श्रावस्ती में त्योहारों के दौरान 28 नवंबर तक निषेधाज्ञा लागू
श्रावस्ती में त्योहारों के दौरान साम्प्रदायिक सौहार्द, शांति व्यवस्था और जनसुरक्षा बनाए रखने के लिए जिला मजिस्ट्रेट अन्नपूर्णा गर्ग ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 की धारा-163 के तहत निषेधाज्ञा
श्रावस्ती में त्योहारों के दौरान साम्प्रदायिक सौहार्द, शांति व्यवस्था और जनसुरक्षा बनाए रखने के लिए जिला मजिस्ट्रेट अन्नपूर्णा गर्ग ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 की धारा-163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की है। यह आदेश श्रावस्ती जिले की सीमा में रहने वाले और जिले में प्रवेश करने वाले लोगों पर लागू होगा। आदेश 10.10.2026 से 28.11.2026 तक प्रभावी रहेगा।
जिला मजिस्ट्रेट के आदेश में कहा गया है कि श्रावस्ती जिला साम्प्रदायिक दृष्टिकोण से अत्यन्त संवेदनशील है। इस वर्ष दिनांक 11-10-2026 को महाराजा अग्रसेन जयंती, दिनांक 19-10-2026 को दशहरा(महाष्टमी), दिनांक 20-10-2026 को दशहरा/विजय दशमी, दिनांक 26-10-2026 को महर्षि वाल्मीकि जयंती, दिनांक 31-10-2026 को सरदार वल्लभ भाई पटेल एवं आचार्य नरेन्द्र देव जयंती मनाई जाएगी।
इसके बाद दिनांक 05-11-2026 को नरक चतुर्दशी, दिनांक 08-11-2026 को दीपावली, दिनांक 09.11.2026 को गोवर्धन पूजा, दिनांक 11.11.2026 को भैयादूज/चित्रगुप्त जयंती, दिनांक 15.11.2026 को छठ पूजा पर्व, दिनांक 16.11.2026 को वीरांगना ऊदादेवी शहीद दिवस और दिनांक 24.11.2026 को गुरू नानक जयंती/कार्तिक पूर्णिमा का त्योहार मनाया जाएगा।
आदेश के मुताबिक, इन त्योहारों को शांतिपूर्ण वातावरण में मनाने और सम्पन्न कराने के लिए प्रतिबंध लगाए गए हैं। जिला मजिस्ट्रेट अन्नपूर्णा गर्ग ने भा0ना0सु0संहिता 2023 की धारा-163 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह निषेधाज्ञा पारित की है।
निषेधाज्ञा के तहत जिले में कोई भी व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह अपने साथ लाठी, डण्डा, किसी भी तरह का आग्नेयास्त्र, घातक अस्त्र-शस्त्र, विस्फोटक पदार्थ, प्रतिबन्धित चाकू या कोई अन्य प्रहारक वस्तु लेकर नहीं चलेगा। हालांकि वृद्धों, विकलांगों और असहाय या बीमार लोगों के लिए सहारे के तौर पर इस्तेमाल की जा रही लाठी या डण्डे पर यह रोक लागू नहीं होगी। ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारी और कर्मचारी भी इस प्रतिबंध से मुक्त रहेंगे।
किसी भी व्यक्ति या समूह को विस्फोटक सामग्री लेकर किसी स्थान पर आने की अनुमति नहीं होगी। कोई भी व्यक्ति ऐसी सामग्री के साथ जिले की सीमा में प्रवेश भी नहीं कर सकेगा। आदेश में जिले की सीमा के भीतर अफवाह फैलाने पर भी रोक लगाई गई है। ऐसा कोई पर्चा या हैण्डबिल भी वितरित नहीं किया जा सकेगा, जिससे उत्तेजना पैदा हो।
ध्वनिविस्तारण यंत्रों के जरिए ऐसा प्रचार-प्रसार भी प्रतिबंधित किया गया है, जिससे जातिगत या साम्प्रदायिक तनाव पैदा होता हो या पैदा होने की सम्भावना हो। कोई भी व्यक्ति या समूह ऐसा लिखित या मौखिक वक्तव्य अथवा संदेश प्रचारित या प्रसारित नहीं करेगा, जिससे साम्प्रदायिक तनाव या वैमनस्य पैदा होता हो या इसकी सम्भावना हो।
