बहराइच में भागवत कथा के सातवें दिन समझाया ज्ञान, कर्म और भक्त योग
बहराइच शहर में रेलवे स्टेशन के पास स्थित श्री श्याम बाबा मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सप्तम दिवस पर भगवान को पाने के तीन मुख्य साधन बताए गए।
बहराइच शहर में रेलवे स्टेशन के पास स्थित श्री श्याम बाबा मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सप्तम दिवस पर भगवान को पाने के तीन मुख्य साधन बताए गए। कथा में आत्म नन्द सरस्वती जी महाराज ने ज्ञान योग, कर्म योग और भक्त योग के बारे में विस्तार से बताया।
स्वामी जी ने कहा कि जो व्यक्ति कर्म की आसक्ति का पूरी तरह त्याग कर चुका हो, कर्मफल से दूर हो और वैरागी हो, वह ज्ञान योग का अधिकारी होता है। उन्होंने बताया कि सकाम यज्ञ और पूजा में जिसकी आसक्ति होती है, वह कर्म योग का अधिकारी माना जाता है।
उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति को अभी पूरी तरह वैराग्य नहीं हुआ है और संसार के भोगों में थोड़ा-बहुत मन लगा हुआ है, लेकिन भगवान की कथा सुनने, पूजा करने और तीर्थ में श्रद्धा है, वह भक्त योग का अधिकारी होता है। स्वामी जी ने भक्त योग के महत्व को बताते हुए कहा कि भगवान की भक्ति से लोक और परलोक, दोनों बन जाते हैं।
कथा में यह भी बताया गया कि कलयुग में भगवान का नाम जपना और कथा सुनना ही भगवान को पाने का सरल साधन है। स्वामी जी ने कहा कि ज्ञानी भक्त भगवान को सबसे प्रिय होते हैं और भगवान कृष्ण जिसे अपना सखा मानते हैं, वह सुदामा हैं।
उन्होंने बताया कि जो ब्रह्मज्ञानी, विरक्त, जितेन्द्रिय और आत्माराम में रमण करने वाला हो, उसे सुदामा कहते हैं। स्वामी जी ने कहा कि अभी तक सुदामा जैसा महाभागवत कोई नहीं हुआ।
कथा के दौरान सुदामा की कथा और झांकी देखकर सभी श्रद्धालु झूम पड़े। स्वामी जी ने कहा कि पितृ पक्ष में भागवत कथा पितरों के लिए सर्वश्रेष्ठ साधन है।
इस अवसर पर स्वामी आत्म प्रकाश जन कल्याण समिति के अध्यक्ष सुमित विनीत टेकरीवाल, लाल जी शर्मा, शिव मंगल मिश्रा, पंकज श्रीवास्तव, गोपाल पाठक और तुषार रस्तोगी सहित हजारों की संख्या में भक्तगण उपस्थित रहे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बहराइच में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन कहां हुआ?
कथा रेलवे स्टेशन के पास स्थित श्री श्याम बाबा मंदिर में हुई।
भगवान को पाने के कौन-कौन से साधन बताए गए?
ज्ञान योग, कर्म योग और भक्त योग को भगवान को पाने के तीन मुख्य साधन बताया गया।
कलयुग में भगवान को पाने का सरल साधन क्या बताया गया?
कलयुग में भगवान का नाम जपना और कथा सुनना सबसे सरल साधन बताया गया।
भगवान कृष्ण किसे अपना सखा मानते हैं?
भगवान कृष्ण सुदामा को अपना सखा मानते हैं।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने क्या देखा?
श्रद्धालुओं ने सुदामा की कथा और झांकी देखी, जिसे देखकर वे झूम उठे।
सबसे ज़्यादा पढ़ी गई
- 1
श्रावस्ती में सपा बैठक में हंगामा, नेता का माइक छीनने का आरोप
- 2
शामली में 50 से ज्यादा दुकानों के नाम कथित फर्जी बिल, लाखों भुगतान
- 3
शामली महिला का रिश्तेदारों पर 15 लाख के जेवर ले जाने का आरोप
- 4
गन्ने की फसल नुकसान और मारपीट के आरोप, डीएम से जांच की मांग
- 5
हाथरस में आयुष्मान संविदा कर्मियों ने सौंपा ज्ञापन, 22 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार की …
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहली टिप्पणी करें।