उत्तर प्रदेश में सरकारी जमीन के फर्जी पट्टे का विवाद गहराया
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की रानीगंज तहसील एक बार फिर जमीनों के कथित फर्जीवाड़े को लेकर चर्चा में आ गई है।
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की रानीगंज तहसील एक बार फिर जमीनों के कथित फर्जीवाड़े को लेकर चर्चा में आ गई है। तहसील क्षेत्र के दमदम गांव में ग्राम सभा की ऊसर भूमि में कथित तौर पर पत्रावलियों में हेराफेरी करके सैकड़ों बीघा जमीन का अवैध रूप से पट्टा आवंटित किए जाने का मामला सामने आया है।
आरोप लगाया गया है कि तहसील कर्मचारियों की मिलीभगत से गांव की सरकारी जमीन दूसरे जिलों के रहने वाले लोगों के नाम आवंटित कर दी गई। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी भूमि के आवंटन से जुड़ी पत्रावलियों में हेराफेरी करके नियमों को दरकिनार किया गया।
ग्रामीणों की शिकायत के बाद जब मामले की जांच हुई तो गांव की करीब 68 बीघा जमीन के पट्टे निरस्त कर उसे ग्राम सभा के खाते में दर्ज किए जाने का आदेश दिया गया। लेकिन इसके बावजूद आरोप है कि तहसील कर्मचारियों की मनमानी के चलते आदेश के लंबे समय बाद भी उक्त जमीन ग्राम सभा के खाते में दर्ज नहीं की गई है।
कथित फर्जी आवंटन के जरिए ग्राम सभा की जमीन बाहरी लोगों के नाम किए जाने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि जब सक्षम अधिकारी द्वारा 68 बीघा जमीन का पट्टा निरस्त करके उसे ग्राम सभा के खाते में दर्ज करने का आदेश दिया जा चुका है, तो फिर राजस्व अभिलेखों में अमल क्यों नहीं किया गया।
इस पूरे मामले ने रानीगंज तहसील की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कथित फर्जी पट्टों की पत्रावलियों की जांच करने और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि पट्टा निरस्त होने के बावजूद 68 बीघा ग्राम सभा की जमीन आखिर किसके नाम दर्ज है और उसे ग्राम सभा के खाते में दर्ज करने में देरी आखिर क्यों हो रही है। प्रतापगढ़ जिले के इस संवेदनशील मामले में प्रशासनिक स्तर पर होने वाली कार्रवाई पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में क्या विवाद सामने आया है?
रानीगंज तहसील के दमदम गांव में सरकारी ऊसर भूमि के सैकड़ों बीघा जमीन का फर्जी पट्टा आवंटित किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि तहसील कर्मचारियों की मिलीभगत से पत्रावलियों में हेराफेरी करके गांव की सरकारी जमीन दूसरे जिलों के रहने वाले लोगों के नाम कर दी गई।
जांच के बाद क्या आदेश दिया गया?
ग्रामीणों की शिकायत के बाद जांच में पाया गया कि करीब 68 बीघा जमीन के पट्टे गलत हैं। इसलिए सक्षम अधिकारी ने इन पट्टों को निरस्त करके जमीन को ग्राम सभा के खाते में दर्ज करने का आदेश दिया।
ग्रामीण अभी भी नाराज क्यों हैं?
भले ही 68 बीघा जमीन का पट्टा निरस्त करने का आदेश दे दिया गया, लेकिन तहसील कर्मचारियों की मनमानी के कारण आज तक यह जमीन ग्राम सभा के खाते में दर्ज नहीं की गई है। ग्रामीणों को लगता है कि राजस्व अभिलेखों में इस आदेश पर अमल नहीं किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने क्या मांग की है?
ग्रामीणों ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने, फर्जी पट्टों की पत्रावलियों की जांच करने और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों तथा कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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