आदेश में किसी भी व्यक्ति या समूह द्वारा ध्वनि विस्तारक यंत्र, जैसे लाउडस्पीकर और डी0जे0 के इस्तेमाल को निषिद्ध किया गया है। इसके साथ ही किसी भी स्थान पर ध्वनि विस्तारण यंत्र या साउण्ड बाक्स का इस्तेमाल करने के लिए संबंधित मजिस्ट्रेट से अनुमति लेना जरूरी होगा।
किसी व्यक्ति या सम्प्रदाय की भावना या भावनाओं को आहत करने वाले अथवा उनमें उत्तेजना पैदा करने वाले विद्वेषपूर्ण नारे या शब्द दीवार पर अंकित नहीं किए जा सकेंगे। किसी व्यक्ति को ऐसा करने के लिए प्रेरित करना भी प्रतिबंधित रहेगा। ऐसे नारे या अभद्र शब्दों का इस्तेमाल भी नहीं किया जा सकेगा, जिनसे आम लोगों, किसी वर्ग विशेष या किसी समुदाय में उत्तेजना फैले।
किसी सार्वजनिक स्थान पर बैठक, पंचायत, रैली या नाटक मंचन आयोजित करने के लिए संबंधित उप जिला मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति जरूरी होगी। बिना अनुमति के ऐसा कोई आयोजन नहीं किया जा सकेगा। जुलूस और धरना प्रदर्शन को लेकर भी आदेश में स्पष्ट नियम तय किए गए हैं।
परम्परागत रीति से मनाए जाने वाले आयोजनों के अलावा किसी अन्य स्थान पर बिना पूर्व अनुमति धार्मिक जुलूस नहीं निकाला जा सकेगा। पहले से चले आ रहे जुलूस का रूप भी नहीं बदला जा सकेगा। ऐसे किसी कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जाएगा, जिससे सार्वजनिक आवागमन बाधित होता हो या बाधित होने की सम्भावना हो।
इसी तरह, जिले की सीमा के भीतर बिना सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के जुलूस, धरना प्रदर्शन या ऐसे अन्य कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जा सकेंगे। इसके लिए संबंधित उप जिला मजिस्ट्रेट से कम से कम 48 घंटे पहले अनुमति लेना अनिवार्य होगा। आदेश में धार्मिक जुलूस से जुड़ी यही शर्त दोबारा स्पष्ट करते हुए कहा गया है कि परम्परागत आयोजनों के अलावा किसी अन्य स्थान पर बिना पूर्व अनुमति जुलूस नहीं निकलेगा और सार्वजनिक आवागमन को प्रभावित करने वाले स्थान पर कार्यक्रम नहीं होगा।
किसी भी आयोजन के लिए ऐसे बन्द स्थान का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा, जहां एकत्रित समुदाय या लोगों के आने-जाने के लिए पर्याप्त प्रवेश और निकास के रास्ते न हों। आदेश में आयोजन स्थल पर लोगों की आवाजाही के लिए समुचित रास्ते होने की शर्त रखी गई है।
तेजाब या ऐसी पेय पदार्थों की बोतलें, जिन्हें हिलाकर तोड़ने से या किसी व्यक्ति पर फेंकने से चोट लग सकती हो, उन्हें निर्धारित स्थान या दुकान के अलावा कहीं इकट्ठा नहीं किया जा सकेगा और न ही किसी से इकट्ठा कराया जा सकेगा। यह प्रतिबंध ऐसे सामान के संग्रह और उसके लिए किसी अन्य व्यक्ति को लगाने, दोनों पर लागू होगा।
किसी व्यक्ति, राहगीर या वाहन से जबरन चन्दा वसूलने पर भी रोक रहेगी। कोई व्यक्ति या समूह त्योहारों के दौरान ऐसा काम नहीं करेगा, जिससे साम्प्रदायिक और सामाजिक वातावरण पर प्रतिकूल असर पड़े या शांति व्यवस्था प्रभावित हो। ऐसा कोई कार्य भी नहीं किया जा सकेगा, जिससे साम्प्रदायिक वातावरण खराब हो और तनाव का माहौल बने।
