बक्सा टाइगर रिजर्व में 2 अक्टूबर को बाघिन छोड़ी जाएगी
बाघ फिर लौटेंगे बक्सा टाइगर रिजर्व में 2 अक्टूबर को उत्तर बंगाल में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए, पश्चिम बंगाल सरकार 2 अक्टूबर 2025 को बक्सा टाइगर रिजर्व में एक बाघिन को
उत्तर बंगाल में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए, पश्चिम बंगाल सरकार 2 अक्टूबर 2025 को बक्सा टाइगर रिजर्व में एक बाघिन को छोड़ेगी। राज्य के पर्यावरण और वन मंत्री मनोज ओरांव ने शुक्रवार को कोलकाता में एक इवेंट के दौरान यह जानकारी दी। बक्सा, जो भूटान के पास डुआर्स इलाके में 760.87 वर्ग किलोमीटर में फैला है, 1983 में भारत का 15वां टाइगर रिजर्व बना था। लेकिन हाल के सालों में यहां बाघों की संख्या में भारी गिरावट आई है।
क्यों चुना गया बक्सा?
बक्सा टाइगर रिजर्व जैव विविधता का हॉटस्पॉट है। यहां 68 स्तनधारी प्रजातियां, 41 सरीसृप प्रजातियां और 246 से ज्यादा पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं। इसके बावजूद, बाघों की मौजूदगी काफी कम हो गई है। इसे देखते हुए बाघों को उनके पुराने ठिकाने पर वापस लाने की कोशिश की जा रही है। यह प्रोजेक्ट नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) के प्रोटोकॉल के तहत किया जा रहा है, जो उन इलाकों में बाघों की संख्या बढ़ाने पर जोर देता है, जहां वे खत्म हो चुके हैं।
पिछली सफलताओं से सीख
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने राजस्थान के सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघों को फिर से बसाने की सफलता का जिक्र किया। वहां 2008 में जहां बाघों की संख्या शून्य थी, अब यह 56 हो गई है। अब ऐसी ही रणनीति बंगाल के लिए अपनाई जा रही है, जिसे "रॉयल बंगाल टाइगर की धरती" कहा जाता है। बंगाल के सुंदरबन में बाघों की संख्या करीब 100 पर स्थिर है। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि सुंदरबन के मैंग्रोव इलाके के बाघ बक्सा के जंगलों में खुद को आसानी से ढाल नहीं पाएंगे। इसलिए बक्सा के लिए बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से बाघिन लाए जाने की संभावना है, क्योंकि वहां का इलाका बक्सा से मिलता-जुलता है।
चुनौतियां भी कम नहीं
हालांकि कई रिजर्व में बाघों को फिर से बसाने में सफलता मिली है, लेकिन चुनौतियां भी हैं। ओडिशा के सतकोसिया टाइगर रिजर्व में बाघों को बसाने की नाकाम कोशिश एक सबक है। विशेषज्ञों को बक्सा में बाघिन के नए माहौल में ढलने पर नजर रखनी होगी। साथ ही, शिकार की पर्याप्त उपलब्धता और शिकारियों से सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।
संरक्षण की ओर एक कदम
2 अक्टूबर को बाघिन को बक्सा में छोड़ना बंगाल में बाघों की संख्या बढ़ाने और जैव विविधता को संरक्षित करने की दिशा में एक अहम कदम है। पश्चिम बंगाल सरकार और NTCA के संयुक्त प्रयासों से अधिकारी उम्मीद कर रहे हैं कि अन्य रिजर्व की सफलता को यहां भी दोहराया जा सकेगा और बक्सा में बाघों को उनके पुराने घर में वापस लाया जा सकेगा।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघिन कब छोड़ी जाएगी?
बाघिन को 2 अक्टूबर 2025 को बक्सा टाइगर रिजर्व में छोड़ा जाएगा। यह पश्चिम बंगाल सरकार का उत्तर बंगाल में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम है।
बक्सा टाइगर रिजर्व क्यों चुना गया?
बक्सा जैव विविधता का हॉटस्पॉट है जहां 68 स्तनधारी, 41 सरीसृप और 246 से ज्यादा पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं। लेकिन हाल के सालों में यहां बाघों की संख्या में भारी गिरावट आई है, इसलिए उन्हें वापस लाया जा रहा है।
क्या ऐसी कोशिशें पहले सफल हुई हैं?
हां, राजस्थान के सरिस्का टाइगर रिजर्व में यह प्रोजेक्ट बहुत सफल रहा। वहां 2008 में बाघों की संख्या शून्य थी, जो अब 56 हो गई है। इसी मॉडल को अब बंगाल में अपनाया जा रहा है।
बाघिन को बक्सा के माहौल में ढलने में क्या मुश्किलें हो सकती हैं?
मुख्य चुनौतियों में नए माहौल में ढलना, शिकार की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना और शिकारियों से सुरक्षा देना शामिल है। ओडिशा के सतकोसिया रिजर्व में ऐसी कोशिश असफल हुई थी।
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