तमिलनाडु के दो पुलिसकर्मी खेती की जमीन पर चला रहे मुफ्त अकादमी
तमिलनाडु के काप्पूर में दो पुलिस भाई ग्रामीण युवाओं को सरकारी नौकरी की मुफ्त कोचिंग, फिजिकल ट्रेनिंग और हॉस्टल की सुविधा दे रहे हैं।
परिवार की खेती की जमीन पर भाई ग्रामीण युवाओं के सरकारी नौकरी के सपनों को सींच रहे हैं
परिवार की खेती की जमीन पर भाई ग्रामीण युवाओं के सरकारी नौकरी के सपनों को सींच रहे हैं
तमिलनाडु के काप्पूर में पुधिया सिरुगल नाम की जगह पर 60 से ज्यादा छात्र परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। यहां तमिलनाडु पुलिस में काम करने वाले दो भाई सरकारी नौकरी पाने की तैयारी कर रहे ग्रामीण युवाओं के लिए मुफ्त अकादमी चलाते हैं।
इस अकादमी की शुरुआत हेड कॉन्स्टेबल आर.जे. थोल्काप्पियन सिवराज और कॉन्स्टेबल आर.जे. सत्यराज ने की है। यहां छात्रों से कोई फीस लिए बिना पढ़ाई की कोचिंग, फिजिकल ट्रेनिंग और रहने की सुविधा दी जाती है।
जो जमीन कभी एक किसान परिवार की रोजी-रोटी का साधन थी, वही अब ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले युवाओं के लिए ट्रेनिंग सेंटर बन गई है।
खेती की जमीन से मुफ्त अकादमी तक
पुधिया सिरुगल की शुरुआत 2015 में विलुपुरम जिले के एक गांव काप्पूर में हुई थी। इसके लिए सिवराज के पिता ने परिवार की दो एकड़ खेती की जमीन उपलब्ध कराने पर सहमति दी थी।
यह भी बताया जाता है कि अकादमी काप्पूर में ढाई एकड़ जमीन पर चलती है।
बाद में सिवराज के भाई और बहन ने भी अकादमी में पढ़ाने और ट्रेनिंग देने में योगदान दिया।
सिवराज के मुताबिक, इस अकादमी को आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले ग्रामीण युवाओं को सरकारी नौकरी पाने में मदद करने के लिए बनाया गया था।
यहां पढ़ाई की कोचिंग, फिजिकल ट्रेनिंग और रहने की सुविधा मुफ्त दी जाती है। इससे पढ़ाई की फीस और रहने के खर्च, दोनों का बोझ कम होता है। यही खर्च कई उम्मीदवारों को अपनी तैयारी जारी रखने से रोक सकता है।
कैंपस में लाइब्रेरी, जिम और रस्सी पर चढ़ने की सुविधा है। इनका इस्तेमाल वे छात्र करते हैं, जो पुलिस की नौकरी के लिए ताकत, स्टैमिना और फुर्ती बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं।
लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग हॉस्टल भी हैं।
अपने अनुभव से बनी पहल
सिवराज की पोस्टिंग तिरुकोयिलूर में है, जबकि सत्यराज उलुंदुरपेट में सेवा दे रहे हैं।
सिवराज ने अर्थशास्त्र में एम.फिल किया है और सत्यराज फिजिक्स में पोस्टग्रेजुएट हैं।
दोनों भाई पुलिस फोर्स में अपने अनुभव और अपनी पढ़ाई का इस्तेमाल करते हुए खुद ही क्लास में पढ़ाते हैं और फिजिकल ट्रेनिंग भी देते हैं।
पुधिया सिरुगल की शुरुआत सिवराज के अपने उस अनुभव से हुई, जब उन्होंने बिना पैसे वाली कोचिंग के प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की थी।
“मुझे बचपन से ही पुलिस फोर्स अच्छी लगती थी और मैं बड़ा होते हुए यह सपना देखता था कि एक दिन खाकी वर्दी पहनूंगा,” वह कहते हैं।
चेन्नई के रामकृष्ण मिशन विवेकानंद कॉलेज में मास्टर डिग्री की पढ़ाई करते समय सिवराज अपने कोर्स के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी करते थे।
आखिरकार वह पुलिस फोर्स में शामिल हो गए।
2009 में पुदुकोट्टई जिले में अपनी शुरुआती पुलिस ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्हें 2010 में चेन्नई भेजा गया।
पुलिस की ड्यूटी के साथ-साथ सिवराज और उनके दोस्त लोगनाथन ने ₹10,000 के छोटे निवेश से पेरियार अकादमी शुरू की।
यह अकादमी सरकारी भर्ती परीक्षाओं की तैयारी कराने वाली थी। खास तौर पर तमिलनाडु यूनिफॉर्म्ड सर्विसेज रिक्रूटमेंट बोर्ड की ओर से कराई जाने वाली परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती थी।
सिवराज के मुताबिक, पहले बैच के सभी 33 छात्रों ने अपनी परीक्षाएं पास कर लीं।