श्रावस्ती जिले की सीमा के भीतर किसी भी स्थान पर पांच या पांच से अधिक लोग एकत्रित नहीं हो सकेंगे। हालांकि यह प्रतिबंध परम्परागत पूजा स्थल, मेला, शवयात्रा, बारात और ऐसे समारोहों पर लागू नहीं होगा। इन आयोजनों को आदेश में इस प्रतिबंध से अलग रखा गया है।
शस्त्र लाइसेंस रखने वाले ऐसे व्यक्ति, जिन्हें जीवन का भय है और जो अपने को असुरक्षित महसूस करते हैं, वे अपने लाइसेंसी शस्त्र को साथ लेकर चलने की अनुमति के लिए सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रार्थनापत्र दे सकते हैं। इसके बाद उन्हें संबंधित अनुमति प्राप्त करनी होगी। बिना अनुमति के लाइसेंसी शस्त्र साथ लेकर चलने की व्यवस्था इस आदेश में नहीं दी गई है।
किसी भी व्यक्ति, समुदाय या संगठन को समुदाय को इकट्ठा करने के लिए कोई नई परम्परा शुरू करने की अनुमति नहीं होगी। किसी व्यक्ति या समूह द्वारा किसी दुकान, कार्यालय, व्यवसाय स्थल या परिवहन को जबरन बन्द कराने का दबाव नहीं बनाया जाएगा। कोई व्यक्ति या समूह खुद भी इन्हें बन्द कराने का प्रयास नहीं करेगा।
किसी बस अड्डे, सरकारी भवन, सरकारी कार्यालय या किसी अन्य सार्वजनिक सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने पर रोक रहेगी। बस, यातायात या संचार के किसी अन्य संसाधन को भी प्रभावित नहीं किया जा सकेगा। आदेश में सार्वजनिक और सरकारी सम्पत्ति की सुरक्षा से जुड़े इन प्रावधानों को भी निषेधाज्ञा में शामिल किया गया है।
उक्त प्रस्तर-12 में बताए गए मजिस्ट्रेटों से अनुमति लिए बिना किसी भी स्थान पर ध्वनि विस्तारण यंत्र या साउण्ड बाक्स का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। ऐसे यंत्रों को पहले से धार्मिक या अन्य स्थलों पर इस तरह असुरक्षित रखकर भी नहीं छोड़ा जा सकेगा कि उनका इस्तेमाल धार्मिक या सामाजिक विद्वेष, उन्माद, घृणा या हिंसा फैलाने वाले असामाजिक तत्व या उनका गिरोह कर सके।
ध्वनि विस्तारण यंत्र, लाउडस्पीकर, साउण्ड बाक्स, डी0जे0 या जनता को सम्बोधित करने वाली किसी अन्य प्रणाली के इस्तेमाल के लिए भी समय और अनुमति से जुड़ी शर्तें लागू रहेंगी। प्रातः 6 बजे से रात्रि 10बजे तक सक्षम मजिस्ट्रेट की बिना पूर्वानुमति के इनका इस्तेमाल किसी सार्वजनिक स्थान या किसी अन्य स्थान पर नहीं किया जा सकेगा।
रात्रि 10 बजे से प्रातः 6 बजे तक ध्वनिविस्तारक यंत्रों का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। आदेश में कहा गया है कि इस अवधि में मा0 सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा ध्वनिविस्तारक यंत्रों के प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबंध है। इन यंत्रों की आवाज का स्तर ध्वनि प्रदूषण (रेगुलेशन एण्ड कंट्रोल)रूल्स, 2000 में बताए गए निर्धारित मानक से अधिक नहीं होना चाहिए।
परीक्षा से जुड़ी व्यवस्था को लेकर भी कई प्रतिबंध लगाए गए हैं। कोई व्यक्ति या समूह परीक्षा के लिए तैनात किसी भी कर्मी के काम में व्यवधान पैदा नहीं करेगा। किसी परीक्षार्थी को परीक्षा देने से रोकने की नीयत से ऐसा कोई काम नहीं किया जाएगा, जिससे वह परीक्षा से वंचित रहे या उसके परीक्षा से वंचित रहने की सम्भावना पैदा हो।
