तमिलनाडु सरकार ने सातवें वित्त आयोग का कार्यकाल बढ़ाया
तमिलनाडु सरकार ने सातवें राज्य वित्त आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर तक बढ़ाया तमिलनाडु सरकार ने सातवें राज्य वित्त आयोग का कार्यकाल चार महीने बढ़ा दिया है।
तमिलनाडु सरकार ने सातवें राज्य वित्त आयोग का कार्यकाल चार महीने बढ़ा दिया है। अब इसका कार्यकाल 31 अगस्त 2026 से बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 तक कर दिया गया है। इस फैसले से आयोग को राज्य के स्थानीय निकायों के लिए वित्तीय आवंटन का आकलन और सिफारिशें पूरी करने के लिए और समय मिल जाएगा।
स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति पर फोकस
सातवें राज्य वित्त आयोग की स्थापना मई 2025 में हुई थी। इसका नेतृत्व रिटायर्ड आईएएस अधिकारी के. अलाउद्दीन कर रहे हैं। आयोग का मुख्य काम ग्राम पंचायत, पंचायत यूनियन काउंसिल, जिला पंचायत, टाउन पंचायत, नगर पालिका और नगर निगमों की वित्तीय स्थिति का आकलन करना है। इसके आधार पर आयोग राज्य सरकार को इन स्थानीय निकायों के लिए फंड के वितरण पर सलाह देगा।
पहले आयोग को अपनी रिपोर्ट 31 अगस्त 2026 तक सौंपनी थी, जो 1 अप्रैल 2027 से शुरू होने वाली वित्तीय अवधि को कवर करती। लेकिन अब कार्यकाल बढ़ने के बाद आयोग को अपनी सिफारिशें अंतिम रूप देने के लिए दिसंबर 2026 तक का समय मिल गया है।
कार्यकाल बढ़ाने का महत्व
इस विस्तार से आयोग को तमिलनाडु के स्थानीय निकायों की वित्तीय जरूरतों और चुनौतियों का गहराई से विश्लेषण करने का मौका मिलेगा। स्थानीय निकायों की भूमिका जमीनी स्तर पर सेवाएं देने में अहम होती है, ऐसे में आयोग की सिफारिशें अगले पांच साल की वित्तीय योजना और संसाधनों के वितरण पर बड़ा असर डाल सकती हैं।
यह कदम राज्य सरकार की इस बात को दिखाता है कि वह वित्तीय वितरण को संतुलित और बेहतर तरीके से सुनिश्चित करने के लिए गंभीर है, ताकि शहरी और ग्रामीण इलाकों में समान विकास हो सके।
स्रोत: The Hindu
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