इस नतीजे से उन्हें यह पहल अपने पैतृक गांव काप्पूर और विलुपुरम जिले तक ले जाने की प्रेरणा मिली।
लिखित परीक्षा और फिजिकल टेस्ट की तैयारी
दोनों भाइयों का तैयारी कार्यक्रम लिखित परीक्षाओं के साथ-साथ कुछ भर्ती प्रक्रियाओं में जरूरी फिजिकल टेस्ट पर भी ध्यान देता है।
छात्र अलग-अलग विषयों की क्लास और टेस्ट देते हैं। इसके अलावा वे जिम, रस्सी पर चढ़ने की सुविधा और रनिंग ट्रैक का भी इस्तेमाल करते हैं।
अकादमी का यह पूरा कार्यक्रम प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को फिजिकल फिटनेस, मॉक टेस्ट और अतिरिक्त स्किल ट्रेनिंग के साथ जोड़ता है।
उम्मीदवार मोहना अरुमुगम ने बताया कि छात्रों को अलग-अलग तरह के सवालों और समझ के अलग-अलग स्तर के हिसाब से शॉर्टकट सिखाए जाते हैं। इसका मकसद परीक्षा के दौरान उनका समय बचाने में मदद करना है।
दोनों भाइयों ने कमांडो ट्रेनिंग पूरी की है। जब वे फिजिकल ट्रेनिंग सेशन लेते हैं, तो यह ट्रेनिंग उनके काफी काम आती है।
सत्यराज पढ़ाने और फिजिकल ट्रेनिंग, दोनों कामों में सिवराज की मदद करते हैं।
दोनों मिलकर छात्रों को सरकारी भर्ती की तैयारी कराते हैं, ताकि कोचिंग और रहने का खर्च उनके परिवारों पर बोझ न बने।
अभी 60 तक उम्मीदवार अकादमी में रह रहे हैं।
सैकड़ों लोगों को मिली सरकारी नौकरी
काप्पूर में ट्रेनिंग लेने वाले करीब 750-800 उम्मीदवार अब तक पुलिस, रेवेन्यू और दूसरे विभागों में नौकरी पा चुके हैं।
ये आंकड़े दिखाते हैं कि अकादमी क्लास में होने वाली तैयारी के साथ-साथ फिजिकल ट्रेनिंग पर भी ध्यान देती है। कुछ सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं के लिए जरूरी शारीरिक तैयारी को भी यहां कार्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है।
अकादमी की सुविधाओं की वजह से छात्र कैंपस में रहते हुए अपनी तैयारी जारी रख सकते हैं।
मुफ्त रहने की सुविधा उन उम्मीदवारों के लिए खास तौर पर मददगार है, जिनके परिवार कोचिंग और रहने, दोनों का खर्च उठाने में परेशानी हो सकती है।
सिवराज ने बताया कि उन्हें ऐसे लोगों की ओर से ऑफर मिले थे, जो इस उपजाऊ जमीन को खेती या मुर्गी पालन के लिए लीज पर लेना चाहते थे।
जमीन लीज पर देने से उन्हें तय आमदनी मिल सकती थी, लेकिन उन्होंने इन ऑफर को ठुकरा दिया, ताकि यह जमीन अकादमी के लिए उपलब्ध रहे।
इस फैसले की वजह से परिवार की जमीन किसी दूसरे कारोबारी इस्तेमाल के बजाय युवा उम्मीदवारों की ट्रेनिंग के लिए बनी रही।
काप्पूर में 60 से ज्यादा छात्र परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। सिवराज को उम्मीद है कि वह और ज्यादा ग्रामीण युवाओं को सरकारी सेवा में जाने में मदद कर पाएंगे।
हालांकि, दोनों भाइयों के लिए इस अकादमी का मकसद सिर्फ उम्मीदवारों को परीक्षाएं पास कराने तक सीमित नहीं है।
वे यह भी चाहते हैं कि सरकारी सेवा में जाने वाले लोग अपने अंदर जिम्मेदारी का भाव पैदा करें।
सत्यराज कहते हैं, “हमारा मकसद सरकारी सेवा में जाने वाले लोगों के अंदर नैतिक मूल्यों और जिम्मेदारी की भावना पैदा करना है।”
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
तमिलनाडु में मुफ्त अकादमी कौन चला रहा है?
हेड कॉन्स्टेबल आर.जे. थोल्काप्पियन सिवराज और कॉन्स्टेबल आर.जे. सत्यराज मुफ्त अकादमी चला रहे हैं।
यह मुफ्त अकादमी कहां शुरू की गई है?
यह अकादमी तमिलनाडु के विलुपुरम जिले के काप्पूर गांव में शुरू की गई है।
अकादमी में छात्रों को कौन-कौन सी सुविधाएं मुफ्त मिलती हैं?
छात्रों को पढ़ाई की कोचिंग, फिजिकल ट्रेनिंग और रहने की सुविधा मुफ्त मिलती है। कैंपस में लाइब्रेरी, जिम और रस्सी पर चढ़ने की सुविधा भी है।
अकादमी शुरू करने का मकसद क्या है?
इसका मकसद आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के ग्रामीण युवाओं को सरकारी नौकरी की तैयारी में मदद करना है।
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