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सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक विधान परिषद के डिप्टी चेयरमैन की याचिका खारिज की

कर्नाटक विधान परिषद के डिप्टी चेयरमैन की वोटों की दोबारा गिनती रोकने की याचिका खारिज सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कर्नाटक विधान परिषद के डिप्टी चेयरमैन प्रणेश एम.के.

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक विधान परिषद के डिप्टी चेयरमैन की याचिका खारिज की
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कर्नाटक विधान परिषद के डिप्टी चेयरमैन प्रणेश एम.के. की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें 2021 के परिषद चुनाव में वोटों की दोबारा गिनती के हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। इस फैसले से पहले के आदेश को बरकरार रखा गया है और अब उस छह वोटों के मामूली अंतर की दोबारा जांच का रास्ता साफ हो गया है, जिसके जरिए प्रणेश ने अपनी सीट जीती थी।

हाई कोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस विपुल एम. पंचोली और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की तीन जजों की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। जस्टिस पंचोली ने फैसला सुनाते हुए प्रणेश की हाई कोर्ट के 29 जनवरी 2025 के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। यह आदेश कांग्रेस उम्मीदवार ए.वी. गायत्री शांथे गौड़ा की याचिका पर दिया गया था, जिन्होंने प्रणेश के खिलाफ चुनाव लड़ा था।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 11 मार्च को अपना फैसला सुरक्षित रखा था। हालांकि फैसले का विस्तृत विवरण अभी कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड नहीं हुआ है, लेकिन याचिका खारिज होने से यह चुनावी विवाद सुलझने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

गायत्री गौड़ा के घर में जश्न

सुप्रीम कोर्ट के फैसले की खबर मिलते ही गुरुवार को चिकमंगलूर में गायत्री गौड़ा के घर जश्न का माहौल बन गया। इस फैसले को उनके लिए बड़ी जीत माना जा रहा है क्योंकि अब वोटों की दोबारा गिनती का रास्ता साफ हो गया है, जिससे प्रणेश का चुनाव नतीजा पलट सकता है।

क्यों है यह मामला अहम?

इस दोबारा गिनती का नतीजा कर्नाटक विधान परिषद की राजनीतिक स्थिति पर बड़ा असर डाल सकता है। प्रणेश की महज छह वोटों की जीत इस चुनाव की कड़ी टक्कर को दिखाती है। अगर दोबारा गिनती में गायत्री गौड़ा जीतती हैं, तो सत्ता का संतुलन बदल सकता है। यह मामला चुनावी पारदर्शिता और करीबी मुकाबलों में विवादों को सुलझाने में न्यायपालिका की भूमिका को भी उजागर करता है।

फैसले की और जानकारी का इंतजार है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपील खारिज करना इस लंबे चुनावी विवाद को सुलझाने की दिशा में बड़ा कदम है।

स्रोत: The Hindu

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक विधान परिषद के डिप्टी चेयरमैन की क्या याचिका खारिज की?

सुप्रीम कोर्ट ने प्रणेश एम.के. की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने 2021 के परिषद चुनाव में वोटों की दोबारा गिनती के हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। इससे वोटों की दोबारा गिनती का रास्ता साफ हो गया है।

प्रणेश एम.के. ने कितने वोटों के अंतर से अपनी सीट जीती थी?

प्रणेश ने महज छह वोटों के अंतर से अपनी सीट जीती थी। यह बहुत कड़ी टक्कर दिखाता है और वोटों की दोबारा गिनती से उनका चुनाव नतीजा पलट सकता है।

हाई कोर्ट का वह आदेश कब का है जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा?

हाई कोर्ट का आदेश 29 जनवरी 2025 का है। यह आदेश कांग्रेस उम्मीदवार ए.वी. गायत्री शांथे गौड़ा की याचिका पर दिया गया था।

इस फैसले से कर्नाटक विधान परिषद की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?

अगर दोबारा गिनती में गायत्री गौड़ा जीतती हैं, तो कर्नाटक विधान परिषद में सत्ता का संतुलन बदल सकता है। यह मामला चुनावी पारदर्शिता और विवादों को सुलझाने में न्यायपालिका की भूमिका को भी दिखाता है।

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