परीक्षा विषयक किसी भी कार्रवाई और व्यवस्था में किसी भी तरह की बाधा या व्यवधान पैदा नहीं किया जा सकेगा। आदेश में परीक्षा कर्मियों, परीक्षार्थियों और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े काम में किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप पर रोक लगाई गई है।
किसी भी व्यक्ति, किसी राजनैतिक दल या उसके समर्थक की ओर से किसी सार्वजनिक स्थल या निजी सम्पत्ति पर तोरणद्वार या प्रवेश द्वार नहीं लगाया जाएगा। सरकारी सम्पत्ति पर दीवाल लेखन, पोस्टर या पम्पलेट चिपकाना, कटआउट, बैनर, होर्डिंग, झण्डा लगाना या प्रदर्शित करना भी वर्जित रहेगा।
आदेश में सार्वजनिक स्थल की परिभाषा भी स्पष्ट की गई है। इसमें सरकारी भूमि, भवन, बाउण्ड्रीवाल, साइनबोर्ड, पी०डब्लू०डी०मील के पत्थर, ट्रैफिक साइनबोर्ड और बिजली के खम्भे समेत सभी ऐसे स्थान शामिल होंगे। इन स्थानों पर किसी भी तरह की प्रचार सामग्री लगाने या प्रदर्शित करने पर रोक रहेगी।
दीवार लेखन, पोस्टर चिपकाने और सम्पत्ति को अस्थायी या स्थायी रूप से विरूपित करने वाली अन्य सामग्री लगाने पर भी प्रतिबंध रहेगा। ऐसी प्रचार सामग्री, जिसे आसानी से हटाया न जा सके, उसे उक्त सभास्थल पर नहीं लगाया जा सकेगा। यह रोक सम्पत्ति को किसी भी तरह से बिगाड़ने वाली प्रचार सामग्री पर लागू होगी।
जिला मजिस्ट्रेट के आदेश में कहा गया है कि यह आदेश तुरन्त प्रभावी किया जाना जरूरी है। सभी पक्षों को सुनना सम्भव नहीं होने के कारण आदेश एकपक्षीय रूप से पारित किया गया है। आदेश के मुताबिक, अपरिहार्य परिस्थितियों में जिले में तैनात कोई भी कार्यकारी मजिस्ट्रेट ऊपर बताए गए सभी प्रतिबंधों या उनमें से किसी एक प्रतिबंध में शिथिलता दे सकता है।
निषेधाज्ञा के किसी प्रावधान या पूरे आदेश का उल्लंघन भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा-223 के तहत दण्डनीय होगा। यह आदेश न्यायालय जिला मजिस्ट्रेट, श्रावस्ती की ओर से धारा-163 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 के तहत जारी किया गया है और 10.10.2026 से 28.11.2026 तक प्रभावी रहेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्रावस्ती में निषेधाज्ञा कब तक लागू रहेगी?
निषेधाज्ञा 10 अक्टूबर 2026 से 28 नवंबर 2026 तक लागू रहेगी।
निषेधाज्ञा किस क्षेत्र और किन लोगों पर लागू होगी?
यह आदेश श्रावस्ती जिले की सीमा में रहने वाले और जिले में प्रवेश करने वाले सभी लोगों पर लागू होगा।
निषेधाज्ञा लागू करने की वजह क्या है?
त्योहारों के दौरान साम्प्रदायिक सौहार्द, शांति व्यवस्था और जनसुरक्षा बनाए रखने के लिए यह निषेधाज्ञा लागू की गई है।
निषेधाज्ञा के तहत किन चीजों पर रोक है?
लाठी, डण्डा, आग्नेयास्त्र, घातक हथियार, विस्फोटक पदार्थ और प्रतिबंधित चाकू लेकर चलने पर रोक है। अफवाह फैलाने और तनाव पैदा करने वाली सामग्री या संदेश फैलाने पर भी रोक रहेगी।
क्या लाउडस्पीकर और डी0जे0 बजाने की अनुमति है?
लाउडस्पीकर, डी0जे0 या किसी साउंड बॉक्स के इस्तेमाल के लिए संबंधित मजिस्ट्रेट से अनुमति लेना जरूरी होगा।
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