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निठारी कांड के सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में की आत्महत्या

निठारी कांड के सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में फांसी लगाकर की आत्महत्या नोएडा के बहुचर्चित निठारी कांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली ने उत्तराखंड के हरिद्वार में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

निठारी कांड के सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में की आत्महत्या
Image credit: News Darpan Team

नोएडा के बहुचर्चित निठारी कांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली ने उत्तराखंड के हरिद्वार में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उनका शव शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को उत्तरी हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में एक चाय की दुकान में रस्सी से लटका हुआ मिला। लगभग 19 साल जेल में बिताने के बाद नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट से सभी मामलों में बरी होने पर वे मुक्त हुए थे।

सप्त सरोवर रोड पर लालमाता मंदिर के सामने स्थित चाय की दुकान के अंदर उनका शव पाया गया। पुलिस को सप्त ऋषि चौकी पर सूचना मिली कि एक व्यक्ति ने दुकान के अंदर फांसी लगा ली है। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने शव की पहचान सुरेंद्र कोली के रूप में की। वे ग्राम मंगरुखाल, भिकियासैंण, अल्मोड़ा के मूल निवासी थे।

स्थानीय लोगों और पुलिस के मुताबिक, कोली कुछ दिनों से हरिद्वार में रह रहे थे और चाय बेचने का काम कर रहे थे। उन्होंने कुछ दिन पहले ही सड़क किनारे छोटी दुकान किराए पर ली थी। पुलिस ने उनके परिजनों को अल्मोड़ा में सूचना दे दी है। पुलिस ने मौत की परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है और सभी एंगल से जांच की जा रही है।

निठारी कांड दिसंबर 2006 में सामने आया था। नोएडा के सेक्टर-31 में व्यवसायी मनिंदर सिंह पंढेर के घर के पीछे नाले और खुली जगह से कई बच्चों और महिलाओं के कंकाल, खोपड़ियां और हड्डियां मिली थीं। व्यवसायी मनिंदर सिंह पंढेर का घर डी-5 नंबर में था। आसपास के इलाके से लापता हुए कई बच्चे और युवतियां इस कांड से जुड़ी बताई गईं।

सुरेंद्र कोली पंढेर के घर में घरेलू नौकर के रूप में काम करते थे। पुलिस और सीबीआई ने उन्हें मुख्य आरोपी बताया। उन पर अपहरण, बलात्कार, हत्या और शवों के टुकड़े करने के गंभीर आरोप लगे। कुछ रिपोर्टों में नरभक्षण के आरोप भी लगाए गए थे। हालांकि बाद में ये आरोप सबूतों के अभाव में खारिज हो गए। पंढेर भी आरोपी बनाए गए थे।

कोली को दिसंबर 2006 में गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें लंबे समय तक गाजियाबाद की डासना जेल में रखा गया था। उन पर 13 अलग-अलग मामले दर्ज हुए। सीबीआई अदालत ने उन्हें कई मामलों में मौत की सजा सुनाई। सुप्रीम कोर्ट ने भी एक मामले में सजा बरकरार रखी।

सितंबर 2014 में जब उनकी फांसी की तारीख तय हुई, तो उन्हें डासना जेल से मेरठ जेल स्थानांतरित किया गया था। डासना जेल में फांसी का फंदा नहीं था, इसलिए यह ट्रांसफर किया गया। अंतिम क्षणों में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से फांसी टल गई।

इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2023 में 12 मामलों में उन्हें बरी कर दिया। सबूतों की विश्वसनीयता, कबूलनामे की वैधता और जांच में गंभीर खामियों का हवाला दिया गया। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम लंबित मामले में भी उन्हें बरी कर दिया। यह मामला रिमपा हलदर हत्याकांड था। कोर्ट ने उनकी तुरंत रिहाई का आदेश दिया। कोर्ट ने जांच को "बॉच्ड" और "न्याय की स्पष्ट विफलता" करार दिया।

नवंबर 2025 में कोली ग्रेटर नोएडा की जेल से मुक्त हुए। जेल से रिहाई के बाद वे हरिद्वार में आकर चाय बेचने लगे थे। वहीं पर उन्होंने छोटी दुकान किराए पर ली थी और अपना काम शुरू कर दिया था।

पुलिस इस मामले में आत्महत्या के कारणों की जांच कर रही है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक पारिवारिक या व्यक्तिगत कारणों की संभावना जताई जा रही है। लेकिन पूरी जांच बाकी है। पुलिस ने कहा है कि वे हर पहलू से मामले की जांच कर रहे हैं।

निठारी कांड के पीड़ित परिवारों के लिए यह घटना एक बार फिर पुरानी यादों को ताजा कर गई है। कई परिवार अभी भी न्याय की प्रतीक्षा में हैं। असली अपराधी की पहचान कानूनी रूप से साबित नहीं हो सकी। यह सवाल अब भी बना हुआ है कि वास्तव में उस भयानक कांड के लिए जिम्मेदार कौन था।

यह घटना भारतीय न्याय व्यवस्था की जटिलताओं और लंबे मुकदमों के मानसिक प्रभाव को भी रेखांकित करती है। लगभग दो दशक तक चले कानूनी संघर्ष और जेल में बिताए गए सालों का असर किसी भी व्यक्ति पर गहरा पड़ सकता है। सुरेंद्र कोली की मौत के साथ निठारी कांड का एक अध्याय तो बंद हो गया है, लेकिन कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। पीड़ित परिवारों के लिए यह सफर अभी भी खत्म नहीं हुआ है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुरेंद्र कोली ने आत्महत्या कहां और कब की?

सुरेंद्र कोली ने 18 सितंबर 2026 को उत्तराखंड के हरिद्वार में एक चाय की दुकान में फांसी लगाकर आत्महत्या की। दुकान सप्त सरोवर रोड पर लालमाता मंदिर के सामने स्थित थी।

निठारी कांड क्या था और सुरेंद्र कोली की क्या भूमिका थी?

निठारी कांड दिसंबर 2006 में नोएडा के सेक्टर-31 में सामने आया था। नोएडा के एक व्यवसायी के घर के पीछे कई बच्चों और महिलाओं के कंकाल मिले थे। सुरेंद्र कोली उस घर में घरेलू नौकर के रूप में काम करते थे और मुख्य आरोपी बनाए गए थे।

कोली को कितने साल जेल में रहना पड़ा और उन्हें क्यों रिहा किया गया?

कोली को लगभग 19 साल जेल में बिताने पड़े। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सभी मामलों में बरी कर दिया क्योंकि कोर्ट ने जांच को 'बॉच्ड' और 'न्याय की स्पष्ट विफलता' करार दिया।

जेल से रिहाई के बाद सुरेंद्र कोली क्या कर रहे थे?

नवंबर 2025 में रिहाई के बाद सुरेंद्र कोली हरिद्वार चले गए। वहां उन्होंने सड़क किनारे एक छोटी चाय की दुकान किराए पर लेकर चाय बेचने का काम शुरू किया था।

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