पुस्तकालय आंदोलन के जनक अय्यंकी वेंकट रमणैया को श्रद्धांजलि
पुस्तकालय आंदोलन के जनक अय्यंकी वेंकट रमणैया को श्रद्धांजलि पद्मश्री से सम्मानित और भारत में पुस्तकालय आंदोलन के जनक अय्यंकी वेंकट रमणैया की 136वीं जयंती पर उन्हें याद किया गया।
पद्मश्री से सम्मानित और भारत में पुस्तकालय आंदोलन के जनक अय्यंकी वेंकट रमणैया की 136वीं जयंती पर उन्हें याद किया गया। यह कार्यक्रम बंदर रोड स्थित टैगोर लाइब्रेरी में आयोजित हुआ। उनके पोते अय्यंकी मुरली कृष्णा ने उन्हें एक दूरदर्शी व्यक्तित्व बताया, जिन्होंने कहा था, "सार्वजनिक पुस्तकालय ज्ञान के मंदिर हैं।" इस कार्यक्रम का आयोजन लाइब्रेरियन रामादेवी ने किया, जिसमें रमणैया के जीवनभर के प्रयासों पर चर्चा हुई कि कैसे उन्होंने समाज को ऊपर उठाने के लिए पुस्तकालयों को एक साधन बनाया।
समाज में बदलाव के इंजन के रूप में पुस्तकालय
कार्यक्रम में वक्ताओं ने रमणैया की इस सोच पर जोर दिया कि पुस्तकालय अशिक्षा, अज्ञानता और पिछड़ी सोच से लड़ने का एक सशक्त माध्यम हैं। 'नवमल्लेथीगा' के संपादक कलिमिश्री ने कहा कि रमणैया के प्रयासों ने एक बड़े पुस्तकालय आंदोलन की नींव रखी, जिसका लाभ आज भी समाज को मिल रहा है। इस मौके पर पदाला नीला रमेश गौतम द्वारा लिखित निबंध और कविताओं का संग्रह मनिषि कोसम भी जारी किया गया।
ज्ञान की विरासत
रामादेवी ने बताया कि रमणैया की सोच से स्थापित पुस्तकालय आज भी पढ़ाई, सीखने और करियर विकास के लिए खासकर युवाओं के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बने हुए हैं। कार्यक्रम में छात्रों को मिठाई बांटी गई और साहित्य में योगदान के लिए गौतम को सम्मानित किया गया।
अय्यंकी वेंकट रमणैया की विरासत यह याद दिलाती है कि ज्ञान की ताकत समाज को बदलने में कितनी अहम भूमिका निभा सकती है।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अय्यंकी वेंकट रमणैया कौन थे?
अय्यंकी वेंकट रमणैया भारत में पुस्तकालय आंदोलन के जनक थे और उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
उनकी 136वीं जयंती पर कौन सा कार्यक्रम आयोजित हुआ?
उनकी 136वीं जयंती पर बंदर रोड स्थित टैगोर लाइब्रेरी में एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में किसने रमणैया के विचारों पर चर्चा की?
कार्यक्रम में लाइब्रेरियन रामादेवी ने रमणैया के जीवनभर के प्रयासों और उनके विचारों पर चर्चा की।
पुस्तकालयों का समाज में क्या महत्व है?
पुस्तकालय अशिक्षा, अज्ञानता और पिछड़ी सोच से लड़ने का एक सशक्त माध्यम हैं और समाज को ऊपर उठाने में मदद करते हैं।
कार्यक्रम में क्या विशेष गतिविधियाँ हुईं?
कार्यक्रम में छात्रों को मिठाई बांटी गई और साहित्य में योगदान के लिए गौतम को सम्मानित किया गया।
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