त्रिबेनी राय की फिल्म 'शेप ऑफ मोमो' में नॉर्थईस्ट की पहचान का जश्न
"अपनापन एक लगातार चलने वाली बातचीत है": त्रिबेनी राय की 'शेप ऑफ मोमो' में नॉर्थईस्ट की पहचान और प्यार में इमोशनल लेबर की कहानी त्रिबेनी राय की पहली फीचर फिल्म शेप ऑफ मोमो में हिमालय और नेपाली
त्रिबेनी राय की पहली फीचर फिल्म शेप ऑफ मोमो में हिमालय और नेपाली इलाकों का पसंदीदा खाना मोमो को एक सादे और प्रतीकात्मक केंद्र के तौर पर इस्तेमाल किया गया है। फिल्म नॉर्थईस्ट की पहचान, महिलाओं के सशक्तिकरण और रिश्तों में इमोशनल लेबर जैसे मुद्दों को दिखाती है। 114 मिनट की नेपाली भाषा में बनी ये फिल्म हाल ही में सिनेमाघरों में रिलीज हुई। इससे पहले ये कई फेस्टिवल्स में दिखाई गई, जहां इसे खूब सराहा गया। इसे बुसान, सैन सेबेस्टियन और सिएटल जैसे बड़े इवेंट्स में तारीफें मिलीं और सॉन्गवॉन विजन अवॉर्ड भी जीता।
एक इंटरव्यू में राय ने बताया कि इस फिल्म का आइडिया उन्हें सिक्किम की पहाड़ियों में बड़े होते हुए महिलाओं को देखकर आया। उन्होंने अपनी भाषा, संस्कृति और घर से जुड़ी कहानी बताने की कोशिश की। फिल्म का नाम शेप ऑफ मोमो भी खास मायने रखता है। मोमो उनके इलाके में सबका पसंदीदा खाना है, लेकिन इसकी शेप उसे बनाने वाले हाथों पर निर्भर करती है। ये एक प्रतीक है कि कैसे परिवार, परंपरा, जेंडर रोल्स और समाज की उम्मीदें हमारी पहचान को आकार देती हैं।
फिल्म ने अलग-अलग सांस्कृतिक बैकग्राउंड के दर्शकों के दिल को छुआ। इसने परिवार और अनजान संस्कृतियों पर सोचने पर मजबूर किया। राय ने बताया कि खाना, खासकर महिलाओं से जुड़ा हुआ, एक ऐसा प्रतीक है जो कई संस्कृतियों में समान है। उन्होंने पंजाबी घरों में रोटी की गोलाई का उदाहरण दिया। राय ने ये भी बताया कि पुरुषों की कहानियां अक्सर 'यूनिवर्सल' मानी जाती हैं, जबकि महिलाओं की कहानियां अलग कैटेगरी में रख दी जाती हैं, भले ही महिलाएं अपने निजी सपनों और समाज की उम्मीदों के बीच ज्यादा इमोशनल लेबर करती हैं।
राय के लिए अपनापन कोई स्थायी स्थिति नहीं है, बल्कि ये अतीत और भविष्य के बीच लगातार चलने वाली बातचीत है। उन्होंने इस थीम को अपनी कहानी में बारीकी से बुना है। उनकी फिल्म नॉर्थईस्ट समाज से जुड़े स्टीरियोटाइप्स को चुनौती देती है और इमोशनल जुड़ाव और साझा अनुभवों के जरिए सांस्कृतिक फासलों को कम करती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
फिल्म 'शेप ऑफ मोमो' किस विषय पर है?
यह फिल्म नॉर्थईस्ट की पहचान, महिलाओं के सशक्तिकरण और रिश्तों में इमोशनल लेबर की कहानी को दिखाती है।
फिल्म 'शेप ऑफ मोमो' का नाम क्यों रखा गया है?
फिल्म का नाम मोमो पर रखा गया है, जो उनके इलाके में सबका पसंदीदा खाना है, और इसकी शेप बनाने वाले हाथों पर निर्भर करती है।
त्रिबेनी राय ने इस फिल्म का आइडिया कैसे पाया?
राय को यह आइडिया सिक्किम की पहाड़ियों में महिलाओं को देखकर आया।
फिल्म 'शेप ऑफ मोमो' कब रिलीज हुई?
यह फिल्म हाल ही में सिनेमाघरों में रिलीज हुई है।
फिल्म को किन फेस्टिवल्स में सराहा गया है?
फिल्म को बुसान, सैन सेबेस्टियन और सिएटल जैसे बड़े फेस्टिवल्स में सराहना मिली है।
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