टर कुलदीप मलिक का, जिनके मुताबिक साल के जिस एक दिन शिक्षकों की बात होनी थी, उसी दिन प्रदेश सरकार ने शिक्षकों के प्रति उदासीनता दिखाई।

एक सीनियर जर्नलिस्ट को दिए साक्षात्कार में डॉक्टर मलिक ने बताया कि 5 सितंबर को प्रदेश भर के शिक्षकों को सरकार से काफी आशाएं थीं, लेकिन गोरखपुर में शिक्षक दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उद्बोधन के बाद ये सारी आशाएं पूरी तरह खत्म हो गईं।

सम्मान मिला, पर बड़ी मांगों पर चुप्पी

डॉक्टर मलिक ने उसी एक दिन के दो पहलू गिनाए। एक तरफ मुख्यमंत्री ने गोरखपुर के कार्यक्रम में प्रदेश के 81 शिक्षकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित किया। दूसरी तरफ, उनके मुताबिक, उन बड़ी मांगों पर कोई घोषणा नहीं हुई जिन्हें शिक्षक सालों से उठा रहे हैं, प्राइवेट क्षेत्र में काम करने वाले वित्तविहीन शिक्षकों के लिए समान काम के बदले समान वेतन (सम्मानजनक मानदेय) और सरकारी क्षेत्र के शिक्षकों के लिए पुरानी पेंशन की बहाली। इन पर चुप्पी ने शिक्षकों को जबरदस्त तरीके से निराश किया।

गोरखपुर के कार्यक्रम की प्रकाशित खबरें पुरस्कार वाले हिस्से की पुष्टि करती हैं। रामगढ़ताल के पास योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह एवं सांस्कृतिक केंद्र में हुए राज्य स्तरीय समारोह में 76 शिक्षकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार-2025 और स्ववित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों के पांच शिक्षकों को मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार-2025 दिया गया। कुल 81 में 61 बेसिक शिक्षा विभाग से और 20 माध्यमिक शिक्षा से थे, इनमें 33 महिला शिक्षक हैं। हर शिक्षक को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न और 25 हजार रुपये की सम्मान राशि मिली। राज्य पुरस्कार पाने वालों को सेवानिवृत्ति आयु में दो साल की बढ़ोतरी और यूपी रोडवेज की बसों में हर साल चार हजार किलोमीटर तक मुफ्त यात्रा की सुविधा भी मिलेगी।

दोनों मांगें असल में क्या हैं

डॉक्टर मलिक ने जो दो मांगें गिनाईं, वे नई नहीं हैं। वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक मान्यता प्राप्त पदों पर पढ़ाते हैं, लेकिन उनका वेतन सरकारी खजाने से नहीं जाता: इसी वजह से मांग समान काम के बदले समान वेतन की है, और वह न हो तो सम्मानजनक मानदेय की। पुरानी पेंशन की मांग उन शिक्षकों से जुड़ी है जिनकी नियुक्ति अंशदायी पेंशन व्यवस्था लागू होने के बाद हुई। प्रदेश के जिलों में माध्यमिक शिक्षक संगठनों के धरने-प्रदर्शन के मांग पत्रों में ये दोनों बिंदु सालों से शामिल रहे हैं।

चुनावी साल का हिसाब

डॉक्टर मलिक ने इस पूरे मामले को चुनावी नजर से देखा। उन्होंने बताया कि शिक्षक दिवस चुनावी माहौल में मनाया गया, क्योंकि प्रदेश की वर्तमान सरकार अपने पांच साल का कार्यकाल लगभग पूरा करने जा रही है और कुछ महीने बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। इसी वजह से शिक्षकों को सरकार से काफी उम्मीदें थीं, जिन्हें सरकार ने धूमिल कर दिया। उत्तर प्रदेश की 18वीं विधानसभा मार्च 2022 में गठित हुई थी और इसका कार्यकाल 2027 तक है।

मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए डॉक्टर मलिक ने कहा कि एक तरफ पड़ोसी राज्य बिहार के मुख्यमंत्री, जिसे उन्होंने देश का सबसे गरीब राज्य बताया, शिक्षक दिवस पर अपने प्रदेश के शिक्षकों के लिए बड़ी-बड़ी घोषणाएं कर रहे थे, वहीं 'हमारे मुख्यमंत्री' शिक्षकों को बधाई देकर प्रदेश में कानून व्यवस्था पर व्याख्यान दे रहे थे। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उसी दिन पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में 38 शिक्षकों को राजकीय शिक्षक पुरस्कार दिया और शिक्षा से जुड़े कई ऐलान किए, जिनमें शिक्षक प्रशिक्षण विश्वविद्यालय, वित्त रहित शिक्षकों के लिए अलग वेतनमान और शिक्षकों के लिए एआई ट्रेनिंग शामिल हैं। गोरखपुर के भाषण की खबरें बताती हैं कि मुख्यमंत्री ने वहां प्रदेश की प्राचीन ज्ञान परंपरा और उसे आधुनिक व डिजिटल तकनीक से जोड़ने पर बात की।

दो चुनावों को लेकर चेतावनी

एक प्रश्न के जवाब में डॉक्टर मलिक ने सरकार को सलाह देते हुए चेताया कि अगर प्राइवेट क्षेत्र के वित्तविहीन शिक्षकों की समान काम के बदले समान वेतन (सम्मानजनक मानदेय) और सरकारी क्षेत्र के शिक्षकों की पुरानी पेंशन बहाली जैसी मांगें जल्द से जल्द पूरी नहीं की गईं, तो आगामी विधान परिषद और विधानसभा चुनावों में सरकार को भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

विधान परिषद का जिक्र यहां बेवजह नहीं है। उत्तर प्रदेश की विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक सीटों के चुनाव नजदीक हैं, और डॉक्टर मलिक खुद को मेरठ-सहारनपुर मंडल शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी प्रत्याशी बताते रहे हैं। इसके अलावा वे यह मांग भी उठा रहे हैं कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव सिर्फ शिक्षक ही लड़े। उनकी चेतावनी को इसी संदर्भ में पढ़ा जाना चाहिए।

न्यूजदर्पण ने डॉक्टर कुलदीप मलिक के बयान उसी रूप में दिए हैं जैसे उन्होंने साक्षात्कार में कहे। खबर लिखे जाने तक इन आरोपों पर सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, और मुख्यमंत्री के भाषण की विषयवस्तु पर किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि गोरखपुर कार्यक्रम की प्रकाशित खबरों से आगे नहीं की गई है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिक्षक दिवस पर उत्तर प्रदेश में शिक्षकों को निराशा क्यों हुई?

5 सितंबर को गोरखपुर में शिक्षक दिवस समारोह में मुख्यमंत्री ने 81 शिक्षकों को पुरस्कार दिए, लेकिन शिक्षकों की लंबे समय से चली आ रही मांगों पर कोई घोषणा नहीं की। प्राइवेट माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए समान काम के बदले समान वेतन और सरकारी शिक्षकों के लिए पुरानी पेंशन की बहाली जैसी मांगें अधूरी रह गईं।

राज्य अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों को क्या लाभ मिले?

81 पुरस्कृत शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न और 25 हजार रुपये की सम्मान राशि दी गई। राज्य पुरस्कार पाने वालों को सेवानिवृत्ति आयु में 2 साल की बढ़ोतरी और यूपी रोडवेज की बसों में हर साल 4 हजार किलोमीटर तक मुफ्त यात्रा की सुविधा भी मिली।

वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक समान वेतन की मांग क्यों कर रहे हैं?

वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षक मान्यता प्राप्त पदों पर पढ़ाते हैं लेकिन उनका वेतन सरकारी खजाने से नहीं आता। इसलिए शिक्षक समान काम के बदले समान वेतन या सम्मानजनक मानदेय की मांग कर रहे हैं।

पुरानी पेंशन की मांग किन शिक्षकों से जुड़ी है?

यह मांग उन शिक्षकों से जुड़ी है जिनकी नियुक्ति अंशदायी पेंशन व्यवस्था लागू होने के बाद हुई थी। ये शिक्षक पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली चाहते हैं।

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