मकान तोड़े जाने के आरोपों पर अपनी सरकार के खिलाफ धरने पर शिवराज
मध्यप्रदेश के बुधनी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कोसमी में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने और खड़ी फसलें बर्बाद होने के आरोपों के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी
मध्यप्रदेश के बुधनी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कोसमी में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने और खड़ी फसलें बर्बाद होने के आरोपों के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी ही पार्टी की सरकार के प्रशासनिक तंत्र के खिलाफ धरने पर बैठ गए। वन विकास निगम और जिला प्रशासन की बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में शिवराज आदिवासी परिवारों के बीच पहुंचे और अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताई। उन्होंने मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को फोन कर पूरे मामले की जानकारी दी और दोषी अफसरों पर कार्रवाई की मांग की।
बुधनी/सीहोर के ग्राम कोसमी में हुई कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि करीब 12 बरेला आदिवासी परिवारों के कच्चे-पक्के मकान ढहा दिए गए। पीड़ित परिवारों का यह भी आरोप है कि कार्रवाई के दौरान मक्का और तुअर की खड़ी फसलों को बुलडोजर से रौंद दिया गया। इसके अलावा पीने के पानी और सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाले कुएं को भी मिट्टी से पाट दिया गया।
परिवारों का आरोप है कि कार्रवाई के बाद उनके सामने रहने और रोजमर्रा की जरूरतों का संकट खड़ा हो गया है। जिन घरों में परिवार रह रहे थे, वे मकान टूटने के बाद उजड़ गए। खड़ी फसलें बर्बाद होने से उनकी मुश्किल और बढ़ गई। कुएं को मिट्टी से भर दिए जाने के बाद पीने के पानी और सिंचाई की जरूरतों को लेकर भी परेशानी सामने आई है।
कोसमी गांव में रविवार को वन विकास निगम और जिला प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई हुई। इसी कार्रवाई में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने की बात सामने आई है। पीड़ितों ने आरोप लगाया कि कार्रवाई केवल मकानों तक सीमित नहीं रही, बल्कि खेतों में खड़ी मक्का और तुअर की फसलें भी नष्ट हो गईं। कुएं को मिट्टी से भरने की बात भी परिवारों ने कही है।
इस मामले ने इसलिए भी गंभीर रूप ले लिया है, क्योंकि शिवराज सिंह चौहान के मुताबिक उन्होंने करीब एक साल पहले ही जिला प्रशासन को इन घरों को नहीं गिराने के निर्देश दिए थे। उन्होंने यह भी कहा कि शिकायत के बाद तत्कालीन डीएफओ को हटाया गया था। इसके बावजूद दोबारा मकान तोड़ने की कार्रवाई कैसे हुई, यह सवाल उठ रहा है।
यह भी पूछा जा रहा है कि कार्रवाई का फैसला किस स्तर पर लिया गया और पहले दिए गए निर्देशों का पालन क्यों नहीं हुआ। शिवराज के मुताबिक, यदि प्रशासन को पहले ही इन घरों को नहीं गिराने की हिदायत दी गई थी, तो उसके बाद वन विकास निगम और जिला प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई कैसे हुई। इसी वजह से प्रशासनिक व्यवस्था और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
मामले की सूचना मिलने के बाद रविवार शाम शिवराज सिंह चौहान कोसमी पहुंचे। वहां उन्होंने उजड़े हुए मकान देखे और परेशान परिवारों से मुलाकात की। परिवारों की स्थिति देखकर उन्होंने गहरी नाराजगी जताई। शिवराज ने कहा, “जुल्म की इंतहा हो गई। सवेरे तक जहां बच्चों की किलकारियां गूंज रही थीं, वहां अब चीखें गूंज रही हैं। महिलाएं छाती पीट-पीटकर रो रही हैं।”
शिवराज पीड़ित परिवारों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनते रहे। उन्होंने परिवारों को भरोसा दिलाया कि उन्हें इस हाल में नहीं छोड़ा जाएगा। शिवराज ने कहा कि जिन परिवारों के मकान टूटे हैं, उनके लिए नए पक्के मकानों की व्यवस्था कराई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि स्थायी इंतजाम होने तक प्रभावित परिवारों के रहने और खाने की अस्थायी व्यवस्था की जाएगी।
मौके पर कोई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद नहीं था। इस बात को लेकर भी शिवराज सिंह चौहान ने नाराजगी जताई। उन्होंने मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से फोन पर बात कर मामले की जानकारी दी। शिवराज ने गरीब आदिवासी परिवारों के साथ हुए व्यवहार पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि इन्हीं गरीब लोगों के वोट और योगदान से सत्ता तक पहुंचने में मदद मिलती है। इसके बावजूद उन्हीं लोगों के मकानों पर बुलडोजर चलाने का सवाल उठाते हुए शिवराज ने नाराजगी जताई। उनका संदेश साफ था कि गरीबों और आदिवासियों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
शिवराज ने पूरे मामले को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने उठाने की बात कही। उन्होंने दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करने की भी बात कही। उनका कहना था कि मामले में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और जिन अधिकारियों की भूमिका रही है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
कोसमी की घटना को लेकर कांग्रेस ने भी सरकार को घेरा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रशासनिक तालमेल की कमी का मुद्दा उठाया। दोनों नेताओं ने आदिवासी परिवारों की दुर्दशा को लेकर सवाल किए हैं। कांग्रेस को इस घटना के जरिए सरकार पर निशाना साधने का मौका मिला है।
पूरे मामले ने प्रशासनिक कार्रवाई, अधिकारियों की जवाबदेही और आदिवासी परिवारों के पुनर्वास को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि पहले से मकान नहीं गिराने के निर्देश दिए गए थे, तो उनके बावजूद कार्रवाई कैसे हुई। इसके अलावा यह भी सवाल है कि कार्रवाई करने वाले अधिकारियों ने पहले दिए गए निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया।
पीड़ित परिवारों को नए पक्के मकानों, भोजन और रहने की अस्थायी व्यवस्था का आश्वासन मिला है। हालांकि, उन्हें वास्तविक राहत कब तक मिलेगी, यह अभी साफ नहीं है। जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी और मुख्यमंत्री कार्यालय इस मामले में क्या कदम उठाएगा, इस पर भी निगाहें टिकी हैं। કોષ्मी की घटना के बाद अब प्रशासनिक तंत्र से जवाबदेही तय करने और प्रभावित आदिवासी परिवारों को राहत देने की मांग तेज हो गई है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शिवराज सिंह चौहान किस बात के विरोध में धरने पर बैठे?
वे बुधनी के ग्राम कोसमी में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने और फसलें बर्बाद होने के आरोपों के विरोध में धरने पर बैठे।
कोसमी गांव में कितने आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का आरोप है?
करीब 12 बरेला आदिवासी परिवारों के कच्चे-पक्के मकान तोड़े जाने का आरोप है।
कार्रवाई में किन फसलों और किस कुएं को नुकसान पहुंचाने का आरोप है?
मक्का और तुअर की खड़ी फसलों को बुलडोजर से रौंदने और पीने व सिंचाई के कुएं को मिट्टी से पाटने का आरोप है।
शिवराज सिंह चौहान ने प्रभावित परिवारों के लिए क्या भरोसा दिया?
उन्होंने नए पक्के मकान बनवाने और स्थायी इंतजाम होने तक रहने व खाने की अस्थायी व्यवस्था कराने का भरोसा दिया।
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