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शाहरुख ने गौरी के माता-पिता को मनाने के लिए अपनाया 'अभिनव' नाम

‘सिली और बचकाना’: क्यों शाहरुख खान बने ‘अभिनव’ ताकि गौरी खान के माता-पिता को मनाया जा सके शाहरुख खान का ‘अभिनव’ अवतार: प्यार और स्वीकृति की कहानी गौरी खान ने खुलासा किया कि शाहरुख खान ने एक बार

शाहरुख ने गौरी के माता-पिता को मनाने के लिए अपनाया 'अभिनव' नाम
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‘सिली और बचकाना’: क्यों शाहरुख खान बने ‘अभिनव’ ताकि गौरी खान के माता-पिता को मनाया जा सके

शाहरुख खान का ‘अभिनव’ अवतार: प्यार और स्वीकृति की कहानी

गौरी खान ने खुलासा किया कि शाहरुख खान ने एक बार ‘अभिनव’ नाम अपनाया था ताकि वो हिंदू दिखें और उनके माता-पिता को मनाया जा सके, जो उनकी इंटरफेथ शादी के खिलाफ थे। शो फर्स्ट लेडीज में अबू जानी और संदीप खोसला के साथ बातचीत में गौरी ने इसे “बहुत सिली और बचकाना” बताया।

प्यार की कहानी में मुश्किलें

शाहरुख और गौरी खान, जो अब 35 साल से शादीशुदा हैं, को उनके अलग-अलग धर्मों की वजह से गौरी के परिवार का विरोध झेलना पड़ा। मुश्ताक शेख की किताब शाहरुख कैन में बताया गया कि उस वक्त शाहरुख ने कई नाम अपनाए थे, जैसे “जीतेन्द्र कुमार तुल्ली,” जो अभिनेता जीतेन्द्र और राजेन्द्र कुमार तुल्ली से प्रेरित था। बाद में उन्होंने “अभिनव” नाम चुना ताकि गौरी के हिंदू परिवार को अपनाने में आसानी हो।

उनकी शादी में भी धार्मिक दीवारें तोड़ने की कोशिश साफ दिखी। शाहरुख ने हिंदू शादी में एक हिंदू नाम अपनाया, जबकि गौरी ने निकाह के लिए मुस्लिम नाम “आयशा” लिया। गौरी ने बाद में माना कि उनके माता-पिता उस वक्त शादी के खिलाफ थे, जो उनकी चुनौतियों को दिखाता है।

सेक्युलर सोच का परिवार

शुरुआती मुश्किलों के बावजूद, शाहरुख और गौरी ने एक ऐसा परिवार बनाया जो सेक्युलर सोच पर आधारित है। दोनों अक्सर दोनों धर्मों को अपनाने और अपने तीन बच्चों, आर्यन, सुहाना और अबराम, को बैलेंस्ड नजरिए से बड़ा करने की बात करते हैं। 2013 में आउटलुक टर्निंग पॉइंट्स को दिए इंटरव्यू में शाहरुख ने मजाक में बताया कि उनके बच्चे कभी-कभी उनसे धर्म के बारे में पूछते हैं, तो वो कहते हैं, “तुम पहले भारतीय हो और तुम्हारा धर्म इंसानियत है।”

गौरी ने बताया कि उनका परिवार दिवाली और ईद दोनों को पूरे जोश के साथ मनाता है। “दिवाली पर मैं पूजा करती हूं और परिवार साथ देता है, और ईद पर शाहरुख लीड करते हैं और हम साथ देते हैं। मुझे लगता है कि ये बहुत खूबसूरत है और बच्चों ने इसे अपनाया है,” उन्होंने कहा।

क्यों है ये कहानी खास

शाहरुख और गौरी खान की कहानी उन चुनौतियों को दिखाती है जो इंटरफेथ कपल्स को भारत में झेलनी पड़ती हैं, जहां समाज और परिवार का दबाव रिश्तों को मुश्किल बना सकता है। उनका सफर, जो समझौते और आपसी सम्मान से भरा है, एकता और स्वीकृति का बड़ा संदेश देता है। अपनी कहानी को खुलकर साझा करके ये कपल उन लोगों को प्रेरित करता है जो इसी तरह की राह पर चल रहे हैं।

स्रोत: Indian Express

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शाहरुख ने 'अभिनव' नाम क्यों अपनाया?

शाहरुख ने 'अभिनव' नाम अपनाया ताकि वो गौरी के माता-पिता को मनाकर उनकी इंटरफेथ शादी को स्वीकार करवा सकें।

गौरी के माता-पिता ने शादी के खिलाफ क्यों थे?

गौरी के माता-पिता ने उनकी शादी के खिलाफ थे क्योंकि शाहरुख और गौरी के अलग-अलग धर्म थे।

शाहरुख और गौरी का परिवार किस तरह की सोच पर आधारित है?

शाहरुख और गौरी का परिवार सेक्युलर सोच पर आधारित है और वे दोनों धर्मों को अपनाते हैं।

उनके बच्चे किस तरह का धर्म अपनाते हैं?

शाहरुख और गौरी के बच्चे भारतीय हैं और उनका धर्म इंसानियत है।

गौरी और शाहरुख की कहानी का क्या संदेश है?

उनकी कहानी समझौते और आपसी सम्मान का संदेश देती है, जो इंटरफेथ कपल्स को प्रेरित करती है।

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