गायक मनो आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में शुरू करेंगे मेंटरशिप प्रोग्राम
गायक मनो आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में गायकी सीखने वालों के लिए मेंटरशिप प्रोग्राम शुरू करेंगे। जानें उनका चार दशक लंबा फिल्मी सफर।
गायकी, एक्टिंग और उससे आगे: मनो का चार दशक लंबा फिल्मी सफर
गायक मनो जल्द ही आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में गायकी में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए एक मेंटरशिप प्रोग्राम शुरू करने वाले हैं। यह प्रोग्राम उन लोगों के लिए होगा, जिनमें हुनर तो हो सकता है, लेकिन उन्हें सही ट्रेनिंग नहीं मिली है या वे गायकी को अपना प्रोफेशन बनाना चाहते हैं। मनो का कहना है कि वह ऐसे लोगों को उनके साथ सीखने और गाने का मौका देना चाहते हैं।
यह पहल मनो के उस करियर का एक और पहलू सामने लाती है, जिसमें गायकी के साथ डबिंग, म्यूजिक कंपोज करना, चैट शो होस्ट करना और सिंग कॉन्टेस्ट शो होस्ट करना भी शामिल रहा है। यह उस रास्ते को भी दिखाती है, जिस पर मनो आगे बढ़े। उन्होंने शुरुआत में एक्टिंग में दिलचस्पी ली थी, लेकिन बाद में म्यूजिक के साथ उनका सबसे मजबूत जुड़ाव बना।
थिएटर और म्यूजिक के बीच बीता बचपन
म्यूजिक इंडस्ट्री में चार दशक लंबे अपने सफर को याद करते हुए मनो कहते हैं, “गायकी सिर्फ मेरा जुनून नहीं है, यह उस हवा की तरह है, जिसमें मैं सांस लेता हूं।” लेकिन गायकी उनकी पहली पसंद या पहली मंजिल नहीं थी।
मनो का नाम पहले नागूर बाबू था। वह विजयवाड़ा में बड़े हुए। बचपन में वह अपनी मां शाहीदा को देखते थे, जो थिएटर आर्टिस्ट थीं। उनके पिता हारमोनियम बजाते थे। दोनों घर पर डायलॉग बोलते थे और अपने सीन की प्रैक्टिस करते थे। इसी वजह से कम उम्र से ही एक्टिंग, कविता सुनाना और गाना उनके लिए जानी-पहचानी चीजें बन गई थीं।
जब वह सात साल के थे, तब उन्होंने नाटकों में परफॉर्म करना शुरू कर दिया था। स्टेज ने उन्हें एक्टिंग करने, कविता सुनाने और गाने के लिए शुरुआती जगह दी। उनके माता-पिता के काम की वजह से थिएटर और म्यूजिक उनकी रोजमर्रा की जिंदगी के बहुत करीब रहे।
फिल्मों से उनका पहला जुड़ाव 1979 में हुआ। उस साल उनकी मां को दासरी नारायण राव की फिल्म ‘नीडा’ में कैरेक्टर आर्टिस्ट का रोल मिला था। मनो को भी इसी फिल्म में बाल कलाकार का रोल दिया गया। इस मौके ने एक्टिंग में उनकी दिलचस्पी और बढ़ा दी।
‘नीडा’ के बाद उन्होंने ‘रंगून राउडी’, ‘केतुगाडु’ और ‘जतारा’ जैसी फिल्मों में बाल कलाकार के तौर पर काम किया। उस समय ऐसा लग रहा था कि एक्टिंग ही वह रास्ता है, जिस पर मनो आगे बढ़ने वाले हैं। उनका ध्यान स्टेज और फिल्मों में अभिनय करने पर था और गायकी अभी उनके करियर की मुख्य दिशा नहीं बनी थी।
स्टूडियो में मिला एक अनपेक्षित मौका
1979 में एक बदलाव आया। उस समय मनो फिल्म ‘ओ आदादी ओ मगाडु’ में हीरोइन के भाई का रोल कर रहे थे। गायक एस. पी. बालासुब्रह्मण्यम को एक गाना गाने के लिए बुलाया गया था, लेकिन वह समय पर स्टूडियो नहीं पहुंच सके।
उनकी गैरमौजूदगी ने मनो के लिए एक नया मौका बना दिया। मनो से गाना गाने के लिए कहा गया। म्यूजिक डायरेक्टर एम. एस. विश्वनाथन ने उन्हें सुना और उनके हुनर से प्रभावित हुए।
विश्वनाथन ने मनो से कहा कि अगर वह अपनी शुरुआती झिझक पर काबू पा लें, तो म्यूजिक इंडस्ट्री में अच्छा कर सकते हैं। मनो कहते हैं, “वे शब्द मेरी याद में हमेशा के लिए दर्ज हैं।”
यह सलाह मनो के साथ बनी रही, जब वह 14 साल की उम्र में एक नए अध्याय की शुरुआत करने विजयवाड़ा से मद्रास चले गए। उन्हें एक्टिंग में दिलचस्पी जरूर थी, लेकिन मनो का कहना है कि उन्हें जल्दी ही समझ आ गया था कि वह इस क्षेत्र के लिए नहीं बने हैं।
वह कहते हैं, “दिलचस्पी होने के बावजूद मुझे जल्दी ही समझ आ गया कि मैं यहां [एक्टिंग में] नहीं हूं।” इसके बाद के दौर में उन्होंने विश्वनाथन के असिस्टेंट के तौर पर काम किया। बाद में उन्होंने के. चक्रवर्ती के लिए भी काम किया। तेलुगु इंडस्ट्री के ज्यादातर कलाकार उनके साथ काम करते थे।
