प्रतापगढ़ के पुलिस अधिकारी का दुर्लभ ब्लड ग्रुप दान से बुजुर्ग महिला की जान बची
प्रतापगढ़ के किशुनगंज चौकी के प्रभारी उप निरीक्षक राजकुमार मिश्रा ने एक बुजुर्ग महिला की जान बचाने के लिए अपना दुर्लभ ए नेगेटिव ब्लड ग्रुप का रक्तदान किया।
प्रतापगढ़ के किशुनगंज चौकी के प्रभारी उप निरीक्षक राजकुमार मिश्रा ने एक बुजुर्ग महिला की जान बचाने के लिए अपना दुर्लभ ए नेगेटिव ब्लड ग्रुप का रक्तदान किया। शहर के गीता हॉस्पिटल में भर्ती 68 वर्षीय सुकन्या देवी को कूल्हे का ऑपरेशन करवाना था लेकिन हीमोग्लोबिन बेहद कम होने के कारण डॉक्टरों ने पहले खून चढ़ाने की सलाह दी थी। जब शहर के किसी भी ब्लड बैंक में ए नेगेटिव ग्रुप का खून नहीं मिला तो रक्तदान संस्थान के अध्यक्ष निर्मल कुमार पांडेय ने राजकुमार मिश्रा से संपर्क किया।
सूचना मिलते ही उप निरीक्षक मिश्रा तुरंत आशा चैरिटेबल ब्लड सेंटर बलीपुर पहुंचे और अपना खून दान किया। उनके इस कदम से मरीज का ऑपरेशन सफलतापूर्वक हो सका और बुजुर्ग महिला की जान बच गई। ब्लड बैंक के संस्थापक अमित सिंह ने राजकुमार मिश्रा को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
रक्तदान संस्थान के अध्यक्ष निर्मल पांडेय ने बताया कि राजकुमार मिश्रा नियमित रूप से रक्तदान करते हैं। जब भी ए नेगेटिव ब्लड की जरूरत होती है वो एक फोन कॉल पर तुरंत ब्लड बैंक पहुंच जाते हैं। इससे पहले भी वो कई बार मरीजों की जान बचाने के लिए अपना दुर्लभ ब्लड ग्रुप दान कर चुके हैं।
इसी दौरान संस्थान के सहयोगियों की मदद से दो अन्य मरीजों को भी खून मुहैया करवाया गया। जिला महिला चिकित्सालय में भर्ती 28 वर्षीय सुमन देवी को सीएमएस डॉ रमेश पांडेय के आदेश पर खून दिया गया जो सात महीने की गर्भवती हैं और जिनका हीमोग्लोबिन बहुत कम था। इसके अलावा जौनपुर के मां शारदा हॉस्पिटल में भर्ती विकास उपाध्याय को भी संस्थान के माध्यम से खून उपलब्ध करवाया गया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रतापगढ़ के उप निरीक्षक राजकुमार मिश्रा ने क्या किया?
राजकुमार मिश्रा ने अपना दुर्लभ ए नेगेटिव ब्लड ग्रुप दान किया। इससे 68 साल की सुकन्या देवी की जान बची। सुकन्या को कूल्हे का ऑपरेशन करवाना था लेकिन हीमोग्लोबिन बहुत कम था, इसलिए पहले खून की जरूरत थी।
ए नेगेटिव ब्लड ग्रुप इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
ए नेगेटिव ब्लड ग्रुप बहुत दुर्लभ है। इस मामले में शहर के किसी भी ब्लड बैंक में यह ग्रुप उपलब्ध नहीं था। इसलिए रक्तदान संस्थान के अध्यक्ष को राजकुमार मिश्रा से संपर्क करना पड़ा।
राजकुमार मिश्रा को सम्मानित कैसे किया गया?
आशा चैरिटेबल ब्लड सेंटर बलीपुर के संस्थापक अमित सिंह ने राजकुमार मिश्रा को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
इस घटना में कितने मरीजों को खून मिला?
कुल तीन मरीजों को खून मिला। पहली थीं 68 साल की सुकन्या देवी, दूसरी थीं 28 साल की गर्भवती सुमन देवी जो जिला महिला चिकित्सालय में थीं, और तीसरा था जौनपुर के मां शारदा हॉस्पिटल में भर्ती विकास उपाध्याय।
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