सुप्रीम कोर्ट ने बुजुर्ग और बीमार कैदियों की जल्दी रिहाई की नीति बनाने का आदेश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने बुजुर्ग और गंभीर बीमार कैदियों की जल्दी रिहाई के लिए पॉलिसी बनाने को कहा सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे तीन महीने के अंदर
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे तीन महीने के अंदर बुजुर्ग और गंभीर बीमार कैदियों की जल्दी रिहाई के लिए पॉलिसी तैयार करें। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि इन पॉलिसी में पात्रता के साफ नियम और "गंभीर बीमारी" की एक समान परिभाषा होनी चाहिए, ताकि सभी जगह एकसमान प्रक्रिया लागू हो सके।
ई-प्रिज़न्स पोर्टल से प्रक्रिया होगी आसान
कोर्ट ने सुझाव दिया कि जल्दी रिहाई के अनुरोधों को प्रोसेस करने के लिए ई-प्रिज़न्स पोर्टल का इस्तेमाल किया जाए। इस सिस्टम से ऑटोमेटेड अलर्ट मिलेंगे, डेडलाइन्स ट्रैक होंगी और फैसले में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहेगी। इसके अलावा, यह पोर्टल अनुपालन रिपोर्ट तैयार करेगा और राज्य सरकारों, स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी और अन्य संबंधित संस्थाओं को निगरानी में मदद करेगा।
कैदियों की मेडिकल और पर्सनल जानकारी की गोपनीयता बनाए रखने के लिए कोर्ट ने सुरक्षा उपाय लागू करने का आदेश दिया।
केंद्र सरकार देगी तकनीकी मदद
बेंच ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह कानून और न्याय मंत्रालय, गृह मंत्रालय और नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) के जरिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस पॉलिसी को लागू करने में मदद करे। इसमें तकनीकी सहायता, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और ट्रेनिंग शामिल है।
निर्देश का आधार
यह फैसला नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (NALSA) की याचिका पर आया, जिसमें बुजुर्ग और गंभीर बीमार कैदियों की रिहाई में मदद के लिए कोर्ट से दखल की मांग की गई थी। कोर्ट ने इस मानवीय मुद्दे को प्रभावी ढंग से हल करने के लिए एक व्यवस्थित प्रक्रिया की जरूरत पर जोर दिया।
यह आदेश दिखाता है कि न्यायपालिका जेलों में खास तौर पर कमजोर वर्ग के कैदियों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दे रही है।
स्रोत: Indian Express
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सुप्रीम कोर्ट ने बुजुर्ग और बीमार कैदियों के लिए क्या आदेश दिया है?
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तीन महीने के अंदर बुजुर्ग और गंभीर बीमार कैदियों की जल्दी रिहाई के लिए पॉलिसी तैयार करने का निर्देश दिया है। इन पॉलिसी में पात्रता के साफ नियम और 'गंभीर बीमारी' की एक समान परिभाषा होनी चाहिए।
ई-प्रिज़न्स पोर्टल का क्या काम होगा?
ई-प्रिज़न्स पोर्टल से जल्दी रिहाई के अनुरोधों को प्रोसेस करना आसान हो जाएगा। इससे ऑटोमेटेड अलर्ट मिलेंगे, डेडलाइन्स ट्रैक होंगी, फैसलों में पारदर्शिता बनी रहेगी, और अनुपालन रिपोर्ट तैयार होगी।
केंद्र सरकार को क्या करना है?
केंद्र सरकार को कानून और न्याय मंत्रालय, गृह मंत्रालय और नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) के जरिए राज्यों को पॉलिसी लागू करने में मदद करनी है। इसमें तकनीकी सहायता, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और ट्रेनिंग शामिल है।
यह फैसला क्यों आया?
यह फैसला नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (NALSA) की याचिका पर आया, जिसमें बुजुर्ग और गंभीर बीमार कैदियों की रिहाई में मदद के लिए कोर्ट से दखल की मांग की गई थी।
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