सिद्धारमैया ने चुनावी राजनीति से संन्यास का किया ऐलान
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने चुनावी राजनीति से संन्यास का ऐलान किया, उम्र और 'गंदी' राजनीति को बताया वजह कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने करीब पांच
कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने करीब पांच दशक की सार्वजनिक सेवा के बाद चुनावी राजनीति से संन्यास लेने का फैसला किया है। शनिवार को मंड्या जिले में एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने घोषणा की कि वह 2028 विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने उम्र बढ़ने और राजनीति में गिरते नैतिक स्तर को इसकी वजह बताया।
समर्थकों की अपील के बावजूद लिया फैसला
सिद्धारमैया, जो फिलहाल वरुणा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, ने यह घोषणा पूर्व स्पीकर केआर पेट कृष्णा की 86वीं जयंती समारोह के दौरान की। उनके समर्थकों ने उनसे अगले दशक तक चुनावी राजनीति में बने रहने की अपील की थी, लेकिन 79 वर्षीय नेता ने साफ कर दिया कि वह 2028 में फिर से चुनाव नहीं लड़ेंगे। उनके इस बयान से कांग्रेस के कई समर्थक निराश हो गए, जो चाहते थे कि वह चुनाव लड़ते रहें।
नेतृत्व और विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता की विरासत
सिद्धारमैया ने 1978 में तालुक बोर्ड के सदस्य के रूप में सार्वजनिक जीवन में कदम रखा था और 2028 तक वह राजनीति में 50 साल पूरे कर लेंगे। वह कर्नाटक के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता हैं, जिन्होंने डी. देवराज उर्स का रिकॉर्ड तोड़ा। अपने सफर पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी अपनी विचारधारा से समझौता नहीं किया और न ही अपने जमीर के खिलाफ गए, चाहे जीत हो या हार।
फेसबुक पोस्ट में सिद्धारमैया ने चुनावी राजनीति से दूर होने के कारणों को विस्तार से बताया। उन्होंने लिखा, "राजनीति गंदी हो चुकी है। ईमानदार राजनीति की गुंजाइश नहीं बची है। आज चुनाव लड़ने के लिए लोगों को पैसे देने पड़ते हैं, जबकि पहले लोग खुद उम्मीदवारों का समर्थन करने के लिए योगदान देते थे।" उन्होंने कहा कि बदलते राजनीतिक माहौल, उम्र और स्वास्थ्य ने उनके फैसले को प्रभावित किया।
जनसेवा जारी रखने का वादा
चुनावी राजनीति से संन्यास लेने के बावजूद, सिद्धारमैया ने सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने अपने समर्थकों को भरोसा दिलाया कि वह जनता की भलाई के लिए काम करते रहेंगे और कांग्रेस हाईकमान द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारियों को निभाएंगे। उन्होंने कहा, "कर्नाटक के लोगों ने मुझे अपना मानकर मुझ पर प्यार और स्नेह बरसाया है। मैं उनका हमेशा ऋणी रहूंगा।"
क्यों है यह फैसला अहम
सिद्धारमैया का फैसला कर्नाटक की राजनीति में एक युग का अंत है। एक प्रमुख नेता जिन्होंने दशकों तक राज्य की राजनीतिक तस्वीर को आकार दिया, उनके चुनावी राजनीति से हटने से कांग्रेस पार्टी में एक बड़ा खालीपन आएगा। राजनीति में नैतिकता के गिरते स्तर पर उनकी चिंता भारतीय लोकतंत्र के सामने व्यापक चुनौतियों को उजागर करती है। हालांकि, जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता यह संकेत देती है कि कर्नाटक की राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में उनका प्रभाव अभी खत्म नहीं हुआ है।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सिद्धारमैया ने चुनावी राजनीति से संन्यास क्यों लिया?
सिद्धारमैया ने उम्र बढ़ने, स्वास्थ्य और राजनीति में गिरते नैतिक स्तर को इसका कारण बताया। उन्होंने कहा कि राजनीति 'गंदी' हो चुकी है और अब चुनाव लड़ने के लिए लोगों को पैसे देने पड़ते हैं।
सिद्धारमैया 2028 चुनाव नहीं लड़ेंगे - यह घोषणा कब की गई?
79 वर्षीय सिद्धारमैया ने शनिवार को मंड्या जिले में एक कार्यक्रम के दौरान यह घोषणा की, जहां पूर्व स्पीकर केआर पेट कृष्णा की 86वीं जयंती समारोह था।
सिद्धारमैया की राजनीतिक विरासत क्या है?
सिद्धारमैया ने 1978 से राजनीति में कदम रखा और करीब 50 साल की सार्वजनिक सेवा की है। वह कर्नाटक के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे और डी. देवराज उर्स का रिकॉर्ड तोड़ा।
क्या सिद्धारमैया पूरी तरह से राजनीति छोड़ देंगे?
नहीं, सिद्धारमैया ने सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहने की प्रतिबद्धता दोहराई। वह जनता की भलाई के लिए काम करते रहेंगे और कांग्रेस हाईकमान द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारियों को निभाएंगे।
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