बहराइच में स्वामी आत्मानन्द बोले, स्वार्थरहित प्रेम जीवन का अमूल्य रत्न
स्वार्थ रहित प्रेम जीवन का अमूल्य रत्न, आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज बहराइच शहर में रेलवे स्टेशन स्थित श्री श्याम बाबा मंदिर में आयोजित श्री मद भागवत कथा के छठवें दिन मुम्बई महाराष्ट्र से पधारे
स्वार्थ रहित प्रेम जीवन का अमूल्य रत्न, आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज
बहराइच शहर में रेलवे स्टेशन स्थित श्री श्याम बाबा मंदिर में आयोजित श्री मद भागवत कथा के छठवें दिन मुम्बई महाराष्ट्र से पधारे स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने स्वार्थ रहित प्रेम को जीवन का अमूल्य रत्न बताया। उन्होंने कहा कि परमात्मा से प्रेम पाने का साधन सत्संग है। सत्संग से भक्ति मजबूत होती है और भक्त को ज्ञान तथा वैराग्य, दोनों की प्राप्ति होती है।
स्वामी जी महाराज ने कहा कि कलयुग में भक्ति का साधन नाम जप और सत्संग है। भगवान का नाम ही भगवान को पाने का सच्चा स्वरूप है। उन्होंने कहा कि गुरु द्वारा लिया हुआ नाम भाव सागर से पार होने की नाविका है। भक्ति के ऊपर वासन के विकार का वश नहीं चलता। परमात्मा भक्ति के अधीन होते है।
कथा के दौरान उन्होंने कहा,
राम भक्त निरुपम निर्मउपाधि। वसईये जासु उर सदा अबाधि। तेहि बिलोकि माया सकुचाई। कई ना सकई कछु निज प्रभुताई।।
महाराज श्री ने कहा कि पितृ पक्ष में भागवत श्रवण करने से पित्रों का उद्धार हो जाता है। उन्होंने रस रूप आत्म का महारस रूप परमात्मा से सगुण मिलन होने को महारास बताया। कथा में भगवान द्वारिकाधीश और माता रुक्मणी के विवाह का विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया।
महारास और भगवान द्वारिकाधीश तथा माता रुक्मणी की सुंदर झांकी के साथ मीठे-मीठे भजनों की प्रस्तुति हुई। भजनों को सुनकर श्रद्धालु झूम उठे। कथा के दौरान स्वामी आत्म प्रकाश जन कल्याण समिति के अध्यक्ष सुमित विनीत टेकरीवाल, पंकज श्रीवास्तव, लाल जी शर्मा, शिव मंगल मिश्रा, अजय सिंह, गोपाल पाठक, विजय श्रीवास्तव, सतेंद्र शर्मा, लव जी पाठक और दिनेश मिश्रा सहित हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने स्वार्थरहित प्रेम को क्या बताया?
उन्होंने स्वार्थरहित प्रेम को जीवन का अमूल्य रत्न बताया।
परमात्मा से प्रेम पाने का साधन क्या बताया गया?
परमात्मा से प्रेम पाने का साधन सत्संग बताया गया।
कलयुग में भक्ति का साधन क्या है?
कलयुग में भक्ति का साधन नाम जप और सत्संग है।
कथा में किनके विवाह का वर्णन किया गया?
कथा में भगवान द्वारिकाधीश और माता रुक्मणी के विवाह का विस्तार से वर्णन किया गया।
सबसे ज़्यादा पढ़ी गई
- 1
श्रावस्ती में सपा बैठक में हंगामा, नेता का माइक छीनने का आरोप
- 2
शामली में 50 से ज्यादा दुकानों के नाम कथित फर्जी बिल, लाखों भुगतान
- 3
शामली महिला का रिश्तेदारों पर 15 लाख के जेवर ले जाने का आरोप
- 4
गन्ने की फसल नुकसान और मारपीट के आरोप, डीएम से जांच की मांग
- 5
हाथरस में आयुष्मान संविदा कर्मियों ने सौंपा ज्ञापन, 22 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार की …
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहली टिप्पणी करें।