गायक बनने के लिए लंबा इंतजार
फिल्मों में गाना गाने का मौका तुरंत नहीं मिला। आखिरकार मनो को तमिल फिल्म ‘वेलाइक्करन’ के लिए गाने का पहला मौका मिला।
इससे पहले वह खुद के शब्दों में एक “डमी सिंगर” के तौर पर काम कर रहे थे। उनका कहना है कि उन्होंने रिकॉर्डिंग में करीब 1,500 गाने गाए थे। इस दौरान उन्हें अनुभव तो मिला, लेकिन वह लगातार परेशान भी होते गए, क्योंकि उन्हें असली तौर पर गाने के मौके नहीं मिल रहे थे।
मनो कहते हैं, “तब तक मैं डमी सिंगर के तौर पर काम करता था। मैंने रिकॉर्डिंग में करीब 1,500 गाने गाए थे। इस अनुभव से मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला, लेकिन क्योंकि मुझे असली गायकी के मौके नहीं मिल रहे थे, इसलिए निराशा भी बढ़ने लगी थी।”
फिर भी उस दौर ने उन्हें रिकॉर्डिंग का अनुभव दिया और उनकी समझ तथा काम का अनुभव बढ़ाने में मदद की। म्यूजिक कंपोजर इलैयाराजा ने उन्हें मनो नाम दिया और कामयाबी हासिल करने में उनकी मदद की।
‘वेलाइक्करन’ 1987 में रिलीज हुई थी। उस फिल्म से लेकर अब तक मनो 27,000 से ज्यादा फिल्मी गानों को अपनी आवाज दे चुके हैं। इनमें से ज्यादातर गाने तमिल और तेलुगु में हैं।
उनके काम का दायरा अलग-अलग तरह के म्यूजिक और कई पीढ़ियों के कंपोजर तक फैला रहा है। उन्होंने के. वी. महादेवन और एस. राजेश्वर राव से लेकर अनिरुद्ध रविचंदर तक के साथ काम किया है। उनकी रिकॉर्ड की गई गायकी में ‘प्रिया प्रियातमा रागालु’ जैसे मेलोडी वाले गाने भी शामिल हैं और ‘मुकाबला’ जैसे तेज और जोशीले गाने भी।
फिल्म ‘रोजा’ के लिए ए. आर. रहमान के साथ गाने वाले वह पहले सिंगर भी थे। ‘वेलाइक्करन’ के बाद उनके काम का पैमाना लगातार बढ़ता गया। यह उस समय से एक बड़ा बदलाव था, जब वह गाना गाने के मौके का इंतजार कर रहे थे।
प्लेबैक सिंग से डबिंग तक
मनो का काम सिर्फ गायकी तक सीमित नहीं रहा। फिल्मों में रजनीकांत की तेलुगु आवाज के तौर पर भी वह काफी मशहूर हुए।
मनो बताते हैं कि शिव कुमार ने फिल्म ‘बाशा’ तक रजनीकांत के लिए डबिंग की थी। इसके बाद शिव कुमार कन्नड़ फिल्मों में एक्टिंग करने लगे। तब रजनीकांत किसी दूसरे डबिंग आर्टिस्ट की तलाश कर रहे थे और उनकी तलाश मनो पर जाकर खत्म हुई।
‘मुथु’ से शुरुआत करते हुए मनो ने रजनीकांत की एक को छोड़कर बाकी सभी फिल्मों के लिए डबिंग की है। उन्होंने रजनीकांत की हालिया फिल्म ‘कूली’ और उसके आने वाले सीक्वल के लिए भी अपनी आवाज दी है।
गायकी और डबिंग के साथ-साथ मनो ने म्यूजिक कंपोज करने की भी कोशिश की है। उन्होंने चैट शो और सिंग कॉन्टेस्ट शो भी होस्ट किए हैं। आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में जल्द शुरू होने वाला उनका मेंटरशिप प्रोग्राम अब उनके इन्हीं अनुभवों को उन लोगों की मदद से जोड़ता है, जो गायकी में अपना करियर बनाना चाहते हैं।
जो युवा इस प्रोफेशन को अपनाने के बारे में सोच रहे हैं, उनके लिए मनो का जवाब सिर्फ एक शब्द है: “लगातार कोशिश।” उनका कहना है कि एक्टिंग का जो मौका उनके हाथ से निकल गया, उसे लेकर उन्होंने खुद को परेशान नहीं होने दिया। इसके बजाय उन्होंने अपना नजरिया खुला रखा। इसी खुले नजरिए ने उन्हें उनकी असली पसंद और जुनून की ओर आगे बढ़ाया।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मनो मेंटरशिप प्रोग्राम कहां शुरू करेंगे?
मनो आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में यह मेंटरशिप प्रोग्राम शुरू करेंगे।
यह मेंटरशिप प्रोग्राम किन लोगों के लिए होगा?
यह प्रोग्राम गायकी में दिलचस्पी रखने वाले उन लोगों के लिए होगा, जिनमें हुनर है लेकिन सही ट्रेनिंग नहीं मिली या वे गायकी को प्रोफेशन बनाना चाहते हैं।
मनो इस प्रोग्राम के जरिए क्या मौका देना चाहते हैं?
मनो ऐसे लोगों को उनके साथ सीखने और गाने का मौका देना चाहते हैं।
मनो का फिल्मी करियर किन क्षेत्रों से जुड़ा रहा है?
मनो ने गायकी के साथ डबिंग, म्यूजिक कंपोज करना, चैट शो होस्ट करना और सिंग कॉन्टेस्ट शो होस्ट करना जैसे काम भी किए हैं।
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